प्रवचनसार #1,2 | मंगलाचरण | Manglacharan | Pravachansaar | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #003,004,005 | मंगलाचरण | Manglacharan | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #006 | मोक्ष प्राप्ति के उपाय: सराग व वीतराग चरित्र | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #007 | धर्म का स्वरूप | Dharm Ka Swaroop | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #008,009 | धर्मात्मा का अर्थ, आत्मा के उपयोग | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #010,011 | पदार्थ का स्वरूप, शुद्धोपयोग का फल | Padarth Ka Swaroop, Shuddhupyog Ka Fal
प्रवचनसार #012,013 | अशुभोपयोग का फल, निर्वाण सुख का स्वरूप |Ashubh Upyog Ka Fal Aur Nirvaan Ka Sukh
प्रवचनसार #014,015 | शुद्धोपयोग से परिणत आत्मा का स्वरूप | Shuddhopyog Se Parinat Aatma Ka Swaroop
प्रवचनसार #016,017 | पदार्थ का स्वरूप, शुद्धोपयोग का फल | Padarth Ka Swaroop, Shuddhopyog Ka Fal
प्रवचनसार #018 | पदार्थ की पर्याय का उत्पाद और व्यय | Padarth Ki Paryay | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #019,020,021 | अरिहंत भगवान का स्वरूप | Arihant Bhagwan Ka Swaroop |मुनि श्री प्रणम्य सागर
प्रवचनसार #022,023 | केवल ज्ञान का स्वरूप | Kewal Gyan Ka Swaroop | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी
प्रवचनसार #024,025,026 | आत्मा, ज्ञान, ज्ञेय का सम्बंध | Aatma, Gyan, Gyey Ka Sambandh
प्रवचनसार #027,028 | आत्मा और ज्ञान के एकत्व-अन्यत्व | Pravachansaar | Muni shri Pranamya Sagar ji
प्रवचनसार #029,030 | ज्ञेय और ज्ञायक संबंध | Gyey Aur Gyayak Sambandh | मुनि श्री प्रणम्य सागर जी