Functions & News (2023)

YEAR 2023

10-Dec-2023

बाँदा (उत्तर प्रदेश) में मंगल प्रवेश


28-Nov-2023

सतना (मध्य प्रदेश) से मंगल विहार


27-Nov-2023

महामह नंदीश्वर विधान (20-27 नवम्बर)

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26-Nov-2023

पिच्छिका परिवर्तन समारोह

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3-Nov-2023

माननीय मुख्यमंत्री जी ने लिया पूज्य मुनि श्री का मंगल आशीर्वाद

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1-Nov-2023

प्राकृत प्रशिक्षण शिविर का आयोजन (30 Oct- 1 Nov)

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प्राकृत पाठशाला रेवाड़ी द्वारा, सतना मध्य प्रदेश में 30 अक्टूबर से 1 नवम्बर 2023 तक, वार्षिक  प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। इसमें पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा, अष्टपाहुड की 50 गाथाओं का स्वाध्याय कराया गया और परीक्षा भी ली गई।  शिविर के समापन समारोह में प्रस्तुत प्राकृत नाटिका ने सबका मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में प्राकृत टीम ने अपनी भावी योजनाओं और उपलब्धियों से सभी को अवगत कराया। इसके साथ ही प्राकृत शिक्षिकाओं, विभिन्न परीक्षाओं में उच्चतम अंक प्राप्त परीक्षार्थियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम के अन्त में, पूज्य मुनि श्री द्वारा प्राकृत टीम को मंगल आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।


2-Oct-2023

राष्ट्रीय विद्वत संवाद (सतना) (1-2 Oct)

मध्य प्रदेश के सतना जिले में पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में राष्ट्रीय विद्वत संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संवाद का विषय था …“भारतीय ज्ञान परम्परा एवं श्रमण संस्कृति : एक अनुशीलन (आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के चिन्तन की परिधि में)” । कार्यक्रम में अनेक क्षेत्रों से आए विद्वानों द्वारा, इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए गए और चिन्तन, मनन किया गया। यह संवाद कार्यक्रम 1 से 2 अक्टूबर तक 2 दिन के लिए चला। इसके साथ ही, इस विषय पर पूज्य मुनि श्री का सम्बोधन और मार्गदर्शन भी सभी को प्राप्त हुआ। सतना समाज द्वारा सभी अतिथियों का उत्साह के साथ स्वागत और सम्मान किया गया। श्रोताओं को भी विविध विचारों को श्रवण करने का लाभ और ज्ञान की प्राप्ति, इस संवाद के माध्यम से हुई।

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Sep-2023

अर्हं स्वधर्म शिविर (2023) सतना, (19-28 Sep)

दसलक्षण पर्व  के अवसर पर, प्रतिवर्ष पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में अर्हं स्वधर्म  शिविर का आयोजन होता है। इस वर्ष (2023) का अर्हं स्वधर्म शिविर सतना नगर में आयोजित हुआ। ध्यान और योग, पूजा और भक्ति, सामायिक और प्रतिक्रमण, गुरु देशना और स्वाध्याय, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर, इस शिविर में अनेक राज्यों और दूर क्षेत्रों से आए श्रावकों ने भाग लिया। सभी शिविरार्थियों ने संयम साधना के साथ, दस धर्मों को अपने जीवन में उतारने का अभ्यास किया और अपने मनुष्य जन्म के अमूल्य समय का सदुपयोग किया।

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10-July-2023

भव्य चातुर्मास कलश स्थापना समारोह

सतना, मध्य प्रदेश में पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास कलश स्थापना समारोह बहुत ही हर्षोल्लास और आनन्द के साथ सम्पन्न हुआ। दिल्ली, आगरा, मुजफ्फरनगर, जबलपुर, सिरसागंज, शहपुरा भिटौनी आदि दूर-दूर स्थानों से बड़ी संख्या में गुरुभक्त समारोह में पहुंचे और कलशों की स्थापना व गुरुदर्शन करके अपने को धन्य किया।

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1-July-2023

सतना (मध्य प्रदेश) में हुआ चातुर्मास हेतु भव्य मंगल प्रवेश

चातुर्मास के लिए गुरुजन के भव्य मंगल प्रवेश का दिन, सम्पूर्ण वर्षायोग की अवधि का वह शुभ दिन होता है, जिसमें भक्तों व श्रावकों का हर्षोल्लास और उत्साह चरम पर होता है। यह शुभ दिन सतना नगर में भी आया, जब शहपुरा भिटौनी से मंगल विहार करते हुए 27 दिन बाद पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश, यहां हुआ। मंगल प्रवेश की अवधि में इन्द्रदेव भी वर्षा की रिमझिम फुहारों से पूज्य मुनि श्री संघ का स्वागत करते रहे तो प्रवेश हो जाने के बाद उन्होंने खूब वर्षा करके अपनी प्रसन्नता को भी व्यक्त कर दिया। इस मौसम में सतना के भक्तों की टोली रंग बिरंगी पोशाकों और वेशभूषा में ऐसी लग रही थी जैसे मुनि संघ के स्वागत में इन्द्रधनुष भी सतना की सड़कों पर उतर आया हो। ढोल, नगाड़े, मंगल कलशों, ध्वजाओं एवं जयकारों से वातावरण मनोरम और अलौकिक हो गया था। भव्य मंगल प्रवेश के बाद सतना के जिनालय में पूज्य मुनि श्री ने अतिशयकारी जिन प्रतिमाओं के दर्शन किए और अपने मंगल उद्‌बोधन से भक्तों को लाभान्वित किया।

