श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय कक्षा

अध्याय -6

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल वाणी में तत्त्वार्थ सूत्र का
नए रूप में (Animations और Visualizations के साथ) स्वाध्याय

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स्वाध्याय ( Class ) –30
परनिन्दा और आत्म-प्रशंसा घातक क्यों हैं?
अन्तराय कर्म के बन्ध से कैसे बचें?

( सूत्र: 26-27)

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स्वाध्याय ( Class ) –29
आवश्यकापरिहाणि और मार्ग प्रभावना भावना क्या हैं?
प्रवचन भक्ति और प्रवचन वत्सलत्व भावना में अन्तर

( सूत्र: 24-25)

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स्वाध्याय ( Class ) –28
साधु समाधि और वैय्यावृत्यकरण भावना में अन्तर
किसकी भक्ति से तीर्थंकर पद प्राप्त होता है?

( सूत्र: -24)

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स्वाध्याय ( Class ) –27
तीर्थंकर पद की प्राप्ति कराने वाली भावनाएं

( सूत्र: -24)

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स्वाध्याय ( Class ) –26
कौन से जीव तीर्थंकर भगवान बनते हैं?
दर्शन विशुद्धि और विनय सम्पन्नता भावना क्या है?

( सूत्र: -24)

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स्वाध्याय ( Class ) –25
सुन्दर शरीर पाने के लिए किन कुटिलताओं से बचें?
सुन्दर और दिव्यांग शरीर किन कर्मों के कारण मिलता है?

( सूत्र: 22-23)

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स्वाध्याय ( Class ) –24
वैमानिक देवों में कौन जाता है? सम्यग्दर्शन से देवायु
का बन्ध एवं सम्यग्दर्शन क्यों छूट जाता है?

( सूत्र: -21)

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स्वाध्याय ( Class ) –23
अकाम निर्जरा और बाल तप से क्या तात्पर्य है?
इससे देव आयु का आश्रव कैसे होता है?

( सूत्र: -20)

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स्वाध्याय ( Class ) –22
शील व व्रत रहित जीवों को कौन सी आयु का बन्ध होता है?
स्वर्ग (देव गति) में कौन जाता है?

( सूत्र: -19)

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स्वाध्याय ( Class ) –21
पशु गति में जाने से कैसे बचें?
किस कारण हमें ये मनुष्य जन्म मिला?
कौन सी गति में जाने के कार्य हम कर रहें हैं?

( सूत्र: 16-18)

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स्वाध्याय ( Class ) –20
भय, जुगुप्सा आदि नोकषाय के आश्रव का कारण
एवं नरक आयु का बन्ध क्यों हो जाता है?

( सूत्र: -15)

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स्वाध्याय ( Class ) –19
चरित्र मोहनीय कर्म के कारण
इनसे कैसे बच सकते हैं?

( सूत्र: -14)

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स्वाध्याय ( Class ) –18
अवर्णवाद से दर्शन मोहनीय कर्म का बन्ध
एवं संघ, धर्म और देव का अवर्णवाद कैसे होता है?

( सूत्र: -13)

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स्वाध्याय ( Class ) –17
श्रुत (शास्त्र) अवर्णवाद कैसे होता है?
इससे कैसे बचें?

( सूत्र: -13)

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स्वाध्याय ( Class ) –16
केवली अवर्णवाद क्या है ये कैसे होता है?

( सूत्र: -13)

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स्वाध्याय ( Class ) –15
साता वेदनीय कर्म (सुख) के कारण
योग और संयम से पुण्य का बन्ध कैसे होता है?

( सूत्र: -12)

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स्वाध्याय ( Class ) –14
सामान्य और विशेष पुण्य का बन्ध कैसे होता है?
एवं सराग संयम से पुण्य आश्रव

( सूत्र: -12)

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स्वाध्याय ( Class ) –13
अनुकम्पा और दया में अन्तर
एवं अनुकम्पा के प्रकार

( सूत्र: -12)

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स्वाध्याय ( Class ) –12
उपघात भाव क्या है?
असाता वेदनीय कर्म के बन्ध से कैसे बचें?
एवं दुखी होने से भविष्य में भी उत्पन्न हो जाता है दुख

( सूत्र: -11)

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स्वाध्याय ( Class ) –11
मात्सर्य भाव क्या है? इससे क्या क्षति होती है?
एवं अन्तराय-आसादना से कर्म का बन्ध कैसे होता है?

( सूत्र: -10)

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स्वाध्याय ( Class ) –10
ज्ञानावरणी कर्म के बन्ध से कैसे बचें? प्रदोष
एवं निह्नव क्या है? इनसे कर्म का बन्ध कैसे होता है?

( सूत्र: -10)

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स्वाध्याय ( Class ) –9
संकल्प नहीं लेना मौन स्वीकृति या अनुमोदना जैसा है,
एवं अजीव अधिकरण से आश्रव कैसे होता है?

( सूत्र: -9)

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स्वाध्याय ( Class ) –8
शक्ति का आश्रव पर प्रभाव, संकल्प से रुकता है आश्रव
एवं कृत-कारित-अनुमोदन, संरम्भ-समारम्भ-आरम्भ से आश्रव

( सूत्र: 7-8)

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स्वाध्याय ( Class ) –7
कर्मों का तीव्र आश्रव किसे होता है?
एवं तीव्र, मन्द, ज्ञात, अज्ञात भाव का आश्रव पर प्रभाव

( सूत्र: -6)

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स्वाध्याय ( Class ) –6
ईर्यापथ आस्रव और साम्परायिक आस्रव में अन्तर
एवं साम्परायिक आस्रव के कारण व क्रियाएँ

( सूत्र: -5)

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स्वाध्याय ( Class ) –5
आत्मा शुद्ध कैसे होती है? अकषाय और सकषाय जीव
एवं आश्रव पर कषाय का प्रभाव

( सूत्र: -4)

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स्वाध्याय ( Class ) –4
पुण्य और पाप से तात्पर्य, सम्यग्दृष्टि और मिथ्यादृष्टि
के पुण्य में अन्तर एवं शुभ-अशुभ उपयोग
( सूत्र: -3)

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स्वाध्याय ( Class ) –3
13 वे गुणस्थान तक आत्मा कर्म का कर्ता क्यों है?
एवं सूत्र-1 का नया चिन्तन

( सूत्र: 1-2)

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स्वाध्याय ( Class ) –2
काय-वचन-मन योग के भेद, योग और आश्रव में सम्बन्ध,
एवं आश्रव कौन से गुणस्थान तक होता है?

( सूत्र: 1-2)

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स्वाध्याय ( Class ) –1
योग के प्रकार एवं अन्तरंग और बहिरंग कारण

( सूत्र: -1)

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Note– प्रतिदिन की स्वाध्याय कक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न, अभ्यास पेपर, लिखित नोट्स, summary आदि अध्ययन सामग्री एवं विजेताओं के नाम फोटो को, अभ्यास सामग्री के लिंक पर click करके देखा जा सकता है —

अभ्यास सामग्री Click here

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय Revision [ अध्याय 6]

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र Online स्वाध्याय क्यों है अनूठा स्वाध्याय ?

