परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा विरचित विशिष्ट कृति “नई छ्हढाला” की छठवीं ढाल पर पूज्य मुनि श्री की ही अमृतमयी वाणी में मंगल देशना . श्रावक धर्म प्रवचन (वाचना) -8(12-Jan-2023)श्रावक के पास अणुव्रत की निधियाँ होना, क्यों आवश्यक है? (काव्य: -6) . प्रवचन (वाचना) -7(11-Jan-2023)परिग्रह के लोभ को कैसे कम करें?(काव्य: … Continue reading
नई छ्हढाला (ढाल-6)
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