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19-Jun-2023

कुण्डलपुर सिद्ध क्षेत्र पर पूज्य मुनि श्री की मंगल आगवानी

शहपुरा भिटौनी से विहार करने के बाद, आज पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज संसघ श्री कुन्डलपुर सिद्ध क्षेत्र बड़े बाबा के दरबार में पहुँचे और बड़े बाबा के दर्शन, वन्दना करके उनके चरणों में अपने भक्ति भावों को समर्पित किया। कुण्डलपुर के बड़े बाबा, जिनके एक बार दर्शन कर लो तो बार-बार दर्शन करने का मन करता है, जिनके दर्शन करते हुए नजरें एक पल के लिए भी इधर-उधर नहीं हटती, जिनको देखकर ऐसा लगता है जैसे साक्षात आदिनाथ भगवान ही यहाँ विराजमान हैं, ऐसे अतिशयकारी, मनोहारी बड़े बाबा के दर्शन कर पूज्य मुनि श्री संघ भी प्रफुल्लित हो गया। पूज्य मुनि श्री को इससे पूर्व जनवरी-फरवरी 2022  में भी बड़े बाबा के दर्शन-वन्दन करने का अवसर प्राप्त हुआ था। 1 मार्च 2022 को यहाँ से विहार के बाद, आज 19 जून 2023 को (लगभग 1 वर्ष 4 माह बाद) पुनः कुण्डलपुर सिद्ध क्षेत्र की पावन धरा पर पूज्य मुनि श्री की मंगल आगवानी हुई। दोपहर के बाद पूज्य मुनि श्री ने कुण्डलपुर से चातुर्मास स्थल के लिए विहार किया।

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4-Jun-2023

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज (ससंघ) का हुआ मंगल विहार

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज (ससंघ) का शहपुरा भिटौनी से मंगल विहार हुआ। 26 फरवरी 2023 से पूज्य मुनि श्री का यहाँ मंगल प्रवास चल रहा था। इस प्रकार 3 माह 9 दिन (99 दिवस) के लिए, पूज्य मुनि श्री के दीर्घकालीन प्रवास का सौभाग्य और चातुर्मास जैसा ही आनन्द, शहपुरा भिटौनी समाज को प्राप्त हुआ। चातुर्मास की अवधि की तरह ही, अनेक प्रकार के विधान, ज्ञान, ध्यान, योग, आदि के कार्यक्रम यहाँ आयोजित हुए। अष्टानिका पर्व से लेकर ऋषभदेव जन्म महोत्सव, भगवान महावीर जन्म महोत्सव, अक्षय तृतीया, श्रुत पंचमी पर्व भी, पूज्य मुनि श्री के पावन सानिध्य में मनाने का मंगल अवसर, इस समाज को प्राप्त हुआ। चातुर्मास में तो समाज को किसी एक संघ का ही सानिध्य प्राप्त होता है लेकिन यहाँ इस अवधि में, अनेक आर्यिका संघ का भी मंगल आगमन हुआ और समवशरण जैसे दृश्य के साथ अनेक भव्य आयोजन सम्पन्न हुए।

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31-May-2023

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने किया केशलोंच

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की ग्रीष्म कालीन वाचना शहपुरा भिटौनी में  चल रही है। आज पूज्य मुनि श्री ने दूसरी बार यहां केशलोंच किया। इससे पूर्व मार्च में भी, शहपुरा में ही पूज्य मुनि श्री का केशलोंच संपन्न हुआ था। केशलोंच ऐसा कठिन तप है जिसे देखकर, देखने वालों की आंखों में अश्रु तक आ जाते हैं और केशलोंच करने वाले जैन साधु ऐसे महान तपस्वी होते हैं कि वो बहुत ही शान्त भाव से इस साधना को कर लेते हैं।

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केशलोंच करें, सभी पीड़ा परिषह सहें,

उपवास करें उस दिन और मन से प्रसन्न रहें।

ऐसी कठिन साधना देख, मन में आती यही सोच,

दुनिया का सबसे कठिन तप है, जैन साधु का केशलोंच।

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24-May-2023

श्रुत पंचमी पर्व समारोह

अक्षय तृतीया के बाद, श्रुत पंचमी पर्व भी पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित करने का सौभाग्य, शहपुरा समाज को प्राप्त हुआ। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की लेखनी से प्राकृत भाषा में सृजित, नई रचनासुयपंचमी थुदि (श्रुत पंचमी स्तुति ) एवं श्रुत पंचमी पूजा को भी इस अवसर पर लॉन्च किया गया। श्रुत पंचमी पर्व पर, यह दोनों प्राकृत रचनाएं श्रावकों के लिए एक उपहार जैसी रहीं। इसके साथ ही, पूज्य मुनि श्री के भजनों पर आधारित अन्तर्गूंज कृति के नये संस्करण का विमोचन भी इस अवसर पर हुआ। अन्त में, पूज्य मुनिद्वय के श्रीमुख से आशीर्वचन के साथ ही यह उत्सव हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न  हुआ।

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14-May-2023

शहपुरा भिटौनी में कल्याण मन्दिर विधान का हुआ आयोजन

शहपुरा भिटौनी के पंचायती जैन मन्दिर में विराजित पार्श्वनाथ भगवान की श्वेत पाषाण से निर्मित प्रतिमा के दर्शन कर भक्तों का हृदय अद्भुत शान्ति और आनन्द से भर जाता है । ऐसे मनोहारी पार्श्वनाथ भगवान के समक्ष, पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में शहपुरा भिटौनी में कल्याण मन्दिर विधान का आयोजन किया गया। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी  ने  कल्याण मन्दिर स्तोत्र का हिन्दी में बहुत ही अनुपम पद्यानुवाद किया है। कल्याण मन्दिर स्तोत्र और भक्ति भावों से भर देने वाले, इस पद्यानुवाद के साथ विधान कर भक्तजन पार्श्वनाथ भगवान की भक्ति में झूम उठे।

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17-Apr-2023

अन्तर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी  का आयोजन

शहपुरा भिटौनी में परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज संसघ के सानिध्य में, 15 एवं 16 अप्रैल 2023 को दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय विद्वत संगोष्ठी  का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में अनासक्त महायोगी, महाकवि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के द्वारा संस्कृत साहित्य में रचित षट्शती (संस्कृत में रचित 6 शतक —1.श्रमण शतक  2.निरंजन शतक  3.भावना शतक 4.परिषह जय शतक  5.सुनीति शतक   6.चैतन्य चन्द्रोदय शतक ) के ऊपर दूर दूर से आये विद्वानों द्वारा चिन्तन, मनन किया गया और अपने विचार व्यक्त किए किए गए। इस संगोष्ठी के आयोजन में श्री स्याद्वाद महाविद्यालय, भदैनी वाराणसी, ( उ०प्र०) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।


