
मई माह से ही जैन श्रावकों में यह जिज्ञासा उत्पन्न होने लगती है कि उनके गुरुजन का आगामी चातुर्मास, इस बार कहां पर होगा। चातुर्मास नगर के बारे में पता चल जाता है तो ये उत्सुकता बनी रहती है कि मंगल प्रवेश कब होगा और मंगल प्रवेश के बाद उन्हें प्रतीक्षा रहती है कि चातुर्मास कलश स्थापना समारोह कब होगा। गुरुजन के चातुर्मास कलश स्थापना समारोह को सभी श्रद्धालु बहुत ही धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाते हैं।



परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के रूप में ज्ञान और ध्यान की अविरल धारा मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरों को लाभान्वित करती हुई, जब राजस्थान की धरा पर पहुंची तो राजस्थान के जैन श्रावकों मे हर्ष की लहर दौड़ गई। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ के पावन वर्षायोग 2024 का सौभाग्य राजस्थान की राजधानी जयपुर को प्राप्त हुआ। जयपुर जिसे गुलाबी नगरी के नाम से भी जाना जाता है, जैन समाज की धर्म नगरी भी है और इसे जिनालयों की नगरी भी कह दें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि 350 से भी ज्यादा जिनालय इस नगर में सुशोभित हैं और वर्तमान समय में तो ये चातुर्मासों की नगरी बनी हुई है क्योंकि 1 या 2 नही बल्कि 9 चातुर्मास इस नगरी में चल रहे हैं।
ऐसी पुण्यशाली जयपुर नगरी के सौभाग्य में और अधिक वृद्धि हो गई, जब इसके मानसरोवर क्षेत्र को पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के पावन वर्षायोग का शुभ अवसर प्राप्त हो गया।



28 जुलाई को मानसरोवर के मीरा मार्ग स्थित आदिनाथ भवन में मंगल चातुर्मास कलश स्थापना का कार्यक्रम आयोजित हुआ। नीले और सफेद रंग की थीम पर बना पंडाल और मंच आकर्षक लग रहे थे और विभिन्न रंगों के परिधानों में बैठे भक्तों के समूहों को देखकर, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे इन्द्रधनुष के सभी रंगों की छटा ही आज यहाँ छा बिखर रही हो। मंच पर ऊपर की तरफ कुण्डलपुर के बड़े बाबा और दो दिशाओं में आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के छायाचित्र देखकर ऐसा अनुभव हो रहा था जैसे कि तीनों का ही आशीर्वाद यहाँ बरस रहा है।

28 जुलाई को मानसरोवर के मीरा मार्ग स्थिति आदिनाथ भवन में मंगल चातुर्मास कलश स्थापना का कार्यक्रम आयोजित हुआ। नीले और सफेद रंग की थीम पर बना पंडाल और मंच आकर्षक लग रहे थे और विभिन्न रंगों के परिधानों में बैठे भक्तों के समूहों को देखकर, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे इन्द्रधनुष के सभी रंगों की छटा ही आज यहाँ छा बिखर रही हो। मंच पर ऊपर की तरफ कुण्डलपुर के बड़े बाबा और दो दिशाओं में आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज और आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के छायाचित्र देखकर ऐसा अनुभव हो रहा था जैसे कि तीनों का ही आशीर्वाद यहाँ बरस रहा है।



समारोह में बाहर से पधारे भक्तों में गजब का उत्साह था। जयपुर चातुर्मास के बाद, अपने नगर में पधारने के लिए पूज्य मुनि श्री से निवेदन करने की जैसे उनमें होड़ ही लगी थी। एक तरफ रोहतक, सिंगोली, उदयपुर, रुड़की के भक्त और श्रावक पंचकल्याणक के लिए निवेदन कर रहे थे तो दूसरी तरफ किशनगढ़ से आए श्रावकों ने अपने नगर में अगले चातुर्मास के लिए, अभी से ही निवेदन कर दिया था। रेवाड़ी के भक्त भी पूज्य मुनि श्री से अपने नगर में आगमन के लिए आग्रह करते नजर आ रहे थे।
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का शुभारम्भ आदिनाथ महिला मण्डल की सुन्दर प्रस्तुति से हुआ। उसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन, ध्वजारोहण, शास्त्र दान आदि शुभ क्रियाएं सम्पन्न हुईं। ध्वजारोहण और पाद प्रक्षालन का परम सौभाग्य जैन समाज के भामाशाह, श्रावक श्रेष्ठी श्री अशोक पाटनी जी आर के मार्बल परिवार किशनगढ़ को प्राप्त हुआ। इसके पश्चात अनेक स्थानों से आए भक्तों और श्रद्धालुओं ने बहुत ही भक्ति, उल्लास और उमंग के साथ पूज्य मुनि श्री के चरणों में अष्ट द्रव्य समर्पित किए।



तत्पश्चात अर्हं टीम, प्राकृत टीम और अकलंक शरणालय टीम ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों और आगामी शिविरों से जन समुदाय को परिचित कराया। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री द्वारा रचित विधान और अनेक कृतियों का विमोचन भी हुआ। प्रथम कलश अर्हं कलश स्थापित करने का सौभाग्य समाज श्रेष्ठी श्री डी सी जैन जी परिवार और श्री सुशील पहाड़िया जी परिवार को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्री शुभम जैन जी ने किया।
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कलश स्थापना के बाद पूज्य मुनि श्री के वचन श्रवण करने के लिए लालायित हो रहे जन समुदाय की प्रतीक्षा समाप्त हुई। पूज्य मुनि श्री ने अपने उद्बोधन में अपने गुरु महाराज को याद करते हुए कहा कि गुरु के द्वारा दिए गए संस्कार, निर्देशों और अनुशासन का पालन करते हुए ऐसा लगता है कि गुरु का आशीर्वाद आज भी बरस रहा है। गुरु हमसे दूर चले गए हैं पर उनके वचन आज भी हमारे पास हैं, उनके वचन कानों में गूंजते हैं और उनके वचनों के अनुसार जब कोई कार्य करता हूं तो बहुत प्रसन्नता का अनुभव करता हूं। मुनि श्री ने युवाओं को जीवन में कभी भी निराश न होने, उत्साह को बनाए रखने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी दी। इस प्रकार यह मंगल कार्यक्रम आनन्द और हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।



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