अकलंक शरणालय छात्रावास

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परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज अतिशय तीर्थ क्षेत्र

वहलना जी में अकलंक शरणालय के छात्रों को तत्वार्थ सूत्र

का अध्ययन कराते हुए

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                प्राचीन भारत में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली प्रचलित थी। इन गुरुकुल में छात्रों को केवल पुस्तक से संबंधित ज्ञान ही नहीं दिया जाता था, बल्कि उन्हें हर प्रकार से शिक्षा देकर सुयोग्य बनाया जाता था। सभी तरह की कलाओं में उन्हें प्रशिक्षित किया जाता था। उनके अंदर सुसंस्कार और सद् गुणों का विकास हो, शिक्षा पद्धति में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता था। समय के साथ-साथ  देश में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की यह व्यवस्था समाप्त होती चली गई। अंग्रेजों के शासन काल के प्रभाव से ऐसी आधुनिक शिक्षा प्रणाली हमारे देश में प्रचलित हो गई, जिसमें केवल पुस्तकीय ज्ञान और परीक्षा में अंक ही महत्वपूर्ण रह जाते हैं। जिसमें विद्यार्थी ना तो अपनी प्राचीन संस्कृति के गौरव का अनुभव कर पाते हैं और ना ही उनमें अच्छे संस्कार विकसित हो पाते हैं, केवल विदेशी संस्कृति को अनुसरण करने में ही वह गर्व महसूस करने लगते हैं।

                आज के समय में हमारे देश में गुरुकुल शिक्षा प्रणाली की उसी प्राचीन पद्धति की बहुत आवश्यकता है, जिसके द्वारा सुसंस्कारित नई पीढ़ी को विकसित किया जा सके, भविष्य में जिसके हाथों में ही देश और समाज की बागडोर होगी।

                इसी आवश्यकता और उद्देश्य को ध्यान में रखकर स्वकल्याण के साथ परकल्याण एवं जनकल्याण में प्रतिपल व्यस्त रहने वाले परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की पावन प्रेरणा और लोक मंगलकारी मार्गदर्शन से 2018 में हरियाणा राज्य के रेवाड़ी जिले में अंकलक शरणालय छात्रावास की स्थापना की गई। वर्तमान समय में इस छात्रावास में देश के विभिन्न स्थानों से आए हुए 18 छात्र शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

                यह छात्रावास गुरुकुल शिक्षा प्रणाली पर आधारित है। इसमें एक तरफ बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से आधुनिक शिक्षा दी जा रही है। दूसरी तरफ संस्कृत, प्राकृत जैसी प्राचीन भाषाओं का ज्ञान भी उनको प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे प्राचीन ग्रंथों, आगम को समझ सकें और अपने सांस्कृतिक मूल्यों व संस्कारों से परिचित हो सकें। 

                यही नहीं, जैन ग्रंथों पर आधारित धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी इस छात्रावास में छात्रों को दी जाती है, जिससे उनके अंदर नैतिक गुणों और अच्छे चरित्र का विकास हो सके। यहां सभी छात्रों में सद्संस्कारों के साथ, बहुमुखी प्रतिभा के विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। इसके अतिरिक्त छात्रावास में सात्विक भोजन भी छात्रों को उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनमें सात्विक भोजन करने की आदत बनी रहे और उनका स्वास्थ्य भी हर तरह से अनुकूल रहे।

                यह छात्रावास अभी प्रारंभिक अवस्था में है। इसका भवन निर्माण कार्य प्रगति पर है। भविष्य में इस छात्रावास को बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना है, जिससे ज्यादा से ज्यादा होनहार छात्रों को यहाँ आकर अध्ययन करने का अवसर प्राप्त हो सके। 

                वर्तमान समय में छात्रावास में रहकर अध्ययन कर रहे छात्र बहुत मेधावी और बुद्धिमान हैं। वे  सभी भगवान के अभिषेक, दर्शन पूजन विधि, गुरुजन के आहार चर्या, वैय्यावृति आदि सभी कार्यों में कुशल और निपुण हैं। कुछ छात्र तो तत्वार्थ सूत्र का पाठ भी याद कर चुके हैं।

                छात्रावास के व्यवस्थापक समय-समय पर छात्रों को पूज्य मुनि श्री के दर्शनार्थ लेकर आते रहते हैं, जिससे सभी छात्र पूज्य मुनि श्री का आशीर्वाद और भविष्य के लिए उपयोगी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकें। आधुनिक समय में बच्चों में संस्कार और नैतिक गुणों को विकसित करने के लक्ष्य के साथ यह अंकलंक शरणालय छात्रावास पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत है।