3-Apr-2023

शहपुरा भिटौनी में भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव

शहपुरा भिटौनी में पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और आर्यिका रत्न श्री दुर्लभमति माता जी  संसघ  के सानिध्य में भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव  बहुत ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस बार का यह महोत्सव शहपुरा समाज के लिए ऐतिहासिक रहा,  एक तरफ द्वय मुनिराज, 23 आर्यिका माता जी, त्रय क्षुल्लक महाराज  के रूप में विशाल संघ का सानिध्य समाज को मिला, तो दूसरी तरफ शोभा यात्रा में, इस बार संयम स्वर्ण रथ पर महावीर प्रभु  को विराजमान करके जिन धर्म प्रभावना करने का मंगल अवसर भी समाज को प्राप्त हुआ।


2-Apr-2023

वर्धमान स्तोत्र विधान का आयोजन

शहपुरा भिटौनी में वर्तमान शासन नायक वर्धमान महावीर भगवान के जन्म कल्याणक महोत्सव के अवसर पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ और आर्यिका रत्न दुर्लभमति माताजी ससंघ के सानिध्य में शताधिक मंडलीय वर्धमान स्तोत्र विधान का आयोजन हुआ। परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा वर्धमान महावीर भगवान की स्तुति में  रचित, अनुपम स्तोत्र- वर्धमान स्तोत्र का पाठ व विधान, महावीर त्रयोदशी (जन्म कल्याणक महोत्सव) के अवसर पर,  देश के कोने कोने में ही नहीं अपितु विदेशों तक में भी होता है। शहपुरा भिटौनी समाज का यह परम सौभाग्य रहा कि उन्हें इस स्त्रोत के रचयिता के सानिध्य में ही इस बार यह वर्धमान स्तोत्र विधान करने का पावन अवसर प्राप्त हुआ।

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22-Mar-2023

युगदृष्टा श्री ऋषभदेव कथा का आयोजन (16-21 मार्च)

शहपुरा भिटौनी में देवाधिदेव प्रथम तीर्थंकर 1008 श्री ऋषभनाथ भगवान के जन्म महोत्सव के अवसर पर युगदृष्टा श्री ऋषभदेव कथा का आयोजन हुआ । छह दिन तक भक्तों को पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी के श्री मुख से संगीतमय कथा को श्रवण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। पुण्य संयोग से, इस अवसर पर आर्यिका रत्न श्री सूत्रमति माताजी ससंघ और आर्यिका रत्न श्री दुर्लभमति माताजी ससंघ का सानिध्य भी शहपुरा समाज को प्राप्त  हुआ। आयोजन में मुनि महाराज संघ, आर्यिका संघ, क्षुल्लक महाराज संघ का सानिध्य एवं श्रावक -श्राविकाओं की उपस्थिति से, ऐसा दृश्य प्रतीत हो रहा था जैसे भगवान का समवशरण ही यहाँ लगा हो और उसी समवशरण में बैठकर, सभी भगवान ऋषभदेव की कथा को श्रवण कर रहे हो।

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21-Mar-2023

पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज ने किया केशलोंच

शहपुरा भिटौनी में आज परम पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज ने केशलोंच  किया। इसे दुर्लभ पुण्य संयोग ही कहा जाएगा कि  एक सप्ताह की लघु अवधि में ही, दोनों  मुनिराज के केशलोंच और तीनों नव दीक्षित क्षुल्लक महाराज जी के प्रथम केशलोंच का साक्षी बनने का सौभाग्य शहपुरा भिटौनी के श्रावकों को प्राप्त हुआ ।


20-Mar-2023

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने किया केशलोंच

आज पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने केशलोंच किया।  किस तरह  जैन मुनि अपने हाथों से अपने केशों को उखाड़ फेंकते हैं और उनके मुख पर प्रसन्नता के भाव बने रहते हैं, यह देखकर सभी का मन श्रद्धा से भर जाता है। पूज्य मुनि श्री के साथ ही, संघस्थ नवदीक्षित क्षुल्लक श्री समन्वय सागर जी महाराज ने भी आज अपने जीवन का पहला केशलोंच किया और मोक्ष मार्ग की इस कठिन परीक्षा को उर्त्तीण कर अपना मोक्ष मार्ग प्रशस्त किया।

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केशलोंच मोक्ष मार्ग की है कठिन परीक्षा,

इसके बिना सम्भव नहीं होती मुनि दीक्षा।

केशलोंच जैन मुनि करते होकर हर्षित,

दुनिया देखती केशलोंच होकर आश्चर्यचकित।

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18-Mar-2023

आर्यिका संघ ने की मुनिद्वय चरण वन्दना

आज आर्यिका रत्न श्री दुर्लभमति माताजी ससंघ (13 आर्यिका माता जी) का मंगल प्रवेश शहपुरा भिटौनी में हुआ। आर्यिका संघ ने  श्री पंचायती जैन मंदिर पहुंचकर, पूर्व विराजमान पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज की चरण वन्दना का सौभाग्य प्राप्त किया ।

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15-Mar-2023

नव दीक्षित क्षुल्लक जी महाराज का प्रथम केशलोंच

आज पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के संघस्थ नव दीक्षित क्षुल्लक श्री अनुनय सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री सविनय सागर जी महाराज ने अपने जीवन का प्रथम केशलोंच किया। केशलोंच मोक्षमार्ग की कठिन परीक्षा होती है और प्रथम बार केशलोंच करना तो और भी ज्यादा कठिन होता है। आज दोनों ही क्षुल्लक जी महाराज ने सहजता से इस कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण कर मोक्ष मार्ग पर अपने कदमों को आगे बढ़ाया। आज 15 मार्च 2023 को आर्यिका श्री सूत्रमति माताजी ससंघ की मंगल आगवानी भी शहपुरा भिटौनी में हुई और आर्यिका संघ को पूज्य मुनिद्वय की चरण वन्दना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

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14-Mar-2023

नीतिवाक्यामृत ग्रंथ पर मंगल देशना

परम परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ससंघ पंचायती जैन मन्दिर, शहपुरा भिटौनी (जिला जबलपुर) में विराजमान हैं। आचार्य श्री सोमदेव सूरी द्वारा रचित नीतिवाक्यामृत ग्रंथ पर पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल देशना श्रवण करने का सुअवसर यहां श्रावकों को प्राप्त हो रहा है। इस मंगल देशना में जीवन से सम्बधित उपयोगी नया ज्ञान श्रावकों को मिल रहा है। 

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7-Mar-2023

श्री महामह नन्द्वीश्वर विधान, शहपुरा भिटौनी (27 फरवरी -7 मार्च 2023)