क्या है इसमें विशेष ?

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       स्वाध्याय वह माध्यम है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने बारे में भी जानता है और अपने चारों तरफ की दुनिया की वास्तविकता के बारे में भी जानना सीखता है। श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथराज जैन आगम का सर्व प्रचलित, सर्व प्रसिद्ध और सर्वमान्य ग्रंथ है। सम्पूर्ण जैन आगम इस ग्रंथ में सार रूप में समाया हुआ है। श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ को जिसने एक बार अच्छे से समझ लिया, उसको जैन आगम के बारे में basic और महत्वपूर्ण ज्ञान हो जाता है। प्रत्येक जैन व्यक्ति एवं परिवार को कम से कम, श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का ज्ञान तो होना ही चाहिए, तभी उनका, इतने पुण्योदय से मिले जैन कुल में, जन्म लेना सफल होगा। आधुनिक समय में यदि हमने विज्ञान, टेक्नोलॉजी आदि अनेक तरह का खूब ज्ञान प्राप्त किया और उसके सहारे जिंदगी में आगे बढ़े, लेकिन हमने उस महत्वपूर्ण ज्ञान को नहीं जाना, जिससे आत्मिक रूप से यह जन्म ही नहीं,बल्कि आगे के जन्म भी सफल हो जाते तो दुर्भाग्य जैसा ही होगा। 

        श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ को सभी बाल, युवा, वृद्ध सरलता से समझ सकें, उसका चिंतन कर सकें, इसी बात को ध्यान में रखकर, अर्हं गुरुकुलं श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय को एक नए और अनोखे रूप में सबके सामने लेकर आया है। स्वाध्याय के क्षेत्र में इसे एक नया innovation, खोज या नया idea कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

        सभी क्षेत्रों में नए नए प्रयोग, ideas, रिर्सच से, जैसे न केवल तेजी से विकास होता है बल्कि एक नयापन भी बना रहता है, वैसे ही स्वाध्याय के क्षेत्र में, इस नए प्रयोग से तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय बहुत रुचिकर एवं आकर्षक बन गया है। 

 इस तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय में अनेक ऐसी सुन्दर विशेषताएं हैं जो इसे अनूठा स्वाध्याय बना देती हैं जैसे कि—

       (1) यह स्वाध्याय कक्षा, श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा की गई वाचना पर आधारित है। पूज्य मुनि श्री के प्रवचन तो उनकी अद्भुत, सरल शैली के लिए जाने ही जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन, गूढ़ विषय भी अति सरल रूप से समझ में आ जाता है। अर्हं गुरुकुलं ने इन सरल प्रवचनों को नई टेक्नोलॉजी के साथ एवं अनेक माध्यमों से और ज्यादा सरल बना दिया है।

       (2) पूज्य मुनिश्री की तत्त्वार्थ सूत्र वाचना को, इस स्वाध्याय में, एक कक्षा का रूप दे दिया गया है। ऐसा नहीं लगता कि हम स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे कि हम किसी कक्षा में बैठकर ही कुछ सीख रहे हैं, जिसमें टीचर भी है और साथ में लिखने के लिए Digital बोर्ड भी है वर्तमान समय में जैसे बच्चे Online Class के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही यहां पर विद्यार्थी online class के माध्यम से श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं। 

       (3) वाचना को आधुनिक Online class के रूप में प्रस्तुत करने का यह अद्भुत नया प्रयोग है। अनेक तरह के ग्राफिक, एनीमेशन, वीडियो visualization के साथ यह स्वाध्याय कक्षा अनोखी बन गई है।

        (4) स्वाध्याय कक्षा की screen पर एक तरफ पूज्य मुनि श्री का वीडियो दिखता है, जिसमें वह तत्त्वार्थ सूत्र को समझा रहे हैं। उसी screen पर साथ में डिजिटल बोर्ड पर महत्वपूर्ण Heading व नोट्स आते रहते हैं, जिससे विषय में एकाग्रता बनी रहती है। डिजिटल बोर्ड पर केवल Black colour  से ही नहीं, बल्कि अनेक colours में लेखन दिखता है, जो सुन्दर लगता है।

        (5) इसके साथ ही, जहाँ विषय को अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है, वहाँ वीडियो और ग्राफिक एनिमेशन दिखाई देते हैं। इससे विषय बहुत ही सरल और रुचिकर बन जाता है और मन इतना एकाग्र हो जाता कि उसका कहीं और जाने का मन नहीं करता। 

        (6) वाचना के साथ चलने वाला visualization ह्रदय को प्रभावित कर जाता है। सभी विषय सरलता से छोटे बच्चों को भी समझ में आ जाते हैं। visualization की स्मृति मस्तिष्क में गहराई से बैठती है तो उसके साथ विषय भी स्मृति में बना रहता है।

       (7) visualization को अनेक तरह से आकर्षक बना दिया गया है। कभी स्क्रीन का कलर change होता है, तो कभी उस पर राइटिंग का कलर change हो जाता है। कभी सुन्दर एनिमेशन आ जाते हैं तो कहीं अनेक प्रकार के वीडियो। कुल मिलाकर colourful और variety से भरपूर visualization के साथ ये कक्षाएं सभी को आकर्षित करती हैं। इस कार्य के लिए तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय टीम का कठिन परिश्रम बहुत सराहनीय है।

       (8) कक्षा के अंत में उस दिन की कक्षा का एक छोटा सा revision होता है और कक्षा के प्रारंभ में भी पूर्व दिन की कक्षा का revision होता है। जिससे  की विषय का पूर्ण content स्मृति में रखने में सहायता मिलती हैं। एनिमेशन के साथ, यह quick revision भी सरल बन जाता है। 

(9) कक्षा के अंत में पूज्य मुनि श्री के मधुर स्वर में जिनवाणी स्तुति सुनने और पढ़ने का सौभाग्य भी विद्यार्थियों को मिलता है।

 (10)  कक्षा में, 1 सवाल भी अंत में पूछा जाता है, जिसका जवाब देने वाले विद्यार्थियों में से, तीन भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।

(11)  विद्यार्थियों को इसके साथ ही प्रत्येक दिन की, कक्षा की लिखित सामग्री, लिखित summary और अपना मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास पत्र भी दिया जाता है। 

(12) प्रत्येक अध्याय के समाप्त होने के बाद एक परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है।  Revision classes एवं अनेक माध्यमों से विद्यार्थियों को इसकी तैयारी भी करा दी जाती है। 

       इस अनूठी Online स्वाध्याय  कक्षा में, अनूठे ढंग से अध्ययन करते हुए विद्यार्थियों को श्री तत्वार्थ सूत्र जी ग्रन्थ का स्वाध्याय करने का एक नया अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव हो रहा है।

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वैराग्य शतक वाचना

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की

मंगलमयी वाणी में लघु कृति “वैराग्य शतक”

