श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय कक्षा

अध्याय -2 [ सूत्र : 13-53]

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल वाणी में तत्त्वार्थ सूत्र का
नए रूप में (Animations और Visualizations के साथ) स्वाध्याय

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स्वाध्याय ( Class ) –56
क्षेत्रों में वेद व्यवस्था

( सूत्र: 52-53)

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स्वाध्याय ( Class ) –55
द्रव्य वेद और भाव वेद

( सूत्र: 50-51)

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स्वाध्याय ( Class ) –54
जैन जीव विज्ञान

( सूत्र: 49)

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स्वाध्याय ( Class ) –53
क्या होता है उपभोग

( सूत्र: 44-48)

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स्वाध्याय ( Class ) –52
संसारी जीवों में तैजस और कार्मण शरीर का सम्बन्ध

( सूत्र: 42-43)

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स्वाध्याय ( Class ) –51
तैजस और कार्मण शरीर का आत्मा से सम्बन्ध

( सूत्र: 41)

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स्वाध्याय ( Class ) –50
विभिन्न शरीरों में प्रदेश व परमाणु की संख्या

( सूत्र: 37-39)

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स्वाध्याय ( Class ) –49
वैक्रियिक और आहारक शरीर

( सूत्र: 36-40)

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स्वाध्याय ( Class ) –48
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( सूत्र: 36-40)

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स्वाध्याय ( Class ) –47
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( सूत्र: 31-35)

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स्वाध्याय ( Class ) –46
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( सूत्र: 31)

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स्वाध्याय ( Class ) –45
जन्म और जन्म-स्थान के भेद

( सूत्र: 29-31)

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स्वाध्याय ( Class ) –44
जीव कितने समय तक अनाहारक रह सकता है?

( सूत्र: 28)

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स्वाध्याय ( Class ) –43
तीन लोक का मानचित्र

( सूत्र: 28)

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स्वाध्याय ( Class ) –42
ऋजुगति और विग्रहगति

( सूत्र: 27-28)

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स्वाध्याय ( Class ) –41
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( सूत्र: 25-27)

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स्वाध्याय ( Class ) –40
विग्रहगति की गति

( सूत्र: 25)

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स्वाध्याय ( Class ) –39
विग्रहगति एवं योग

( सूत्र: 25)

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स्वाध्याय ( Class ) –38
मन का तीसरा विशेष कार्य आलाप

( सूत्र: 24)

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स्वाध्याय ( Class ) –37
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( सूत्र: 24)

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स्वाध्याय ( Class ) –36
 इन्द्रियों का ज्ञान

( सूत्र: 22-24)

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स्वाध्याय ( Class ) –35
 इन्द्रियों का ज्ञान

( सूत्र: 19-21)

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स्वाध्याय ( Class ) –34
 इन्द्रियों का ज्ञान

( सूत्र: 19-20)

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स्वाध्याय ( Class ) –33
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( सूत्र: 19)

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स्वाध्याय ( Class ) –32
 क्या होता है निर्वृत्ति और उपकरण?

( सूत्र: 17-18)

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स्वाध्याय ( Class ) –31
 इन्द्रिय और जीव का ज्ञान

( सूत्र: 15-17)

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स्वाध्याय ( Class ) –30
 कैसे होते हैं त्रस जीव

( सूत्र: 14)

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स्वाध्याय ( Class ) –29
सप्रतिष्ठित और अप्रतिष्ठित वनस्पति

( सूत्र: 13)

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स्वाध्याय ( Class ) –28
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( सूत्र: 13)

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स्वाध्याय ( Class ) –27
स्थावर जीवों का वर्णन

( सूत्र: 13)

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय Revision

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Note– प्रतिदिन की स्वाध्याय कक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न, अभ्यास पेपर, लिखित नोट्स, summary आदि अध्ययन सामग्री एवं विजेताओं के नाम फोटो को, अभ्यास सामग्री के लिंक पर click करके देखा जा सकता है —

अभ्यास सामग्री Click here

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र Online स्वाध्याय क्यों है अनूठा स्वाध्याय ?

क्या है इसमें विशेष ?