परम परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज (संसघ ) के सानिध्य में शहपुरा भिटौनी, जबलपुर में श्री महामह नन्द्वीश्वर विधान का आयोजन हुआ। 27 फरवरी 2023 से प्रारम्भ हुए इस विधान का समापन 7 मार्च 2023 को भक्ति के रंगों की होली के साथ सम्पन्न हुआ। अलग ही विशेषताओं से परिपूर्ण इस अनूठे महामह नंदीश्वर विधान को जो भी एक बार कर लेता है, वह भक्ति के अद्‌भुत आनन्द का अनुभव करता है और जब इस विधान के रचियता के मंगल सानिध्य में ही यह विधान करने का लाभ प्राप्त हो जाये तो उस परम सौभाग्य का, तो कहना ही क्या। इस तरह का महासौभाग्य मार्च 2023 में शहपुरा भिटौनी नगर को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व सर्वप्रथम मार्च 2019 में दिल्ली के उस्मानपुर क्षेत्र, तत्पश्चात 2020 में हस्तिनापुर और मुजफ्फरनगर, 2021 में रोहिणी (दिल्ली) और आगरा एवं 2022 में नोहटा, जबलपुर और पनागर समाज को भी यह परम सौभाग्य प्राप्त हुआ।


विधान से पूर्व पूज्य मुनि श्री की मंगल देशना एवं मार्गदर्शन


1-Mar-2023

नव दीक्षित क्षुल्लक महाराज पहुंचे शहपुरा भिटौनी

अतिशय क्षेत्र अंतरिक्ष पारसनाथ शिरपुर से लगभग 700 किलोमीटर का लम्बा विहार करके 6 नव दीक्षित क्षुल्लक महाराज आज शहपुरा भिटौनी पहुंचे और पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज की चरण वन्दना की । इन सभी नव दीक्षित क्षुल्लक महाराज को 21 दिसम्बर 2022 में, अतिशय क्षेत्र अंतरिक्ष पारसनाथ की पावन धरा पर, संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज द्वारा क्षुल्लक दीक्षा प्रदान की गई थी। क्षुल्लक श्री अनुनय सागर जी महाराज, क्षुल्लक श्री सविनय सागर जी महाराज और क्षुल्लक श्री समन्वय सागर जी महाराज, पहले से ही पूज्य मुनि श्री के संघ में ब्रह्मचारी अवस्था में साधनारत थे। पूज्य मुनिद्वय का आर्शीवाद लेकर तीनों ने दिसम्बर में शिरपुर के लिये प्रस्थान किया और आचार्य भगवन से क्षुल्लक दीक्षा का उपहार प्राप्त कर, आज शहपुरा में क्षुल्लक रूप में पुनः मुनि संघ में शामिल हुए।

इस मंगल अवसर पर नव दीक्षित क्षुल्लक महाराज के हृदय के उद्गार एवं पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के आशीर्वचन

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26-Feb-2023

शहपुरा भिटौनी में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज का कछार गांव से सिलौंड़ी-सिहोरा-मंझोली-कटंगी होते हुए शहपुरा भिटौनी जिला जबलपुर में आज भव्य मंगल प्रवेश हुआ। यहाँ श्रावक कर रहे थे, पूज्य मुनिद्वय का बेसब्री से इन्तजार, की गई भव्य आगवानी। विहार की अवधि में सिहोरा के श्रावकों को पूज्य मुनि श्री के 2 दिन के प्रवास का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ। शहपुरा भिटौनी में पूज्य मुनि श्री के सानिध्य में आयोजित होने जा रहा है- श्री महामह नन्दीश्वर महामण्डल विधान।

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16-Feb-2023

पूज्य मुनिद्वय का कछार गांव से हुआ मंगल विहार

पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और चन्द्र सागर जी महाराज का कछार गांव (कटनी) से विहार हुआ। 26 जनवरी 2023 से पूज्य मुनिद्वय का यहां प्रवास चल रहा था।  21 दिन के लिए पूज्य मुनिद्वय का पावन सानिध्य इस सौभाग्यशाली गांव को मिला। दीक्षा दिवस समारोह और पंचकल्याणक महोत्सव के साथ ही श्री राम कथा का आयोजन भी यहाँ हुआ। 25 जैन परिवारों के, इस छोटे से गांव में पूज्य मुनिद्वय के मंगल सानिध्य का यह अतिशय हुआ कि सभी कार्यक्रमों में जैन समाज के साथ साथ,अन्य समाज से भी भारी संख्या में जनसमुदाय उपस्थित हुआ।

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14-Feb-2023

पंचकल्याणक महोत्सव कछार गांव (कटनी) (7-13 फरवरी)

7 फरवरी से 13 फरवरी 2023 तक परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद से, पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज के सानिध्य और बा. ब्र. विनय भैया जी (बंडा) के विशिष्ट प्रभावी निर्देशन में, पंचकल्याणक महोत्सव का कछार गांव (कटनी) में आयोजन हुआ। इस पंचकल्याणक की एक अभूतपूर्व विशेषता यह रही कि जैन समाज के अतिरिक्त, अन्य समाजों का भारी जनसमूह भी इस पंचकल्याणक में उपस्थित हुआ। कछार गांव ही नहीं, आसपास के अनेक गांवों का जन समुदाय भी यहां पहुॅंचा। उन्होंने पंचकल्याणक की क्रियाओं को ध्यान से देखा, नया ज्ञान प्राप्त किया और आत्म कल्याण के मार्ग को भी जाना। इस प्रकार  जिन प्रभावना का, एक बहुत बड़ा माध्यम यह पंचकल्याणक बना।

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5-Feb-2023

पूज्य मुनिद्वय का रजत संयम दीक्षा दिवस समारोह

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज की संयम दीक्षा रजत वर्ष के समापन के अवसर पर और दीक्षा के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इस वर्ष का दीक्षा दिवस, रजत संयम दीक्षा महोत्सव के रूप में मनाया गया। कछार गांव (कटनी) में आयोजित हुए, इस महोत्सव में दूर-दूर से आये भक्तों का मेला जुड़ा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों,  पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के द्वारा रचित 22 ग्रंथों के विमोचन, पूज्य मुनि द्वारा ही प्राकृत भाषा में रचित बारह भावना एवं नवदेवता पूजन (Video Launch) और पूज्य मुनिद्वय की दिव्य देशना को श्रवण कर श्रोता आनन्दित हो गए। बहुत ही उत्साह और हर्षोल्लास के साथ यह उत्सव संपन्न हुआ।

