ऐतिहासिक धरा पर अध्यात्म का संगम

राजधानी दिल्ली के इतिहास में, लाल किला परिसर में प्रथम बार, दसलक्षण पर्व पर पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सनिध्य में ऐसा अभूतपूर्व, अदभुत, आध्यात्मिक शिविर लगा
जिसकी स्मृतियाँ इतिहास के पन्नों में सदा अंकित रहेंगी।

इस पावन अवसर पर दिल्ली की माननीय मुख्यमन्त्री रेखा गुप्ता जी, माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला जी, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष माननीय श्री विजेन्द्र गुप्ता जी एवं पूर्वी दिल्ली से माननीय सांसद श्री हर्ष मल्होत्रा जी एवं शासकीय क्षेत्र से अनेक माननीय विशिष्टजन भी उपस्थित हुए और उन्होंने पूज्य मुनि श्री के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही सभी क्षेत्रों से अनेक विशिष्टजन भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।

प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास में जैन समाज का तप, संयम, साधना का सबसे बड़ा पर्व आता है- जिसका नाम है दसलक्षण पर्व । इस पर्व के अवसर पर प्रत्येक वर्ष पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में दस दिवसीय अर्हं स्वधर्म शिविर का आयोजन होता है, जिसमें दूर-दूर से बड़ी संख्या में जैन श्रावक पहुँचते हैं और ज्ञान, ध्यान, संयम, तप रूपी सरोवर में डुबकी लगाकर अपनी साधना करते हैं।

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अर्हं स्वधर्म शिविर का शुभारम्भ 2020 में करोनाकाल के समय दसलक्षण पर्व के अवसर पर हुआ। जब सभी लोग भयभीत और आशंका से भरा हुआ जीवन जीने पर मजबूर थे, उस समय प्रथम बार अर्हं स्वधर्म शिविर का आयोजन हुआ। यह ऑनलाइन शिविर था। इस शिविर ने घरों में कैद श्रावकों के जीवन में नई ऊर्जा और शक्ति का संचार कर दिया। तभी से प्रतिवर्ष अर्हं स्वधर्म शिविर का आयोजन होता आ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रतिवर्ष यह शिविर सफलता की नई ऊँचाइयां प्राप्त करता जा रहा है और देश ही नहीं, विदेशों में बैठे श्रद्धालुओं को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज का वर्ष 2025 का मंगल चातुर्मास, देश की राजधानी दिल्ली के दिल कहे जाने वाले चाँदनी चौक के अतिशय क्षेत्र श्री दिगम्बर जैन लाल मन्दिर में चल रहा है। लाल मन्दिर के सामने ही विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल लाल किला स्थित है। वर्ष 2025 का अर्हं स्वधर्म शिविर इसी लाल किला के परिसर में आयोजित हुआ। यह प्रथम अवसर था, जब किसी ऐतिहासिक स्थल पर अर्हं स्वधर्म शिविर का आयोजन हुआ। ऐतिहासिक स्थल भी सामान्य नहीं अपितु वह लाल किला जो केवल प्राचीन दर्शनीय स्थल बनकर ही नहीं रह गया, बल्कि वर्तमान समय में भी यह लाल किलाअपना अलग ही महत्व रखता है। प्रतिवर्ष लाल किले की प्राचीर से ही देश के माननीय प्रधानमन्त्री जी राष्ट्र गौरव के प्रतीक राष्ट्र ध्वज को फहराते हैं और राष्ट्र के नाम अपना सम्बोधन देते हैं। देश के स्वतंत्रता दिवस समारोह (15 अगस्त) से जुड़े होने के कारण, इस ऐतिहासिक लाल किला की छवि भी देशवासियों के मानस पटल पर सदा अंकित रहती है।

ऐसे प्राचीन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण लाल किला के परिसर में, पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में अद्भुत, आध्यात्मिक संगम का आगाज हुआ। दसलक्षण धर्म की गूंज लाल किला परिसर से देश विदेश तक गूँजी। लाल किला मैदान में प्रथम बार, इस प्रकार का कोई आध्यात्मिक शिविर सम्पन्न हुआ और वह भी दो या तीन नहीं बल्कि दस दिन के लिए।

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प्रतिवर्ष स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर हम गौरव का अनुभव करते हैं कि हम एक स्वतन्त्र राष्ट्र में रह रहे हैं और गुलामी के बन्धनों से मुक्त हो चुके हैं, पर जब हम आध्यात्मिक दृष्टि से इस संसार की ओर देखते हैं तो पाते हैं, किस प्रकार मनुष्य स्वयं के क्रोध, मान, माया, लोभ, झूठ, असंयम, निरर्थक परिग्रह के बन्धनों में जकड़ा हुआ है। मनुष्य की पूर्ण स्वतन्त्रता तभी है, जब वह स्वयं की इन बुराइयों से भी स्वतंत्र होकर स्थायी अनन्त सुख को प्राप्त कर सके। जैसे राष्ट्रों की स्वतन्त्रता विश्व शान्ति के लिये आवश्यक है वैसे ही मनुष्य की स्वयं की बुराइयों से स्वतन्त्रता भी विश्व शान्ति के लिए आवश्यक है।
स्वयं को स्वयं की ही बुराइयों और दोषों से कैसे स्वतंत्र करें ? इसी का अभ्यास पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में 10 दिन तक लाल किला परिसर में हुआ।

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ज्ञान, ध्यान, योग, भक्ति, संगीत, अभिषेक, शान्तिधारा, जिनपूजा, अर्चना, आरती, स्वाध्याय, पाठ, प्रवचन, तप, त्याग, दान, साधना के अनुपम संगम से लाल किले की ऐतिहासिक धरा भी पवित्र आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गई।
योग एवं ध्यान की शान्ति से शुरू हुआ प्रत्येक दिन, शाम को भक्ति आरती के आनन्द और ऊर्जा के साथ पूर्ण हुआ। शिविरार्थियों के लिए विभिन्न मंच बनाकर बहुत सुन्दर व्यवस्था की गई जिससे सभी बिना किसी परेशानी के ज्ञान- ध्यान- पूजा- भक्ति- स्वाध्याय कर सकें। 2000 से भी अधिक शिविरार्थियों ने इस शिविर में भाग लेकर अपने को धन्य किया।

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दस दिवस तक चला यह आध्यात्मिक शिविर उत्साह, उमंग, हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। ज्ञान- ध्यान- भक्ति के रंगों से सजे, इस आयोजन की स्मृतियाँ सदा ही जनमानस के स्मृति पटल पर बनी रहेंगी और उनको नई ऊर्जा और आनन्द से भरती रहेंगी।




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One Comment

  1. शिविर की स्मृतियों का यह पेज सच में दिल को छू लेने वाला है।
    इस पेज पर तस्वीरें और वीडियो बहुत ही सुंदर तरीके से लगाए गए हैं। देखने में बहुत सुकून मिलता है।🙏

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