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       स्वाध्याय वह माध्यम है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने बारे में भी जानता है और अपने चारों तरफ की दुनिया की वास्तविकता के बारे में भी जानना सीखता है। श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथराज जैन आगम का सर्व प्रचलित, सर्व प्रसिद्ध और सर्वमान्य ग्रंथ है। सम्पूर्ण जैन आगम इस ग्रंथ में सार रूप में समाया हुआ है। श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ को जिसने एक बार अच्छे से समझ लिया, उसको जैन आगम के बारे में basic और महत्वपूर्ण ज्ञान हो जाता है। प्रत्येक जैन व्यक्ति एवं परिवार को कम से कम, श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का ज्ञान तो होना ही चाहिए, तभी उनका, इतने पुण्योदय से मिले जैन कुल में, जन्म लेना सफल होगा। आधुनिक समय में यदि हमने विज्ञान, टेक्नोलॉजी आदि अनेक तरह का खूब ज्ञान प्राप्त किया और उसके सहारे जिंदगी में आगे बढ़े, लेकिन हमने उस महत्वपूर्ण ज्ञान को नहीं जाना, जिससे आत्मिक रूप से यह जन्म ही नहीं,बल्कि आगे के जन्म भी सफल हो जाते तो दुर्भाग्य जैसा ही होगा। 

        श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ को सभी बाल, युवा, वृद्ध सरलता से समझ सकें, उसका चिंतन कर सकें, इसी बात को ध्यान में रखकर, अर्हं गुरुकुलं श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय को एक नए और अनोखे रूप में सबके सामने लेकर आया है। स्वाध्याय के क्षेत्र में इसे एक नया innovation, खोज या नया idea कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

        सभी क्षेत्रों में नए नए प्रयोग, ideas, रिर्सच से, जैसे न केवल तेजी से विकास होता है बल्कि एक नयापन भी बना रहता है, वैसे ही स्वाध्याय के क्षेत्र में, इस नए प्रयोग से तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय बहुत रुचिकर एवं आकर्षक बन गया है। 

 इस तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय में अनेक ऐसी सुन्दर विशेषताएं हैं जो इसे अनूठा स्वाध्याय बना देती हैं जैसे कि—

       (1) यह स्वाध्याय कक्षा, श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा की गई वाचना पर आधारित है। पूज्य मुनि श्री के प्रवचन तो उनकी अद्भुत, सरल शैली के लिए जाने ही जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन, गूढ़ विषय भी अति सरल रूप से समझ में आ जाता है। अर्हं गुरुकुलं ने इन सरल प्रवचनों को नई टेक्नोलॉजी के साथ एवं अनेक माध्यमों से और ज्यादा सरल बना दिया है।

       (2) पूज्य मुनिश्री की तत्त्वार्थ सूत्र वाचना को, इस स्वाध्याय में, एक कक्षा का रूप दे दिया गया है। ऐसा नहीं लगता कि हम स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे कि हम किसी कक्षा में बैठकर ही कुछ सीख रहे हैं, जिसमें टीचर भी है और साथ में लिखने के लिए Digital बोर्ड भी है वर्तमान समय में जैसे बच्चे Online Class के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही यहां पर विद्यार्थी online class के माध्यम से श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं। 

       (3) वाचना को आधुनिक Online class के रूप में प्रस्तुत करने का यह अद्भुत नया प्रयोग है। अनेक तरह के ग्राफिक, एनीमेशन, वीडियो visualization के साथ यह स्वाध्याय कक्षा अनोखी बन गई है।

        (4) स्वाध्याय कक्षा की screen पर एक तरफ पूज्य मुनि श्री का वीडियो दिखता है, जिसमें वह तत्त्वार्थ सूत्र को समझा रहे हैं। उसी screen पर साथ में डिजिटल बोर्ड पर महत्वपूर्ण Heading व नोट्स आते रहते हैं, जिससे विषय में एकाग्रता बनी रहती है। डिजिटल बोर्ड पर केवल Black colour  से ही नहीं, बल्कि अनेक colours में लेखन दिखता है, जो सुन्दर लगता है।