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26-Jan-2023

पूज्य मुनिद्वय का कछार गांव (कटनी) में हुआ भव्य मंगल प्रवेश

कछार गांव (बड़ा) जिला कटनी में आयोजित होने वाले कार्यक्रम

1. पंचकल्याणक हेतु पात्रों का चयन – 29 जनवरी 2023

2. संयम दीक्षा दिवस समारोह – 5 फरवरी 2023

3. पंचकल्याणक महोत्सव –7 से 13 फरवरी 2023


22-Jan-2023

पूज्य मुनिद्वय का राँझी से हुआ मंगल विहार

आज सामायिक उपरान्त, पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज का राँझी (जबलपुर) से मंगल विहार हुआ । राँझी में 4 दिसम्बर 2022 से पूज्य मुनिद्वय का प्रवास चल रहा था । राँझी के श्रावकों को 1 माह 18 दिन (49 दिन) के लिए पूज्य मुनिद्वय के पावन सानिध्य का सौभाग्य प्राप्त हुआ।


21-Jan-2023

आज प्रातकाल: पूज्य मुनि श्री ने रांझी के जंगल में पहाड़ी पर किया ध्यान

जनवरी माह की भीषण शीत में प्रातकाल: के समय, जब सामान्य जन अपने घरों से बाहर निकलने में भी संकोच करते हैं, ऐसे मौसम में आज प्रातकाल: पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने रांझी के जंगल में पहाड़ी पर लगभग 3 घंटे शीत परिषय पर विजय प्राप्त करते हुए, सामायिक ध्यान किया। आत्मा के ध्यान में लीन पूज्य मुनि श्री को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे चतुर्थ काल में साक्षात भगवान ही ध्यानस्थ अवस्था में वहां पर विराजमान हों।

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पंचकल्याणक महोत्सव राँझी,जबलपुर (13-19 जनवरी )

रांझी नगरी(जबलपुर) में, अनासक्त महायोगी संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में, 13 जनवरी से 19 जनवरी 2023 तक भव्य श्री 1008 मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।

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पंचकल्याणक जिनबिम्ब प्रतिष्ठा महोत्सव रांझी (जबलपुर)

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21-Dec-2022

आज पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने किया केशलोंच किया। केशलोंच वाले दिन उपवास भी रखा जाता है। शीत परिषह जय, केशलोंच और उपवास के साथ हुई, आज पूज्य मुनि श्री की तप साधना।

उपवास के साथ केशलोंच, जैन साधुओं की होती है कठिन तप चर्या,

इस कठिन साधना को देखकर आश्चर्य में पड़ जाती है दुनिया।


18-Dec-2022

28 Dec से 31- Dec- 2022 तक; पूज्य मुनि श्री के सानिध्य में ( 15 -35 वर्ष आयु वर्ग के लिए)  "अर्हं ज्ञान ज्योति शिविर" का आयोजन किया गया । 1- Jan -2023 को नववर्ष के अवसर पर; पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा रचित "शान्तिनाथ विधान" का आयोजन पूज्य मुनि श्री के ही सानिध्य में करने का सौभाग्य भी रांझी (जबलपुर) में श्रावकों को प्राप्त हुआ ।

11-Dec-2022

रांझी (जबलपुर में) “नई छह ढाला” की तीसरी ढाल पर शुरू हुए पूज्य मुनि श्री के प्रवचन।
पूज्य मुनि श्री की सरल सुगम प्रवचन शैली में, श्रोताओं पर हो रही है ज्ञानामृत की वर्षा।


4-Dec-2022

पूज्य मुनि श्री का मंगल प्रवास रांझी ( जबलपुर) में चल रहा है। बह रही है भक्ति की अविरल गंगा, भक्त ले रहे हैं ज्ञान और ध्यान का लाभ।

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November (2022)

बरेला ( जबलपुर) में श्री राम कथा के पावन अवसर पर पूज्य मुनि श्री की लेखनी से, सिद्ध प्रभु श्रीराम के गुणों का वर्णन करने वाले, अनुपम भजन “मर्यादा पुरुष श्री राम, हैं सिद्ध प्रभु बलराम” की भी रचना हुई। पूज्य मुनि श्री की मधुर वाणी में इस भजन को प्रथम बार सुनने का सौभाग्य भी, इस अवसर पर बरेला में श्रोताओं को प्राप्त हुआ। पूज्य मुनि श्री की रसमयी वाणी में इस भक्ति भजन को श्रवण कर श्रोता झूम उठते हैं और एक बार सुनकर उनका मन नहीं भरता तो बार-बार सुनने के लिए लालायित रहते हैं।


20-Nov to 30-Nov-2022

बरेला (जबलपुर) में श्री राम कथा का 11 दिवसीय संगीतमय वाचन हुआ। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के मुखारविन्द से “सिद्ध प्रभु श्री राम” का जीवन चरित्र सुन, दर्शक हुए आनन्दित और प्राप्त किया नया ज्ञान।

चातुर्मास मंगल कलश निष्ठापन समारोह

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       अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी प्राकृत भाषा मर्मज्ञ परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और वात्सल्य मूर्ति परम पूज्य मुनि श्री चंद्र सागर जी महाराज का चातुर्मास (2020) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र मुजफ्फरनगर में संपन्न हुआ। चातुर्मास का सौभाग्य ही नहीं, वरन युगल मुनिराज के शीतकालीन प्रवास का सौभाग्य भी इसी शहर को मिला। 11 मार्च 2020 से 10 फरवरी 2021 तक द्वय मुनिराज का प्रवास इसी शहर में रहा। यह नगरवासियों का तीव्र पुण्योदय था और भक्ति भावों का तत्काल मिला फल कि इस शहर को मुनिराज का लम्बी अवधि तक सानिध्य प्राप्त हुआ।

