Pravachan

ज्ञानार्णव

महान ग्रंथराज ज्ञानार्णव ग्रंथ पर जब जैन दर्शन के परम ज्ञाता, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचन हुए तो श्रोता गण आश्चर्य से भर गए, उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि जैसे ध्यान के विषय में जो हम जानते थे वह तो कुछ भी नहीं था। वास्तव में ध्यान क्या होता है? यह तो अब जाना। इस playlist में पूज्य मुनि श्री के ग्रंथराज ज्ञानार्णव पर हुए प्रवचनो के वीडियो दिए गए हैं। ध्यान के विषय और 12 भावनाओं पर आधारित प्रवचन श्रोताओं के मन को झकझोर कर रख देते हैं और उन्हें अपना analysis करने पर मजबूर कर देते हैं और उस गलती पर हमारा ध्यान दिलाते हैं जिस पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता। साथ में दी गई photo पर click करके आप इस playlist को देख सकते हैं।


वर्धमान स्तोत्र

स्तोत्र पढ़कर जब भक्ति की जाती है तो उसका अलग ही आनंद होता है। जब हमें उस स्तोत्र का अर्थ पता होता है तो भक्ति में हमारे भाव ज्यादा लगते हैं और जब उस स्तोत्र के श्लोकों,पदों पर हमने गुरु के प्रवचन भी सुने हों तो हमारे भाव और ज्यादा उस स्तोत्र में लगने लगते हैं और यदि वे प्रवचन हम उन गुरु के मुख से सुन रहे हैं जो उसके रचयिता भी हैं, तो ऐसा संयोग तो बहुत पुण्य से ही मिल पाता है। “वर्धमान स्तोत्र” के रचयिता परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के श्री मुख से वर्धमान स्त्रोत के ही ऊपर प्रवचन सुनकर श्रोताजन भक्ति की ऐसी गंगा में सराबोर हो जाते हैं जिसका अनुभव ही निराला होता है। ऐसा ही पुण्य अवसर आप इस playlist के video देखकर पा सकते हैं।


प्रवचनसार (ज्ञान तत्व अधिकार)

गर्मी से तपती हुई धरती पर जब मेघों से वर्षा होती है तो सभी जगह हरियाली छा जाती है। इसी प्रकार जब महान ग्रंथराज प्रवचनसार पर परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगलमय वाणी में, प्रवचन के रूप में ज्ञान रूपी अमृत की वर्षा हुई तो ज्ञान के पिपासु श्रोतागणों के मन और आत्मा में खुशहाली छा गई। जो लोग प्रवचनसार जैसे महान ग्रंथ को और उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य, द्रव्य-गुण-पर्याय, ज्ञान-ज्ञेय-ज्ञायक, भव्य-अभव्य आदि शब्दों को कोशिश करके भी समझ नहीं पा रहे थे, उनके लिए तो जैसे कोई खजाना ही खुल गया। इन प्रवचनों को पारस चैनल पर भी daily सुनने के लिए श्रोतागण बेसब्री से इंतजार करते थे। इन्हीं प्रवचनों के वीडियो की playlist आप यहां देख सकते हैं:

श्रायसपथ

श्रायस पथ – अथार्त कल्याण का मार्ग। इस मार्ग पर चलकर ही यह मनुष्य जन्म सफल हो पाता है। इस मार्ग पर चलने वालों को सबसे पहले कौन सा ज्ञान होना जरूरी है, यही पूज्य मुनि श्री ने इन प्रवचनों के माध्यम से समझाया है। ये प्रवचन इसलिए भी खास हैं क्योंकि ‘श्रायस पथ’ परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी की रचना है और इस रचना पर ही मुनि श्री के अनोखे चिन्तन के साथ, जन मन को भाने वाले, मानव समुदाय का मार्गदर्शन करने वाले ये प्रवचन हैं। दुर्जन से भी द्वेष ना आए, देव – आगम – गुरु की महिमा, पांच व्रत, आत्म चिंतन आदि ऐसे विषयों को लेकर अद्भुत मार्गदर्शन इन प्रवचनों में मिलता है जो सभी को हृदय से प्रभावित करता है।

