वर्धमान स्तोत्र

स्तोत्र पढ़कर जब भक्ति की जाती है तो उसका अलग ही आनंद होता है। जब हमें उस स्तोत्र का अर्थ पता होता है तो भक्ति में हमारे भाव ज्यादा लगते हैं और जब उस स्तोत्र के श्लोकों,पदों पर हमने गुरु के प्रवचन भी सुने हों तो हमारे भाव और ज्यादा उस स्तोत्र में लगने लगते हैं और यदि वे प्रवचन हम उन गुरु के मुख से सुन रहे हैं जो उसके रचयिता भी हैं, तो ऐसा संयोग तो बहुत पुण्य से ही मिल पाता है। “वर्धमान स्तोत्र” के रचयिता परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के श्री मुख से वर्धमान स्त्रोत के ही ऊपर प्रवचन सुनकर श्रोताजन भक्ति की ऐसी गंगा में सराबोर हो जाते हैं जिसका अनुभव ही निराला होता है। ऐसा ही पुण्य अवसर आप इस playlist के video देखकर पा सकते हैं।

Posted in Pravachan.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.