नहीं रखो नाराज़गी होगी तेरी जीत,
क्षमा करो आगे बढ़ो भूलो बुरा अतीत।
नहीं रखो अपराध का बोध हीनता भाव,
क्षमा करो आगे बढ़ो भाओ सत्य स्वभाव।
निन्दा की आदत तजो , निज पर रख विश्वास,
क्षमा करो आगे बढ़ो, आकर्षण की श्वास।
निज मन को तन से लगा, निज चेतन से नेह,
क्षमा करो आगे बढ़ो, मुक्ति मुक्त करेह।
खुद से ही तू प्रेम कर, निज में नित तू झाँक,
क्षमा करो आगे बढ़ो मत निज को कम आँक।
जिसने जो कुछ कर दिया, बुरा तुम्हारे साथ,
क्षमा करो आगे बढ़ो रखो भलाई साथ।