पर लोक कल्याणकारी वाचना
एवं
श्रेणिक चरित्र कथा

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वाचना(प्रवचन) -50
(17-Nov-2023)
अमृत व औषध रूप हैं-जिनवचन,
दुख-कष्ट दूर करता है-जिनवचनों का स्मरण, कैसे ?
(गाथा : 102-104)

वाचना(प्रवचन) -49
(16-Nov-2023)
दुर्लभ जिनधर्म है-कल्पवृक्ष समान,
सबसे सच्चा बन्धु ये-है सबसे महान, क्यों?
(गाथा : 100-101)

वाचना(प्रवचन) -48
(14-Nov-2023)
जाने और माने जो अपने आत्म को,
वही जान सकता है वास्तव में अध्यात्म को, क्यों?
(गाथा : -99)

वाचना(प्रवचन) -47
(11-Nov-2023)
दूर होगी शारीरिक, मानसिक अस्वस्थता,
जब आएगी आत्मिक स्वस्थता, कैसे ?
(गाथा : -98)

वाचना(प्रवचन) -46
(10-Nov-2023)
सम्यक ज्ञान की वृद्धि,
जीवन में लाती है सुख और समृद्धि, कैसे?
(गाथा : -97)

वाचना(प्रवचन) -45
(8-Nov-2023)
दुर्लभ संयोग से मिलता है जिनमत,
मोक्ष मार्ग पर बढ़ने के लिए चाहिए हिम्मत, क्यों?
(गाथा : -96)

वाचना(प्रवचन) -44
(7-Nov-2023)
दुर्गुणों के साथ गुण,
और गुणों के साथ अवगुण,
(गाथा : -95)

वाचना(प्रवचन) -43
(5-Nov-2023)
राग में होता है भय,
वैराग्य बनाता है निर्भय, कैसे?
(गाथा : -94)

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वाचना(प्रवचन) -42
(4-Nov-2023)
सुख चला जाता है, आ जाता है दुख,
कैसे मिलता है सच्चा, स्थाई और आत्मिक सुख?
(गाथा : 91-92)

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वाचना(प्रवचन) -41
(2-Nov-2023)
मोह में डूबा जीव, मोह को न पहचाने,
आत्मा को जानता नहीं, पर को अपना माने, कब?
(गाथा : -91)

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वाचना(प्रवचन) -40
(1-Nov-2023)
चखे एक बार जो आत्म-रस को,
लगे भोग-रस नीरस उसको, क्यों?
(गाथा : -90)

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वाचना(प्रवचन) -39
(31-Oct-2023)
सबसे बड़े अज्ञान को जानें?
राग द्वेष की फिसलन को पहचानें, किस प्रकार?
(गाथा : -89)

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वाचना(प्रवचन) -38
(29-Oct-2023)
जीव आता है, जीव जाता है,
ज्ञान जीव को दुख से बचाता है, कैसे?
(गाथा : -87)

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वाचना(प्रवचन) -37
(28-Oct-2023)
आचार्य भगवन की अद्भुत समता,
याद करें, तो बढ़ेगी दुख सहने की क्षमता, कैसे?
(मंत्र जाप के साथ गुणों का स्मरण)
(गाथा : -86)

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वाचना(प्रवचन) -36
(26-Oct-2023)
दुखों को करें कम, सहन शक्ति बढ़ाएं,
नरक के दुखों को स्मरण में लाएं, कब?
(गाथा : 84-85)

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वाचना(प्रवचन) -35
(25-Oct-2023)
स्थावर जीवों के दुखों का चिन्तन,
दूर करे कर्मों का बन्धन, कैसे?
(गाथा : 82-83)

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वाचना(प्रवचन) -34
(24-Oct-2023)
तिर्यंच गति के दुखों का ध्यान,
बचाएगा भविष्य में इन दुखों से प्राण, किस प्रकार ?
(गाथा : 80-81)

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वाचना(प्रवचन) -33
(23-Oct-2023)
पर्याप्त नहीं केवल जानकारी, आवश्यक है समझदारी,
बुद्धि चले कर्म अनुसार
(गाथा : -79)

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वाचना(प्रवचन) -32
(21-Oct-2023)
स्नेह की बेड़ी, रस का बन्धन
जीवन में दुखों को देतें हैं आमंत्रण, क्यों?
(गाथा : 77-78)

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वाचना(प्रवचन) -31
(20-Oct-2023)
पर मरण देखकर भी ढीठ बना मनुष्य
पाप से डरता नहीं-आत्म हित करता नहीं, क्यों?
(गाथा : 73-75)

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वाचना(प्रवचन) -30
(19-Oct-2023)
आत्मा की याद-दूर करे प्रमाद,
प्रमाद को कैसे समझें?
(गाथा : 72-74)

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वाचना(प्रवचन) -29
(18-Oct-2023)
मनुष्य जन्म संसार-सागर का किनारा,
क्यों डूब जाती है कश्ती हर बार यहाँ?
(गाथा : 69-71)

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वाचना(प्रवचन) -28
(17-Oct-2023)
पुद्गल को खाया-पुद्गल को खिलाया,
अनन्त जन्मों में तृष्णा को बढ़ाया,
इस तृष्णा को कैसे जीतें?
(गाथा : 66-68)

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वाचना(प्रवचन) -27
(16-Oct-2023)
डरना भी अच्छा है, कब?
पूर्व जन्मों का चिन्तन, कैसे करता दुख को कम
(गाथा : 63-65)

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वाचना(प्रवचन) -26
(14-Oct-2023)
मन-वचन-काय की कुटिलता का फल,
कर्म बन्ध से डरें और कर्म फल का करें चिन्तन
(गाथा : 60-62)

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वाचना(प्रवचन) -25
(13-Oct-2023)
जीवन करें व्यतीत पर याद रखें पूर्व जन्मों का अतीत,
चिन्ता से चिन्तन की ओर
(गाथा : 57-59)

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वाचना(प्रवचन) -24
(12-Oct-2023)
अन्तरंग प्रमाद क्या है? बेचारा और अप्प बैरी न बनें,
इज्जत के साथ मरण को चुनें
(गाथा : 54-56)

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वाचना(प्रवचन) -23
(11-Oct-2023)
निगोद में जाना आसान है,लेकिन वहाँ से निकलना
बहुत दुर्लभ है, क्यों?
(गाथा : 51-53)

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वाचना(प्रवचन) -22
(10-Oct-2023)
जीव का भव-भव में भ्रमण,
कराता है असंख्यात माँ का रुदन,
नरक से ज्यादा दुख निगोद में क्यों?
(गाथा : 48-50)

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वाचना(प्रवचन) -21
(9-Oct-2023)
मोह का दुख या तत्त्व चिन्तन का सुख
आपने क्या चुना?
(गाथा : 46-47)

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वाचना(प्रवचन) -20
(6-Oct-2023)
सिंह-मुख में हिरण समान जीवन,
भोगों को भोगा या भोगों ने भोग लिया
(गाथा : 43-45)

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वाचना(प्रवचन) -19
(4-Oct-2023)
अर्थ, व्यर्थ और अनर्थ से भरा जीवन,
अपने कार्यों का परीक्षण कैसे करें?
(गाथा : 40-42)

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वाचना(प्रवचन) -18
(3-Oct-2023)
लक्ष्मी चंचल, सुख अस्थिर और संयोग हैं क्षणभंगुर,
स्वयं को समझें और addiction को पहचानें
(गाथा : 37-39)

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वाचना(प्रवचन) -17
(30-Sep-2023)
धर्म करने के लिए बुढ़ापे की प्रतीक्षा न करें
एवं चार प्रकार की शुद्धि का महत्व
(गाथा : 35-36)

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वाचना(प्रवचन) -16
(18-Sep-2023)
मेघ के समान क्षणभंगुर जीवन
और जीवन का सार
(गाथा : 32-34)

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वाचना(प्रवचन) -15
(16-Sep-2023)
बड़े होकर भी बच्चे जैसे हैं आप, क्यों?
कर्म बन्ध से बने सम्बन्ध
(गाथा : 29-31)

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वाचना(प्रवचन) -12
(13-Sep-2023)
जाया और माया का खेल,
संसार एक नाटक-सूत्रधार है कर्म
आत्मा को सजा (सजाओं) -देकर शरीर को सजा
(गाथा : -22)

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वाचना(प्रवचन) -11
(12-Sep-2023)
पूर्व जन्मों के अनन्त माता-पिता-बंधुओं से भरा संसार,
संसार में कौन शरण?
संसार के बन्धन हैं परिवार आदि सम्बन्ध
(गाथा : 19-21)

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वाचना(प्रवचन) -9
(9-Sep-2023)
संसार-आठ कर्मों का जाल,
कमल-पत्र पर जल-बूँद के समान सुख वैभव
एवं बल, सौन्दर्य, यौवन हैं काल के ग्रास
(गाथा : 13-15)

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वाचना(प्रवचन) -8
(8-Sep-2023)
सूक्ष्म कर्मों के आधीन जीवात्मा,
संसार में किसका कितना साथ?
मृत्यु के बाद भी किसका वियोग नहीं होगा?
(गाथा : 10-12)

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वाचना(प्रवचन) -7
(7-Sep-2023)
काल रूपी सर्प और भ्रमर द्वारा काया का घात,
श्री कृष्ण जन्म कथा
एवं काल से बचने का उपाय
(गाथा : 7-9)

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वाचना(प्रवचन) -6
(6-Sep-2023)
कालचक्र में घटती आयु, राग द्वेष के खेल मे पिसने से बचें
एवं राजा श्रेणिक को मुनिराज का सम्बोधन
(गाथा : -6)

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वाचना(प्रवचन) -5
(16-Aug-2023)
मैं कौन हूँ? (स्वयं को जानें)
कौन से तीन राक्षस प्रत्येक व्यक्ति के पीछे लगे हैं?
एवं राजा श्रेणिक का पश्चाताप
(गाथा : -5)

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वाचना(प्रवचन) -4
(14-Aug-2023)
दुख की फसल में सुख का बीज कैसे बोएं?
राजा श्रेणिक द्वारा दिगम्बर मुनिराज पर उपसर्ग
एवं पंथवाद को छोड़कर करें दिगम्बर साधु की आराधना
(गाथा : -4)

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वाचना(प्रवचन) -3
(12-Aug-2023)
आत्म साधना में विलम्ब करना घातक
जाप, ध्यान, दान, संयम आदि कार्य तुरन्त करें
एवं रानी चेलना द्वारा पुन: परीक्षा
(गाथा : -3)

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वाचना(प्रवचन) -2
(11-Aug-2023)
रागी और वैरागी की सोच में अन्तर
जीवन की सबसे बड़ी गलती क्या है?
एवं रानी चेलना द्वारा जिनधर्म प्रभावना और परीक्षा
(गाथा : -2)

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वाचना(प्रवचन) -1
(10-Aug-2023)
वैराग्य न होना भी आश्चर्य क्यों है? संस्कारों का महत्व
एवं रानी चेलना का दुख
(गाथा : -1)

श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय कक्षा

अध्याय -5

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल वाणी में तत्त्वार्थ सूत्र का
नए रूप में (Animations और Visualizations के साथ) स्वाध्याय

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स्वाध्याय ( Class ) –45
व्यवहार काल का स्वरूप, द्रव्य के गुणों की विशेषताएं
एवं शुद्ध और अशुद्ध पर्याय कब होती हैं?

( सूत्र: 41-43)

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स्वाध्याय ( Class ) –44
पर्याय क्रमवर्ती होती हैं क्रमबद्ध नहीं, क्रमबद्ध पर्याय आगम
का शब्द नहीं है एवं निश्चय काल का स्वरूप

( सूत्र: 39-40)

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स्वाध्याय ( Class ) –43
द्रव्य-गुण-पर्याय में सम्बन्ध, द्रव्य के समान्य-विशेष गुण, पर्याय के
भेद एवं पर्याय क्रमवर्ती होती हैं क्रमबद्ध नहीं

( सूत्र: -38)

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स्वाध्याय ( Class ) –42
पुद्गल परमाणु का परस्पर बन्ध क्यों
और किस प्रकार होता है ?

( सूत्र: 33-37)

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स्वाध्याय ( Class ) –41
सप्त भंग की व्यवस्था क्या है?
विवक्षा और एकांतवाद से तात्पर्य

( सूत्र: -32)

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स्वाध्याय ( Class ) –40
द्रव्य का आस्ति-नास्ति धर्म, अर्पित-अनर्पित व्यवस्था
एवं द्रव्य में स्थित विपरीत गुण-धर्म के कथन की विधि

( सूत्र: -32)

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स्वाध्याय ( Class ) –39
उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य का उदाहरण
एवं नित्‍यता का भाव

( सूत्र: 30-31)

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स्वाध्याय ( Class ) –38
उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य किसे कहते हैं?
क्या सिद्ध भगवान में उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य होता है?

( सूत्र: -29)

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स्वाध्याय ( Class ) –37
द्रव्य का कभी विनाश क्यों नही होता?
एवं वास्तव में आस्तिक कौन है?

( सूत्र: -29)

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स्वाध्याय ( Class ) –36
जैन विज्ञान की व्यापकता, स्कन्ध और अणु की उत्पत्ति
कैसे होती है एवं भेद-संघात क्या है?

( सूत्र: 26-28)

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स्वाध्याय ( Class ) –35
स्कन्ध के प्रकार, कौन से स्कन्ध इन्द्रियों से जाने जाते हैं?
एवं विज्ञान का सीमित और सर्वज्ञ का व्यापक ज्ञान

( सूत्र: -25)

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स्वाध्याय ( Class ) –34
पुद्गल के भेद, परमाणु के गुण और विशेषताएँ
एवं स्कन्ध के प्रकार (उदाहरण सहित)

( सूत्र: -25)

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स्वाध्याय ( Class ) –33
पुद्गल के 4 गुण और 10 पर्यायें एवं इनके विभिन्न प्रकार

( सूत्र: 23-24)

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स्वाध्याय ( Class ) –32
व्यवहार काल में Time का विभाजन
एवं पुद्गल द्रव्य के लक्षण

( सूत्र: 22-23)

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स्वाध्याय ( Class ) –31
वर्तना, परिणमन और क्रिया में सम्बन्ध,
काल का महत्व एवं परत्व-अपरत्व क्या है?

( सूत्र: -22)

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स्वाध्याय ( Class ) –30
पुरुषार्थ -गुणस्थान -सम्यग्दर्शन कौन से परिणमन हैं?
पुरुषार्थ हमारे हाथ में है वैस्रसिक परिणमन या परिणाम नही

( सूत्र: -22)

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स्वाध्याय ( Class ) –29
वर्तना और परिणमन में अन्तर, अनादि-सादि और
वैस्रसिक-प्रायोगिक परिणमन एवं गुणस्थान कैसे बनते हैं?

( सूत्र: -22)

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स्वाध्याय ( Class ) –28
कालाणु क्या है? काल द्रव्य के प्रकार
एवं परमार्थ (निश्चय) काल का वर्तना लक्षण और महत्व

( सूत्र: -22)

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स्वाध्याय ( Class ) –27
पुद्गल द्वारा पुद्गल पर उपकार कैसे होता है?
जीव का जीव पर उपकार (परस्परोपग्रहोजीवानाम्)

( सूत्र: -21)

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स्वाध्याय ( Class ) –26
निमित्त द्वारा असाता की उदीरणा कैसे हो जाती है?
जीवन और मरण के रूप में पुद्गल का उपकार

( सूत्र: -20)

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स्वाध्याय ( Class ) –25
सुख और दुख के रूप में पुद्गल का उपकार, सुख के कारण
एवं दुख को उपकार क्यों माना गया है?

( सूत्र: -20)

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स्वाध्याय ( Class ) –24
मन का अभिघात और पराभव, प्राणापान (श्‍वासोच्‍छवास) पौद्गलिक क्यों
एवं संसारी जीव अमूर्तिक क्यों है?

( सूत्र: -19)

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स्वाध्याय ( Class ) –23
शब्द शक्ति का महत्व, द्रव्य मन-भाव मन
एवं वचन और मन को पौद्गलिक क्यों माना जाता है?

( सूत्र: -19)

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स्वाध्याय ( Class ) –22
पुद्गल द्रव्य का शरीर और वचन के रूप में जीव द्रव्य पर उपकार,
द्रव्य वचन-भाव वचन एवं वचन की उत्पत्ति कैसे होती है?

( सूत्र: -19)

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स्वाध्याय ( Class ) –21
धर्म-अधर्म, आकाश द्रव्य के उपकार का अनुभव
एवं द्रव्यार्थिक और पर्यायार्थिक नय से द्रव्यों का उपकार व स्वतन्त्रता

( सूत्र: -18)

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स्वाध्याय ( Class ) –20
जीव द्रव्य में संकोच-विस्तार कैसे अनुभव में आता है?
धर्म-अधर्म द्रव्य का उपकार एवं उदासीन-प्रेरक निमित्त

( सूत्र: -17)

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स्वाध्याय ( Class ) –19
जीव द्रव्य में संकोच-विस्तार की सीमा एवं कारण

( सूत्र: -16)

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स्वाध्याय ( Class ) –18
लोकाकाश के असंख्यात प्रदेश में अनन्त पुद्गल परमाणु कैसे समा जाते हैं?
एवं लोकाकाश में पुद्गल और जीव द्रव्य का अवगाहित होना

( सूत्र: 14-15)

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स्वाध्याय ( Class ) –17
आधार-आधेय सम्बन्ध, युत सिद्ध-अयुत सिद्ध सम्बन्ध
एवं लोकाकाश में पुद्गल द्रव्य का अवगाह

( सूत्र: 13-14)

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स्वाध्याय ( Class ) –16
लोकाकाश का अर्थ, विभूत्व, अवगाहन शक्ति
एवं धर्म-अधर्म द्रव्य किस प्रकार लोकाकाश में व्याप्त रहते हैं?

( सूत्र: 12-13)

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स्वाध्याय ( Class ) –15
पुद्गल स्कन्ध और अणु के प्रदेश
एवं क्या शुद्ध जीव भी क्रिया करते हैं?

( सूत्र: 10-11)

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स्वाध्याय ( Class ) –14
आत्मा के प्रदेश कैसे अनुभव में आते हैं?
एवं द्रव्य का एक व अनेक रूप स्वभाव

( सूत्र: -9)

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स्वाध्याय ( Class ) –13
अनन्त प्रदेश वाले द्रव्य कौन से हैं? द्रव्य की अवगाहन, संकोच, विस्तार शक्ति
एवं जीव के चल और अचल प्रदेश

( सूत्र: -9)

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स्वाध्याय ( Class ) –12
जीव और पुद्गल द्रव्य की सक्रियता में सहायक द्रव्य,
जीव का संकोच और विस्तार स्वभाव
एवं असंख्यात प्रदेश वाले द्रव्य कौन से हैं?

( सूत्र: -8)

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स्वाध्याय ( Class ) –11
आकाश, धर्म और अधर्म द्रव्य की विशेषताएँ, सक्रिय और निष्क्रिय द्रव्य
एवं जीव द्रव्य सक्रिय है या निष्क्रिय?

( सूत्र: 6-7)

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स्वाध्याय ( Class ) –10
आकाश द्रव्य का सीमांकन, गुण व स्वभाव

( सूत्र: -6)

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स्वाध्याय ( Class ) –9
रूपी और अरूपी द्रव्य, पुद्गल द्रव्य की विशेषता
एवं अन्धेरा कौन सा द्रव्य है?

( सूत्र: -5)

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स्वाध्याय ( Class ) –8
जैन दर्शन और विज्ञान में समानता
एवं द्रव्य के नित्य और अवस्थित होने में क्या अन्तर है?

( सूत्र: 4-5)

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स्वाध्याय ( Class ) –7
द्रव्य के समान्य और विशेष गुण, द्रव्यार्थिक नय और पर्यायार्थिक नय
एवं द्रव्य की नित्यता से तात्पर्य

( सूत्र: -4)

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स्वाध्याय ( Class ) –6
जीव द्रव्य की विशेषता एवं द्रव्य के परिणमन में उसकी अन्तरंग शक्ति
और बाह्य निमित्त का होना क्यों आवश्यक है?

( सूत्र: 2-3)

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स्वाध्याय ( Class ) –5
क्या द्रव्य के परिणमन के लिए परद्रव्य आवश्यक है?
एवं द्रव्य परिणमन के अन्तरंग और बहिरंग निमित्त

( सूत्र: -2)

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स्वाध्याय ( Class ) –4
अजीव अस्तिकाय किसे कहते हैं? द्रव्य में परिवर्तन के प्रकार
एवं परिवर्तन के लिए आवश्यक कारण

( सूत्र: -1)

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स्वाध्याय ( Class ) –3
धर्म और अधर्म द्रव्य के एक साथ रहने का कारण, आकाश द्रव्य का महत्व
एवं पुद्गल द्रव्य का अर्थ व स्वरूप

( सूत्र: -1)

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स्वाध्याय ( Class ) –2
धर्म और अधर्म द्रव्य का अर्थ, कार्य व महत्व

( सूत्र: -1)

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स्वाध्याय ( Class ) –1
छह द्रव्यों का स्वरूप

( सूत्र: -1)

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Note– प्रतिदिन की स्वाध्याय कक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न, अभ्यास पेपर, लिखित नोट्स, summary आदि अध्ययन सामग्री एवं विजेताओं के नाम फोटो को, अभ्यास सामग्री के लिंक पर click करके देखा जा सकता है —

अभ्यास सामग्री Click here

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय Revision [ अध्याय 5]

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र Online स्वाध्याय क्यों है अनूठा स्वाध्याय ?

क्या है इसमें विशेष ?

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       स्वाध्याय वह माध्यम है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने बारे में भी जानता है और अपने चारों तरफ की दुनिया की वास्तविकता के बारे में भी जानना सीखता है। श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथराज जैन आगम का सर्व प्रचलित, सर्व प्रसिद्ध और सर्वमान्य ग्रंथ है। सम्पूर्ण जैन आगम इस ग्रंथ में सार रूप में समाया हुआ है। श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ को जिसने एक बार अच्छे से समझ लिया, उसको जैन आगम के बारे में basic और महत्वपूर्ण ज्ञान हो जाता है। प्रत्येक जैन व्यक्ति एवं परिवार को कम से कम, श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का ज्ञान तो होना ही चाहिए, तभी उनका, इतने पुण्योदय से मिले जैन कुल में, जन्म लेना सफल होगा। आधुनिक समय में यदि हमने विज्ञान, टेक्नोलॉजी आदि अनेक तरह का खूब ज्ञान प्राप्त किया और उसके सहारे जिंदगी में आगे बढ़े, लेकिन हमने उस महत्वपूर्ण ज्ञान को नहीं जाना, जिससे आत्मिक रूप से यह जन्म ही नहीं,बल्कि आगे के जन्म भी सफल हो जाते तो दुर्भाग्य जैसा ही होगा। 

        श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ को सभी बाल, युवा, वृद्ध सरलता से समझ सकें, उसका चिंतन कर सकें, इसी बात को ध्यान में रखकर, अर्हं गुरुकुलं श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय को एक नए और अनोखे रूप में सबके सामने लेकर आया है। स्वाध्याय के क्षेत्र में इसे एक नया innovation, खोज या नया idea कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

        सभी क्षेत्रों में नए नए प्रयोग, ideas, रिर्सच से, जैसे न केवल तेजी से विकास होता है बल्कि एक नयापन भी बना रहता है, वैसे ही स्वाध्याय के क्षेत्र में, इस नए प्रयोग से तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय बहुत रुचिकर एवं आकर्षक बन गया है। 

 इस तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय में अनेक ऐसी सुन्दर विशेषताएं हैं जो इसे अनूठा स्वाध्याय बना देती हैं जैसे कि—

       (1) यह स्वाध्याय कक्षा, श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा की गई वाचना पर आधारित है। पूज्य मुनि श्री के प्रवचन तो उनकी अद्भुत, सरल शैली के लिए जाने ही जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन, गूढ़ विषय भी अति सरल रूप से समझ में आ जाता है। अर्हं गुरुकुलं ने इन सरल प्रवचनों को नई टेक्नोलॉजी के साथ एवं अनेक माध्यमों से और ज्यादा सरल बना दिया है।

       (2) पूज्य मुनिश्री की तत्त्वार्थ सूत्र वाचना को, इस स्वाध्याय में, एक कक्षा का रूप दे दिया गया है। ऐसा नहीं लगता कि हम स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे कि हम किसी कक्षा में बैठकर ही कुछ सीख रहे हैं, जिसमें टीचर भी है और साथ में लिखने के लिए Digital बोर्ड भी है वर्तमान समय में जैसे बच्चे Online Class के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही यहां पर विद्यार्थी online class के माध्यम से श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं। 

       (3) वाचना को आधुनिक Online class के रूप में प्रस्तुत करने का यह अद्भुत नया प्रयोग है। अनेक तरह के ग्राफिक, एनीमेशन, वीडियो visualization के साथ यह स्वाध्याय कक्षा अनोखी बन गई है।

        (4) स्वाध्याय कक्षा की screen पर एक तरफ पूज्य मुनि श्री का वीडियो दिखता है, जिसमें वह तत्त्वार्थ सूत्र को समझा रहे हैं। उसी screen पर साथ में डिजिटल बोर्ड पर महत्वपूर्ण Heading व नोट्स आते रहते हैं, जिससे विषय में एकाग्रता बनी रहती है। डिजिटल बोर्ड पर केवल Black colour  से ही नहीं, बल्कि अनेक colours में लेखन दिखता है, जो सुन्दर लगता है।

        (5) इसके साथ ही, जहाँ विषय को अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है, वहाँ वीडियो और ग्राफिक एनिमेशन दिखाई देते हैं। इससे विषय बहुत ही सरल और रुचिकर बन जाता है और मन इतना एकाग्र हो जाता कि उसका कहीं और जाने का मन नहीं करता। 

        (6) वाचना के साथ चलने वाला visualization ह्रदय को प्रभावित कर जाता है। सभी विषय सरलता से छोटे बच्चों को भी समझ में आ जाते हैं। visualization की स्मृति मस्तिष्क में गहराई से बैठती है तो उसके साथ विषय भी स्मृति में बना रहता है।

       (7) visualization को अनेक तरह से आकर्षक बना दिया गया है। कभी स्क्रीन का कलर change होता है, तो कभी उस पर राइटिंग का कलर change हो जाता है। कभी सुन्दर एनिमेशन आ जाते हैं तो कहीं अनेक प्रकार के वीडियो। कुल मिलाकर colourful और variety से भरपूर visualization के साथ ये कक्षाएं सभी को आकर्षित करती हैं। इस कार्य के लिए तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय टीम का कठिन परिश्रम बहुत सराहनीय है।

       (8) कक्षा के अंत में उस दिन की कक्षा का एक छोटा सा revision होता है और कक्षा के प्रारंभ में भी पूर्व दिन की कक्षा का revision होता है। जिससे  की विषय का पूर्ण content स्मृति में रखने में सहायता मिलती हैं। एनिमेशन के साथ, यह quick revision भी सरल बन जाता है। 

(9) कक्षा के अंत में पूज्य मुनि श्री के मधुर स्वर में जिनवाणी स्तुति सुनने और पढ़ने का सौभाग्य भी विद्यार्थियों को मिलता है।