द्रव्य संग्रह

श्रावकगण की मनोस्थिति को समझते हुए उनको किसी विषय का step by step, सरल एवं मनोवैज्ञानिक तरीके से ज्ञान कराना और उस विषय को interesting बना देना परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों की विशेषता है। जैन आगम के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘द्रव्य संग्रह ‘ पर जब पूज्य मुनि श्री ने अपनी चिरपरिचित सरल भाषा और सुगम्य शैली में प्रवचन दिए तो श्रोताओं को यह ग्रंथ आसानी से समझ में आया और उनको इसमें interest भी आने लगा। इन प्रवचनों को सुनकर श्रोतागण व्यवहारनय -निश्चयनय, दर्शनोपयोग – ज्ञानोपयोग आदि का अंतर और सात तत्वों का द्रव्य और भाव रुप से अर्थ भी बहुत easily समझ गये जिसमें वह पहले बहुत मुश्किल महसूस करते थे।


इष्टोपदेश

इष्टोपदेश = इष्ट+ उपदेश, अर्थात प्रिय लगने वाले उपदेश। इस ‘इष्टोपदश’ ग्रंथ पर ही परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगलमय वाणी में, जन-जन को इष्ट लगने वाले, ये प्रवचन हैं। इन प्रवचनों को सुनकर श्रोतागण को ग्रंथ का ज्ञान भी होता है, स्वाध्याय भी होता है, ग्रंथ easily समझ में भी आता है, गुरु का चिंतन और जीवन जीने के सूत्र और tips भी उनको इनसे मिलते हैं। इसके साथ ही उनका ये आत्मविश्वास भी बढ़ता है कि उन्होंने इस ग्रंथ को पूरी तरह से समझ लिया है। ये प्रवचन श्रोतागण को इसलिए भी इष्ट (प्रिय) लगते हैं क्योंकि ये एक उच्च स्तर का सही और उपयुक्त आत्मिक ज्ञान भी देते हैं जो बहुत कम और बहुत सौभाग्य से ही किसी को मिल पाता है।

प्राकृत

प्राकृत भाषा एक प्राचीन भाषा है। हमारे बहुत से ग्रंथ इसी भाषा में लिखे गए हैं। यह एक बहुत ही सरल भाषा है, जिसे कोई भी आसानी से सीख सकता है, पढ़ सकता है और सिखा सकता है। साथ में दी गई video playlist में परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज श्रावकजन को प्राकृत भाषा पढ़ना और लिखना सिखा रहे हैं। इसमें प्राकृत वर्णमाला, स्वर, व्यंजन, प्राकृत संख्या, व्याकरण और प्राकृत भाषा में संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया आदि का प्रयोग करके कैसे वाक्य बनाते हैं, यह सब समझाया गया है। साथ ही एक वीडियो में पूज्य मुनि श्री की मधुर आवाज में प्राकृत भाषा में ही आप उनका प्रवचन सुन सकते हैं जिसको सुनकर मन प्रसन्नता से भर जाता है।

Lock Down Tips(Short clips) – Self Discovery

अर्हं योग द्वारा मानवता का परोपकार करने वाले परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने मानव समुदाय की पीड़ा और कष्ट को समझा और उनका सही मार्गदर्शन करने के लिए “21 दिन की आध्यात्मिक यात्रा” के नाम से एक प्रोग्राम शुरू किया। इस आध्यात्मिक यात्रा के प्रोग्राम ने समानव समुदाय को भय, चिंता, निराशा और depression की राह पर जाने से रोका और उन्हें एक नए उत्साह, उमंग और positiveness से भरे रास्ते पर चलना सिखाया।

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