         मुजफ्फरनगर की चातुर्मास स्थली, जैन मिलन विहार में, 7 फरवरी 2021 को चातुर्मास मंगल कलश निष्ठापन समारोह का आयोजन किया गया चातुर्मास प्रारम्भ के समय  श्रावकों व भक्तों द्वारा मंगल प्रतीक के रूप में कलशों की  स्थापना चातुर्मास स्थल पर की जाती है। चातुर्मास समाप्ति के बाद शुभ, मंगल के प्रतीक यह कलश उन्हीं श्रावकों को प्रदान कर दिए जाते हैं। चातुर्मास स्थल पर मंगल प्रतीक के रूप में स्थापित हुए, इन कलशों को बहुत ही शुभ माना जाता है। जिन्हें श्रावकजन मंगल और पावन प्रतीक के रूप में अपने घरों में स्थापित कर लेते हैं।

        सामान्यतः तो चतुर्मास के बाद पिच्छी परिवर्तन समारोह के अवसर पर ही इन मंगल कलशों का निष्ठापन भी किया जाता है। इस बार पूज्य मुनि श्री का पिच्छी परिवर्तन समारोह तीर्थक्षेत्र हस्तिनापुर में आयोजित होना निश्चित हुआ है, इसलिए मुजफ्फरनगर समाज द्वारा 7 फरवरी 2021 को चातुर्मास मंगल कलश निष्ठापन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। द्वय मुनिराज के विहार की बेला नजदीक आने से उदास हो रहे भक्तों के मन को, इस समारोह ने उत्साह से भर दिया।

      इस समारोह में मुजफ्फरनगर ही नहीं दिल्ली, मेरठ और आसपास के क्षेत्रों से भी भक्तजन पहुंचे। कार्यक्रम में चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवल, पाद प्रक्षालन आदि मांगलिक क्रियाओं के साथ भक्तजनों ने द्वय मुनिराज की भक्ति भाव के साथ पूजा, अर्चना की और अर्ध्य समर्पित कर अपने को धन्य किया। समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम सभी के आकर्षण का केंद्र रहे। नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा अर्हं ध्वनि के साथ पंच मुद्रा और “जो हो सो हो” … भजन पर दी गई प्रस्तुति ने तो सबका मन मोहित कर लिया। महिला मंडल द्वारा श्री वर्धमान स्तोत्र के पदों पर प्रस्तुत नृत्य नाटिका ने भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी  महाराज की आवाज में श्री वर्धमान स्तोत्र के संस्कृत व हिंदी पदों के साथ, उसके अर्थ और भावों का महिला मंडल की सदस्यों ने नाटिका के रूप में मंचन किया। यह प्रस्तुति बहुत ही सुन्दर, नया और अनुकरणीय प्रोग्राम रही। इसके साथ ही.. “मेरे भगवन मुझे एक बार आगाह कर देना”.. भजन के साथ गुरुदेव के चरणों में अपने भक्तिभाव के पुष्पों को समर्पित किया।

           ग्रन्थराज तत्त्वार्थ सूत्र के आठवें अध्याय पर  हुए पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों पर आधारित  कृति.. कर्म बन्ध विज्ञान का विमोचन भी इस शुभ अवसर पर हुआ ।

       कार्यक्रम के अंत में पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने अपने उदबोधन में समाज के द्वारा किए गए शुभ कार्यों व सराहनीय प्रयासों के लिए उनका उत्साहवर्धन किया। मुनि श्री की मंगल वाणी और आर्शीवचन सुन सम्पूर्ण मुजफ्फरनगर समाज प्रसन्नता व हर्ष से भर गया। पूरे समाज के लिए ये अनमोल क्षण रहे।  इसके साथ ही पूज्य मुनिश्री ने अर्हं ध्यान के बारे में बताया किस प्रकार यह प्राचीन परम्परा से मिले ध्यान का ही एक नया version है और वर्तमान समय में इसका क्या महत्व है। 27 फरवरी 2021 को तीर्थक्षेत्र हस्तिनापुर में आयोजित होने वाले पिच्छी परिवर्तन के बारे में भी मुनि श्री ने समाज को प्रेरणा दी और इसी उत्साह एवं भक्तिभाव के साथ , आगे भी शुभ कार्यों में तत्पर रहने का मंगल आर्शीवाद दिया।

उदबोधन के अन्त में पूज्य मुनि श्री की आवाज में ..कुछ हो या ना हो मेरा मन दुर्बल ना हो.. मंगल कामना रूप भजन सुनकर, भक्तजन आनन्द और हर्ष से झूम उठे। इस प्रकार चातुर्मास कलश निष्ठापन का यह शुभ समारोह बहुत ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ सानन्द संपन्न हुआ।

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज का दीक्षा दिवस (2020)

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            मनुष्य जन्म को एक बहुमूल्य रत्न के समान माना जाता है। जिस प्रकार किसी समुद्र में से अचानक किसी व्यक्ति को भाग्य से कोई रत्न मिल जाए तो वह बहुत भाग्यशाली व्यक्ति माना जाता है, इसी प्रकार इस भवसागर में अनेक गतियों और भवों में भटकते हुए मनुष्य जन्म जिस जीव को प्राप्त हो जाता है तो वह जीवात्मा भी बहुत सौभाग्यशाली माना जाता है।

            मनुष्य जन्म तो बहुत जीव प्राप्त कर लेते हैं परंतु वे इस सौभाग्य का महत्व नहीं पहचानते। मनुष्य जन्म के दुर्लभ अवसर को भी वे उस प्रकार खो देते हैं, जैसे कोई व्यक्ति बहुमूल्य रत्न को काँच समझ कर वापस समुद्र में फेंक देता है। मनुष्य जन्म वह अवसर है जो हमें संसार के सभी दुखों से निकालकर, अनंत स्थायी सुख व आनंद, (मोक्ष) में पहुंचा सकता है। जन्म मरण के दुखों से छुटकारा दिला सकता है। मनुष्य जन्म के इस महत्व को वही भव्य आत्मा वास्तव में समझता है जो अपने कदम मोक्ष मार्ग पर बढ़ा देता है। दूसरे शब्दों में, मोक्ष मार्ग पर कदम बढ़ा देने वाले भव्य आत्माओं का ही मनुष्य जन्म पूर्णतया: सफल माना जाता है।

            हमारे तीर्थंकर भगवान भी पूर्व जन्मों में हम जैसे ही मनुष्य थे। उन्होंने अपने मनुष्य जन्म को सफल बनाकर मोक्ष सुख पाया  और अन्य भव्य जनों को मोक्ष मार्ग पर चलने का मार्ग दिखाया। तीर्थंकर भगवान द्वारा दिखाए गए मार्ग को अन्य भव्य आत्माओं ने पहचाना। उन्होंने भी संयम, महाव्रत लेकर इस मार्ग पर चलने का निश्चय किया और अपने मनुष्य जन्म को सार्थक कर दिया।

