मुनिद्वय के पावन चरण कमलों से धन्य हुआ जिनवाणी चैनल


       वर्तमान समय में धर्म, अध्यात्म के प्रचार, प्रसार और प्रभावना में मीडिया ने भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। धार्मिक टीवी चैनलों के द्वारा तो धर्म प्रभावना के क्षेत्र में जैसे एक क्रांति ही आ गई है। जनसमुदाय को उनके घर पर ही भगवान के live अभिषेक, भक्ति, स्तोत्र व आरती का लाभ तो मिला ही, साथ ही गुरुजन, मुनिराजों की दिव्य वाणी, प्रवचन को श्रावण करने का सौभाग्य भी उन्हें इन धार्मिक चैनलों के माध्यम से प्राप्त हुआ। आज ये धार्मिक चैनल्स हमारे जीवन का एक हिस्सा बन गए हैं। हमारे पुण्य की वृद्धि और भावों की विशुद्धि बढ़ाने में इन चैनल्स का जो महान योगदान है, उसे कुछ ही शब्दों में व्यक्त करना कठिन है


       ऐसा ही एक सुप्रसिद्ध धार्मिक चैनल है..जिनवाणी चैनल। जैसा कि नाम है, वैसा ही कार्य करते हुए, यह चैनल पिछले 11 वर्ष से जिनवाणी के प्रचार और प्रभावना के लिये भक्ति भाव से समर्पित है। अध्यात्मिक- धार्मिक मीडिया जगत मे इस चैनल की अपनी एक अलग ही पहचान है।


      उत्तर प्रदेश के आगरा नगर से संचालित, जिनवाणी चैनल के लिये 12 Oct 2021 का दिन एक ऐतिहासिक दिन के रुप में अंकित हो गया, जब इस दिन अर्हं योग प्रणेता, अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत भाषा मर्मज्ञ परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और वात्सल्य मूर्ति पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज के पावन चरण कमल इस चैनल के परिसर की धरा पर पड़े। 

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पूज्य मुनिद्वय का मंगल आगमन एवम प्रवचन


                 जिस स्थान से recording और digital माध्यम से मुनिराजों के दर्शन पूरे विश्व को होते थे, आज वहां, साक्षात दो मुनिराज विराजमान थे। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे साक्षात भगवान का समोशरण ही यहां आ गया और चैनल का प्रांगण एक समोशरण सभा के रूप में ही परिवर्तित हो गया हो। द्वय मुनिराज के आभामंडल और साक्षात सानिध्य का ऐसा प्रभाव था कि जिनवाणी चैनल के परिसर में उत्सव जैसा नजारा दिख रहा था। रंग-बिरंगे परिधानों, ड्रेस कोड में बैठे भक्तों व जिनवाणी चैनल परिवार के सदस्यों के चेहरे प्रसन्नता और उत्साह से खिले नजर आ रहे थे।


          जिनवाणी चैनल के चेयरमेन श्री नीरज जैन जी जनसमुदाय के साथ नीचे बैठकर कार्यक्रम का आनंद ले रहे थे, तो दूर बैठे दर्शक उनकी इस विनम्रता सहजता से प्रभावित हो रहे थे। जिनवाणी की Anchor शे फाली जी, अदीवा जी की कार्यक्रम संचालन कला से तो सभी परिचित हैं। सुप्रसिद्ध Anchor मनोज जैन जी की उपस्थिति  ने मंच संचालन के कार्य में चार चाँद लगा दिये। दूर बैठे दर्शकों को भी यह दृश्य आकर्षित कर रहे थे। 


        द्वय मुनिराज का स्वागत, मंगलाचरण, पूजा, पाद प्रक्षालन, भक्ति भजन आदि मांगलिक क्रियायें बहुत ही उत्साह और उंमग के साथ सम्पन्न हुईं। इसके बाद समय आया, द्वय मुनिराज के प्रवचन का, ऐसे अवसरों पर श्रोताओं को मुनिराजों के प्रवचन को श्रवण करने की विशेष जिज्ञासा रहती है और वे इस दिव्य वाणी की बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं।
                परम पूज्य मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज ने आचार्य भगवन को याद करते हुए कुछ संस्मरण सुनाये और इनके माध्यम से श्रोताओं का मार्गदर्शन भी किया।


         परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने अपने सम्बोधन में शुरू में जब ये पक्तियाँ बोली… धर्मप्रेमी भव्य आत्माओं आज आप सभी, जिनवाणी की बात, जिनवाणी चैनल के माध्यम से, जिनवाणी चैनल के कार्यालय में ही सुनने को उत्साहित हैं, तो श्रोताओं का उत्साह चरम पर पहुँच गया। पूज्य मुनि श्री ने एक सुन्दर उदाहरण द्वारा समझाया कि जिनवाणी माता के चारों अनुयोगों के माध्यम से, कैसे हम अपने दुखों को कम कर सकते हैं और कैसे उनसे उबर सकते हैं। यह एक उदाहरण ही नहीं, जीवन के लिए उपयोगी ऐसी Tip थी जिसको Follow करके, जीवन भर हम अपना ही उपकार कर सकते हैं।

 
      इसी दिन पूज्य मुनि श्री की आहार चर्या भी यहां पर जिनवाणी चैनल के चेयरमेन श्री नीरज जैन जी के निवास स्थान पर बहुत ही आनंद पूर्वक और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। आहारचर्या के ये क्षण अद्भुत थे, जिसका टेलीकास्ट दूर बैठे दर्शकों ने भी देखा और अपने को सौभाग्यशाली बनाया। सभी दर्शकों को आहारचर्या को निकट से देखने और समझने का सुअवसर भी प्राप्त हुआ।

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पूज्य मुनि श्री की आहारचर्या


       शाम 4:00 बजे से समय था समाधान संध्या का, इस कार्यक्रम ने भी सभी को बहुत प्रभावित किया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में, जब द्वय मुनिराजों ने अपने जीवन में आये, वैराग्य का कारण बताया तो सभी के मन में रहने वाली, एक जिज्ञासा का समाधान हुआ। श्रोताजन इतने उत्साहित हो रहे थे कि जिज्ञासा रखने वाले जिज्ञासुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। दूरदराज के स्थानों से भी Video clip के माध्यम से प्रश्न पूछे गये और मुनिराज से उनका समाधान पाकर सभी ने अपने को धन्य माना।

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समाधान संध्या


        जिनवाणी चैनल परिसर में होने वाले इस कार्यक्रम की विशेषता रही, कि वहाँ सभी के बीच उत्साह, उमंग एवं ऊर्जा भी थी और मुनिराजों के प्रति बहुत अधिक भक्ति भाव भी थे और इनके साथ गजब का अनुशासन भी था ।


       दूर स्थानों पर बैठे जिनवाणी के दर्शकों को ये समाचार ही उत्साह से भर रहा था कि आज जिनवाणी कार्यालय परिसर में साक्षात द्वय मुनिराज विराजमान हैं तो जिनवाणी परिवार की सभी Team और सदस्यों के लिये तो ये पल निश्चित ही अविस्मरणीय रहेंगे। इस दिन की यादें लम्बे समय तक उन्हें प्रसन्नता और भक्ति भावों से भरती रहेंगी। इतनी अनुपम यादों को मस्तिष्क में संजोता हुआ ये एक दिवसीय कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ।