अर्हं कीर्तन

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                 कीर्तन का संबंध अध्यात्म जगत से है। यह भी भक्ति का ही एक रूप है, जिसमें भक्त, अनेक तरह के वाद्य यंत्रों, ढोलक, मंजीरे, चिमटा, करताल, घंटा आदि का प्रयोग कर, बहुत ही उत्साह, उमंग में भरकर अपनी भक्ति को प्रकट करते हैं। प्राचीन समय से ही सामान्य जन कीर्तन के माध्यम से, अपने भक्ति भावों को व्यक्त करते रहे हैं।              

       अर्हं कीर्तन प्राचीन समय से प्रचलित, कीर्तन परम्परा से थोड़ा अलग हटकर, नए तरह का, आधुनिक कीर्तन है।  इसमें, बिना किसी वाद्य यंत्रों के ही, भक्ति का आनंद आ जाता है। अर्हं कीर्तन में भक्ति रस के साथ-साथ, शांत रस की लहरें व तरंगे भी हृदय में प्रवाहित  होने लगती हैं। इन दोनों रसों का संगम, उदास, दुखी, चिन्तित मन को भी उत्साह, उल्लास और प्रसन्नता से भर देता है। इस कीर्तन में भजन, मंत्र एवं करतल ध्वनि, तीनों का प्रयोग किया जाता है जिससे मन, मस्तिष्क और पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। करतल ध्वनि से हाथों का एक्यूप्रेशर होता है जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है। 

           अर्हं कीर्तन से मन में शांति और spritual healing का सुखद अनुभव होता है। इसके साथ ही, इस अर्हं कीर्तन को करना इतना सरल है कि किसी भी समय, जब मन करे इसको किया जा सकता है। सामूहिक रूप में भी, अकेले भी इसको  किया जा सकता है।  घर में भी किया जा सकता है और मंदिर में भगवान के समक्ष भी इसका आनन्द लिया जा सकता है।  अर्हं कीर्तन को श्रावकजन बहुत पसंद करते हैं। इसके द्वारा वे अपने समय का सदुपयोग करते हुए, भक्ति भावों में वृद्धि कर लेते हैं और पुण्य अर्जित करते हैं।     

        प्रस्तुत पेज पर आडियो और विडियो में पूज्य मुनि श्री की Healing जैसी अनुभति देने वाली आवाज के साथ, अर्हं कीर्तन को सुना जा सकता है और इसको कैसे करते हैं, यह भी जाना जा सकता है।

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