            मोक्ष मार्ग पर कदम बढ़ाते हुए दीक्षा का अवसर प्रत्येक  मोक्षमार्गी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है। दीक्षा ही एक तरह से, इस मनुष्य जन्म का सबसे बड़ा उपहार होती है जो गुरु द्वारा मोक्ष मार्ग पर चलने वाले अपने सुयोग्य शिष्यों को दी जाती है। मुनिजन, गुरुजन के लिए यदि कोई दिवस सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है तो वह यह दीक्षा दिवस ही होता है। यह दीक्षा दिवस उनके लिए एक नए जन्म की तरह ही होता है, इस दिन उनको एक नया नाम और नई पहचान प्राप्त होती है।

            आज से 23 वर्ष पूर्व 11.02.1998 माघ शुक्ला पूर्णिमा के दिन, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और परम पूज्य मुनि श्री चंद्र सागर जी महाराज के जीवन में भी दीक्षा दिवस का शुभ अवसर आया। दोनों मुनिराज को अपराजेय साधक संत, शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने इस शुभ दिन दिगंबर दीक्षा प्रदान की। तभी से प्रत्येक वर्ष भक्तजन इस शुभ दिन को दीक्षा दिवस के रूप में खूब धूमधाम से मनाते हैं। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज कहते हैं- हमारा जन्म तो उसी दिन से शुरू होता है, जिस दिन हमारी दीक्षा हुई, इससे पहले के जीवन की इतनी सार्थकता, इतना महत्व नहीं है। इसी कारण वे श्रावकों द्वारा मनाए जाने वाले अवतरण दिवस को इतना महत्व नहीं देते, पर दीक्षा दिवस को अपने लिए सबसे महत्वपूर्ण दिन मानते हैं।

तीर्थक्षेत्र महलका  में दीक्षा दिवस 2020—

            सभी क्षेत्रों के श्रावकों को यह प्रतीक्षा रहती है कि इस बार मुनिद्वय का दीक्षा दिवस हमारे क्षेत्र पर हो। लेकिन यह अवसर बहुत सौभाग्य से मिलता है। इस बार मुनिद्वय का दीक्षा दिवस मनाने का सौभाग्य अतिशय तीर्थ महलका (मेरठ) को प्राप्त हुआ। यह तीर्थ, शहरी क्षेत्र से दूर स्थित है। भक्तों के उत्साह को यह दूरी नहीं रोक सकी और  बड़ी संख्या में भक्तजन मुनिद्वय का दीक्षा दिवस मनाने के लिए जुड़ गए। दिल्ली, मेरठ, हस्तिनापुर,खतौली, सरधना आदिअनेक क्षेत्रों से भक्तजन महलका पहुंच गये। दीक्षा दिवस के दिन प्रात: काल ही मंदसौर से आई दीदियों ने दोनों मुनिराज की पूजा,आरती से दिन का शुभारंभ किया।

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भक्तों ने मुनिद्वय के कक्ष के बाहर रंगोली और गुब्बारों द्वारा अनेक तरह से सुंदर सज्जा की। प्रात: काल महलका तीर्थ क्षेत्र पर भव्य गन्धकुटी और 24 कमल मन्दिर का शिलान्यास संपन्न हुआ। दोपहर के समय दीक्षा दिवस का कार्यक्रम आरंभ हुआ। भक्तों ने मुनिद्वय के पहुंचने से पहले ही पूरे पंडाल को गुब्बारों रंगोली व झालरों से सजा दिया। अपनी मधुर आवाज से किसी भी कार्यक्रम में समां बांध देने वाली जबलपुर से आई सुप्रसिद्ध गायिका प्रीति जी अपने भजनों से सभी के हृदय में भक्ति भावों को बढ़ाती जा रही थीं। पंडाल भक्तो से पूरी तरह से भर चुका था, भक्तों की नजरें बेसब्री से मुनिद्वय के आगमन की प्रतीक्षा कर रही थीं।

            दोनों मुनिराज का पंडाल में प्रवेश हुआ तो भक्तों को ऐसा लगा, जैसे साक्षात भगवान उनके बीच आ गए हों। भक्ति भावों के साथ नृत्य गान करते हुए भक्तों ने दोनों मुनिराज का पूजन किया। सरधना से आये भक्तों ने 23 श्रीफल गुरुजनों के चरणों में अर्पित कर अपने क्षेत्र में उनसे प्रवास करने के लिए निवेदन किया। मेरठ से प्रियंका जैन ने मधुर स्वर में ‘प्रणम्याष्टक’ से सुन्दर मंगलाचरण किया। इसके पश्चात दोनों मुनिद्वय के जीवन पर एक सुन्दर नाटिका टीम अर्हं के सदस्यों के द्वारा प्रस्तुत की गई।

            पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में अपने गुरु महाराज को याद करते हुए, अपने भक्ति भाव समर्पित किए। उन्होंने कहा दीक्षा दिवस के साथ ही सब सुख इच्छाओं को बांधकर एक कोने में रख दिया जाता है। दीक्षा दिवस के दिन हम यह भी अपने में देखते हैं कि हमारे वैराग्य का स्तर वैसा ही बना रहे, जैसा कि दीक्षा वाले दिन था। इसके अतिरिक्त उन्होंने समझाया कि व्यक्ति को केवल अपने नाम को ही महत्व नहीं देना चाहिए। यह तो पुदगल शरीर का नाम है, हमारी वास्तविक पहचान तो अलग होती है। पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज ने दीक्षा दिवस के महत्व को बताकर भक्तजनों का अनेक तरह से मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम के अंत में भक्तों ने जोश और जयकारों के साथ मुनिद्वय की मंगल आरती की। इस तरह से बहुत आनंद उत्साह के साथ दीक्षा दिवस का यह शुभ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

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चातुर्मास स्थापना समारोह (2020)

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            दिगंबर जैन मुनि चलते फिरते तीर्थंकर भगवान समान होते हैं। संयम और तप की जो पराकाष्ठा उनकी जीवन चर्या में दिखाई देती है, वह अन्यत्र मिलना असम्भव होता है। तप, संयम और त्याग का उनका जीवन किसी आश्चर्य से कम नहीं होता।