 (10)  कक्षा में, 1 सवाल भी अंत में पूछा जाता है, जिसका जवाब देने वाले विद्यार्थियों में से, तीन भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।

(11)  विद्यार्थियों को इसके साथ ही प्रत्येक दिन की, कक्षा की लिखित सामग्री, लिखित summary और अपना मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास पत्र भी दिया जाता है। 

(12) प्रत्येक अध्याय के समाप्त होने के बाद एक परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है।  Revision classes एवं अनेक माध्यमों से विद्यार्थियों को इसकी तैयारी भी करा दी जाती है। 

       इस अनूठी Online स्वाध्याय  कक्षा में, अनूठे ढंग से अध्ययन करते हुए विद्यार्थियों को श्री तत्वार्थ सूत्र जी ग्रन्थ का स्वाध्याय करने का एक नया अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव हो रहा है।

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मंगल प्रवचन (सतना)

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की

अमृतमयी वाणी में सिद्ध भक्ति (स्वाध्याय)

पावन वर्षायोग 2023

सतना नगर

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प्रवचन(स्वाध्याय) -32
(9-Aug-2023)
कायोत्सर्ग क्या है? यह क्यों और कैसे किया जाता है?
कायोत्सर्ग का लाभ एवं अभ्यास

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प्रवचन(स्वाध्याय) -31
(8-Aug-2023)
सिद्ध भगवान का स्मरण क्यों करें?
Positive और Negative food क्या है?
एवं राजा श्रेणिक और चेलना का विवाह

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प्रवचन(स्वाध्याय) -30
(7-Aug-2023)
प्रकाशमान सिद्ध भगवान, अर्हं से चैतन्य ज्योति
का ध्यान एवं अभय कुमार का राजा चेटक के राज्य में पहुँचना

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प्रवचन(स्वाध्याय) -29
(5-Aug-2023)
रोग का आतंक, श्रमण संस्कृति की प्राचीनता
एवं समाज में दिगम्बर श्रमणों के विचरण का कारण

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प्रवचन(स्वाध्याय) -28
(4-Aug-2023)
निद्रा और ग्लानि रहित सिद्ध भगवान, दिन की शुरुआत कैसे करें?
एवं राजा श्रेणिक और अभय कुमार का मिलन

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प्रवचन(स्वाध्याय) -27
(3-Aug-2023)
अशुचिता रहित सिद्ध भगवान, पूजा और भक्ति में अन्तर,
अपच रोग को कैसे दूर करें?
एवं अभय कुमार द्वारा शर्तों का पालन

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प्रवचन(स्वाध्याय) -26
(2-Aug-2023)
क्षुधा-तृषा रहित सिद्ध भगवान, भोजन का विज्ञान,
भूख किसको लगती है-शरीर को या आत्मा को?
एवं राजा श्रेणिक की शर्त

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प्रवचन(स्वाध्याय) -25
(1-Aug-2023)
सिद्ध भगवान का उत्कृष्ट सुख, परम सुख
कैसे प्राप्त होता है एवं राजा श्रेणिक का
अभय कुमार के बारे में जानना

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प्रवचन(स्वाध्याय) -24
(31-July-2023)
उपमा रहित असीमित सुख, इन्द्रिय और आत्मिक
सुख में अन्तर एवं अभय कुमार द्वारा परीक्षा का समाधान

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प्रवचन(स्वाध्याय) -23
(29-July-2023)
अपेक्षा रहित सुख, अपेक्षा कब होती है?
एवं राजा श्रेणिक द्वारा नई परीक्षा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -22
(28-July-2023)
प्रतिद्वंद्विता का भाव और इससे कैसे दूर रहें?
डायबिटीज़ से बचने का उपाय
एवं अभय कुमार द्वारा ग्रामीणों की सहायता

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प्रवचन(स्वाध्याय) -21
(27-July-2023)
सिद्ध भगवान का आत्मिक सुख, विषय सुख किसे कहते हैं?
एवं राजा श्रेणिक द्वारा तीसरी परीक्षा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -20
(26-July-2023)
सिद्ध भगवान का स्थिर व अनन्त सुख,
राजा श्रेणिक द्वारा गाँव वालों की दूसरी परीक्षा
एवं अच्छी निद्रा के उपाय

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प्रवचन(स्वाध्याय) -19
(25-July-2023)
बाधा रहित सुख और दुख का प्रतिकार,
आहारदान के समय अपने सुख के लिए गुरुजन को दुख न दें,
अभय कुमार द्वारा समस्या का समाधान

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प्रवचन(स्वाध्याय) -18
(24-July-2023)
अतिशय और चमत्कार में अन्तर
एवं राजा श्रेणिक द्वारा अपमान का बदला

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प्रवचन(स्वाध्याय) -17
(22-July-2023)
परम सुख और स्थायी शान्ति का स्रोत्र कहाँ है?
श्रेणिक मगध राज्य के राजा घोषित

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प्रवचन(स्वाध्याय) -16
(21-July-2023)
विनती और स्तुति में अन्तर, हार्ट अटैक के कारण,
जीवन साथी के चयन से पहले क्या परीक्षा करें?

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प्रवचन(स्वाध्याय) -15
(20-July-2023)
आत्मा और शरीर में भेद, सिद्ध आत्माओं की उपासना
क्यों करें एवं श्रेणिक और नन्द श्री का विवाह

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प्रवचन(स्वाध्याय) -14
(19-July-2023)
सिद्ध आत्माओं का आकार, आसन सिद्धि का महत्व
एवं श्रेणिक की चतुराई की परीक्षा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -13
(18-July-2023)
आयु कर्म की व्यवस्था, सिद्ध भगवान का अव्याबाध गुण
एवं श्रेणिक के प्रश्नों का उत्तर

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प्रवचन(स्वाध्याय) -12
(17-July-2023)
सर्वप्रथम मोहनीय कर्म का घात क्यों करें? सिद्ध भगवान के
विशेष गुण एवं श्रेणिक के विचित्र प्रश्न

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प्रवचन(स्वाध्याय) -11
(15-July-2023)
अरिहन्त भगवान की विशेषताएँ, ध्यान का महत्व
एवं श्रेणिक का राज्य छोड़कर जाना

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प्रवचन(स्वाध्याय) -10
(14-July-2023)
अरिहन्त और सिद्ध भगवान का स्वरूप, जाप के प्रकार
एवं राजा उपश्रेणिक की चिन्ता

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प्रवचन(स्वाध्याय) -9
(13-July-2023)
केवलज्ञानी के ज्ञान का विस्तार,
आत्मा का अन्नत सुख एवं अवगाहन शक्ति,
राजा उपश्रेणिक द्वारा परीक्षा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -8
(12-July-2023)
आत्मशक्ति कैसे बढ़ती है?
वास्तव में शून्य का आविष्कारक कौन?
राजा उपश्रेणिक द्वारा अपने पुत्रों की परीक्षा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -7
(11-July-2023)
सम्यग्दर्शन कब और कैसे होता है?
आचार्य भगवन के प्रथम दर्शन से ही बढ़ गई आत्म विशुद्धि

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प्रवचन(स्वाध्याय) -6
(10-July-2023)
जैन दर्शन की मौलिक विशेषता, उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य
क्या है? एवं राजा उपश्रेणिक की कहानी

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प्रवचन(स्वाध्याय) -5
(9-July-2023)
गुरु संग मोक्ष का सफर
एवं गुरु उपकार की महिमा

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प्रवचन(स्वाध्याय) -4
(8-July-2023)
ज्ञाता-द्रष्टा स्वभाव क्या है? राग-द्वेष में कमी करने
और ज्ञाता-द्रष्टा बनने का अभ्यास कैसे करें?