            कठोर तपश्चर्या और त्याग से वे अपनी आत्मा को विशुद्ध बनाते हैं, अपनी आत्मा का कल्याण करते हैं। उनका जीवन स्वकल्याण के साथ-साथ परकल्याण की भावना पर आधारित होता है। पर से मतलब दूसरे व्यक्ति या मनुष्य से ही नहीं है, बल्कि हर वह प्राणी जिसे हम living being कहते हैं, से है। इन प्राणियों में वे सूक्ष्म जीव भी होते हैं जो हमें आंखों से या किसी यंत्र से भी दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे सूक्ष्म जीवों के प्राणों की रक्षा करने के लिए, उनको जीवन दान देने के लिए, दिगंबर मुनि महाव्रत धारण करके, अनेक प्रकार के संयम, त्याग और तप द्वारा अपने को संयमित कर लेते हैं।

            वर्षा ऋतु में जब धरती पर अनेक तरह के मच्छर, कीड़े- मकोड़े, ना दिखाई देने वाले सूक्ष्म जीव बहुत अधिक मात्रा में उत्पन्न होने लगते हैं। ऐसे में दिगम्बर मुनि अपने विहार अर्थात एक नगर से दूसरे नगर में जाने पर रोक लगा लेते हैं। अपना प्रवास एक नगर तक ही सीमित कर देते हैं,  जिससे कि विहार के समय अचानक पैर के नीचे आने से, न दिखाई देने वाले सूक्ष्म जीवों की हिंसा ना हो जाए।

            वर्षा ऋतु में दिगम्बर मुनि चार मास (श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक) एक ही स्थान पर रहकर अपनी तप-साधना करते हैं। इन चार मास तक एक ही स्थान पर ठहरने को चार्तुमास या वर्षायोग के नाम से भी जाना जाता है।

            सभी जैन समाज दिगंबर मुनियों का सानिध्य पाकर अपने को भाग्यशाली मानते हैं और यदि यह सानिध्य चातुर्मास का मिल जाए तो उस समाज जैसा सौभाग्य किसी अन्य समाज का नहीं होता। इसलिए सभी क्षेत्रों के समाजों में एक होड़ लगी रहती है कि उनके क्षेत्र को मुनिजन के चातुर्मास का अवसर मिल जाए। इसके लिए महीनों पहले से ही अनेक समाज मुनिजन, गुरुजन  के चरणों में श्री फल अर्पित कर, उनसे अपने क्षेत्र में चातुर्मास करने के लिए निवेदन करते हैं, अनुनय, विनय करते हैं। मुनिजन के चातुर्मास का सौभाग्य किस क्षेत्र या समाज को मिलेगा, इस निर्णय की सभी श्रावक बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।

            पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और परम पूज्य मुनि श्री चंद्र सागर जी महाराज के चातुर्मास का सौभाग्य इस बार उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर शहर को मिला। चातुर्मास से पहले भी  लॉकडाउन परिस्थितियों के कारण 11 मार्च 2020 से ही मुनिद्वय का प्रवास इस शहर में चल रहा है। जुलाई में चातुर्मास का सानिध्य भी इस शहर को ही प्राप्त हुआ। एक तरह से दो चातुर्मास जैसा सौभाग्य इस शहर को प्राप्त हुआ, ऐसा तीव्र पुण्योदय यहां के श्रावकजन का हुआ।  

            चातुर्मास वर्षायोग की स्थापना मुनिजन एक निश्चित तिथि पर कर लेते हैं। श्रावकगण चातुर्मास स्थापना  की मंगलबेला को हर्ष और उत्साह के साथ एक समारोह के रूप में मनाते हैं। जिसे मंगल कलश स्थापना भी कहते हैं। कलश शुभ, अष्टमंगल और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए इस दिन चातुर्मास प्रारंभ होने के संकल्प व प्रतीक के रूप में, मंगल कलशों की स्थापना श्रावकों द्वारा की जाती है।

            4 जुलाई 2020 को मुजफ्फरनगर की जैन मिलन विहार कॉलोनी में, भक्तों द्वारा मुनिद्वय का चातुर्मास स्थापना समारोह खूब धूमधाम से मनाया गया। सकल मुजफ्फरनगर समाज की तरफ से, 14 जिनालयों की चतुर्दश वर्षायोग समिति ने, मुनिद्वय के चरणों में श्रीफल समर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात श्रावकों द्वारा चित्र अनावरण, दीप प्रज्जवलन क्रियायें संपन्न की गईं। पुण्यशाली श्रावकों ने मुनिद्वय का पाद प्रक्षालन किया और शास्त्र भेंट कर पुण्य का अर्जन किया। छोटी बालिकाओं ने बहुत सुन्दर, नृत्यमयी मंगलाचरण प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। इसके बाद पूजा संगीत की मधुर ध्वनि के बीच छोटे बालक, बालिकाओं द्वारा नृत्य भक्ति करते हुए अष्ट द्रव्यों के खुबसूरत थाल मुनिद्वय के चरणों में समर्पित किए गए। इन छोटे बच्चों की नृत्य भक्ति आर्कषक प्रस्तुति रही। जैन महिला मंडल ने मधुर भजन के साथ समारोह में अपनी प्रस्तुति दी।

            तत्पश्चात भक्तों को मुनिद्वय की मंगलवाणी सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूज्य मुनि श्री ने अपने प्रवचन में मुजफ्फरनगर में चातुर्मास स्थापना को भक्तों के तीव्र पुण्य और भक्ति भावों का फल बताया, जिससे  ऐसी परिस्थिति बनी कि इस नगर को चातुर्मास स्थापना का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूज्य मुनि श्री ने समाज को एकता बनाए रखने और रावण का उदाहरण देते हुए अहंकार से दूर रहने का संदेश दिया। इसके साथ ही पूज्य मुनि श्री ने क्षेत्रवासियों को चेताया कि हम तो चार महीने के लिए आपके क्षेत्र पर सीमित रहेंगे, लेकिन आपको भी अपनी उपस्थिति निरन्तर दिखानी होगी, तभी इस चातुर्मास स्थापना का पूरा लाभ आपको मिलेगा।
            अंत में भक्तों ने मंगलदीपों से भक्ति भावों में झूमते हुए मुनिद्वय की आरती की और जीवन के इस क्षण को धन्य किया। इस प्रकार चातुर्मास स्थापना का यह समारोह हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।