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प्रवचन(स्वाध्याय) -3
(7-July-2023)
कर्मबंध और कर्मफल, निष्कर्म होने की भावना,
भोजन के समय क्षेत्र शुद्धि क्यों है आवश्यक?

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प्रवचन(स्वाध्याय) -2
(6-July-2023)
आत्मा अनादि और अनन्त कैसे है?
एवं योग्यता कैसे बढ़ती है?

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प्रवचन(स्वाध्याय) -1
(5-July-2023)
सिद्ध भक्ति क्यों और कैसे करें?
एवं उपादान की योग्यताएं

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प्रवचन -2
(4-July-2023)
वीर शासन जयन्ती विशेष

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प्रवचन
(3-July-2023)
गुरु पूर्णिमा विशेष

शान्त्याष्टकम्

(आचार्य  श्री  शान्तिसागर  जी  स्तुति  अष्टक)

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PDF


आचार्य श्री शान्तिसागर जी स्तुति शतक

सुयपंचमी थुदि
(श्रुत पंचमी स्तुति)

Shrut Panchami Stuti in Prakrit

सुयपंचमी थुदि

(श्रुत पंचमी स्तुति)

रचयिता- मुनि प्रणम्य सागर जी महाराज

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जयउ सुयदेवदा सुगुरुमुहणिग्गदा ।

जयउ सुयपंचमी णाण चिंतामणी ।।

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जो जिणणाणदिवायर पूयं

भत्तिवसेण करेदि विमाणी ।

सो खलु जेट्ठसिदस्स तिहीए

पंचमवासर-मिच्छदि णाणी ।।

जयउ सुयदेवदा……..णाण चिंतामणी ।

भूयबलिस्स ससंघसुमज्झे

आगमपूयण- मच्चणकज्जं ।

पव्वमहोच्छवमत्थ कुणंति

भव्वजणा सुयपंचमिणामा ।।

जयउ सुयदेवदा…………णाण चिंतामणी ।

पायदसद्दमयी जिणवाणी

आइरियाण जए हिययारी ।

सुत्तमयी परमागमभासा

लोयविलोयणलोयणयारी ।।

जयउ सुयदेवदा……णाण चिंतामणी ।

नीतिवाक्यामृत

आचार्य श्री सोमदेव सूरी जी महाराज विरचित

नीतिशास्त्र के प्रसिद्ध ग्रन्थ “नीतिवाक्यामृतम्” पर

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की

मंगल देशना

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प्रवचन (वाचना) –21
शहपुरा का स्मरणीय प्रवास
एवं श्रेष्ठ राजा का कार्य और विशेषताएं

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प्रवचन (वाचना) –20
पराक्रमी राजा का महत्व, पराक्रमी राजा कैसा होता है?
एवं सम्यग्दर्शन का तेज

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प्रवचन (वाचना) –19
राजा के गुण एवं कर्तव्य,
राजा का साहसी और पराक्रमी होना क्यों आवश्यक है?

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प्रवचन (वाचना) –18
व्रती को किस प्रकार दोष लग जाते हैं?
एवं राजा का कर्तव्य है- दयालु और कठोर होना

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प्रवचन (वाचना) –17
वास्तविक रूप में आस्तिक कौन और नास्तिक कौन?

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प्रवचन (वाचना) –16
शरीर और आत्मा का भेदविज्ञान, ब्रह्मचर्य का महत्व
एवं भोग से योग की ओर कैसे बढ़ें?

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प्रवचन (वाचना) –15
पूर्व जन्म के संस्कारों का प्रभाव, आत्मा पर तीन प्रकार के
संस्कार और उनका महत्व,
पूर्व संस्कारों को हटाकर नए संस्कार कैसे बनायें?

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प्रवचन (वाचना) –14
दोषों और बुरी आदतों को दूर करने का उपाय
आत्मनिन्दा कैसे करें?
कौन से कार्यों में उत्साह रखना चाहिए?

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प्रवचन (वाचना) –13
इच्छा-अभिलाषा और क्रिया, इच्छा और इच्छा शक्ति में अन्तर
दस प्रकार का मुंडन
एवं आहार देते समय क्या गलतियाँ न करें?

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प्रवचन (वाचना) –12
दुखी मन का धर्म फल पर प्रभाव, मन का परीक्षण,
सुन्दर मन किसका होता है?
विपरीत समय और आत्मबल

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प्रवचन (वाचना) –11
सहज दुख और अन्तरंग दुख में अन्तर
अन्तरंग दुख क्या है और ये क्यों होता है?

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प्रवचन (वाचना) –10
दुख के प्रकार (सहज दुख, दोषज दुख, आगन्तुक दुख)
एवं वात-पित्त-कफ की विषमता से होने वाले
रोग और उसका उपाय

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प्रवचन (वाचना) –9
दुख क्यों होता है? अपने सुख
और दूसरे के सुख का कैसे ध्यान रखें?

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प्रवचन (वाचना) –8
अनुपयोगी वस्तु को उपयोगी बनाने और गुणहीन में गुणों को
विकसित करने की कला एवं उसका सुख

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प्रवचन (वाचना) –7
सुख के कारण, अभ्यास द्वारा सुख कैसे प्राप्त करें
एवं यश-सम्मान कब मिलता है?

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प्रवचन (वाचना) –6
चित्त की एकाग्रता से प्राप्त होती है विशिष्ट क्षमता
एवं सांसरिक सुख के नियम

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प्रवचन (वाचना) –5
मन और इन्द्रियों का कार्य व महत्व

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प्रवचन (वाचना) –4
आत्मा के अस्तित्व को क्यों स्वीकार करें?

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प्रवचन (वाचना) –3
औपचारिक और अनौपचारिक सुख-दुख की पहचान कैसे करें?
एवं दुख कम करने का उपाय

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प्रवचन (वाचना) –2
वात-पित्त-कफ प्रकृति सन्तुलित करने का उपाय,
अध्यात्म का ज्ञान आवश्यक क्यों है?
एवं आत्मा का बगीचा क्या है?

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प्रवचन (वाचना) –1
अध्यात्म योग के लिए आत्मा, मन और प्राणवायु
का सन्तुलन आवश्यक एवं आत्मा-मन-शरीर के स्वास्थ्य को
प्राणवायु कैसे प्रभावित करती है?