        (5) इसके साथ ही, जहाँ विषय को अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है, वहाँ वीडियो और ग्राफिक एनिमेशन दिखाई देते हैं। इससे विषय बहुत ही सरल और रुचिकर बन जाता है और मन इतना एकाग्र हो जाता कि उसका कहीं और जाने का मन नहीं करता। 

        (6) वाचना के साथ चलने वाला visualization ह्रदय को प्रभावित कर जाता है। सभी विषय सरलता से छोटे बच्चों को भी समझ में आ जाते हैं। visualization की स्मृति मस्तिष्क में गहराई से बैठती है तो उसके साथ विषय भी स्मृति में बना रहता है।

       (7) visualization को अनेक तरह से आकर्षक बना दिया गया है। कभी स्क्रीन का कलर change होता है, तो कभी उस पर राइटिंग का कलर change हो जाता है। कभी सुन्दर एनिमेशन आ जाते हैं तो कहीं अनेक प्रकार के वीडियो। कुल मिलाकर colourful और variety से भरपूर visualization के साथ ये कक्षाएं सभी को आकर्षित करती हैं। इस कार्य के लिए तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय टीम का कठिन परिश्रम बहुत सराहनीय है।

       (8) कक्षा के अंत में उस दिन की कक्षा का एक छोटा सा revision होता है और कक्षा के प्रारंभ में भी पूर्व दिन की कक्षा का revision होता है। जिससे  की विषय का पूर्ण content स्मृति में रखने में सहायता मिलती हैं। एनिमेशन के साथ, यह quick revision भी सरल बन जाता है। 

(9) कक्षा के अंत में पूज्य मुनि श्री के मधुर स्वर में जिनवाणी स्तुति सुनने और पढ़ने का सौभाग्य भी विद्यार्थियों को मिलता है।

 (10)  कक्षा में, 1 सवाल भी अंत में पूछा जाता है, जिसका जवाब देने वाले विद्यार्थियों में से, तीन भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।

(11)  विद्यार्थियों को इसके साथ ही प्रत्येक दिन की, कक्षा की लिखित सामग्री, लिखित summary और अपना मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास पत्र भी दिया जाता है। 

(12) प्रत्येक अध्याय के समाप्त होने के बाद एक परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है।  Revision classes एवं अनेक माध्यमों से विद्यार्थियों को इसकी तैयारी भी करा दी जाती है। 

       इस अनूठी Online स्वाध्याय  कक्षा में, अनूठे ढंग से अध्ययन करते हुए विद्यार्थियों को श्री तत्वार्थ सूत्र जी ग्रन्थ का स्वाध्याय करने का एक नया अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव हो रहा है।

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Day -8 उत्तम त्याग धर्म

अर्हं स्वधर्म शिविर (2022)

आध्यात्मिक देशना
(वास्तविक त्याग क्या है ?)

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र विधान
(अर्थ सहित)

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स्वाध्याय (नई छ्हढाला)

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पृच्छना स्वाध्याय

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श्री शान्तिनाथ कथा

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा विरचित

श्री शान्तिनाथ स्तुति-शतकम् पर आधारित

श्री शान्तिनाथ भगवान चरित्र कथा

पूज्य मुनि श्री की ही
मंगल वाणी में

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DAY -65
(02-Oct-2022)
अनेकांत दृष्टिकोण
(श्लोक: –)

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DAY -64
(01-Oct-2022)
सामायिक ध्यान
(श्लोक: –)

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DAY -63
(30-Sep-2022)
मौन साधना का अतिशय
(श्लोक: 72)

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DAY -62
(29-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि (सल्लेखना व समाधि मरण)
(श्लोक: –)

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DAY -61
(28-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि (ज्ञान व अनुभव)
(श्लोक: –)

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DAY -60
(26-Sep-2022)
कौन से 18 दोषों से रहित होते हैं भगवान?
(श्लोक: –)

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DAY -59
(25-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि
(श्लोक: –)

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DAY -58
(24-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि
(श्लोक: 67)

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DAY -57
(23-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि का अतिशय एवं श्रावक प्रतिमा
(श्लोक: 65-66)

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DAY -56
(22-Sep-2022)
भगवान की दिव्य ध्वनि का अतिशय एवं श्रावक प्रतिमा परिचय
(श्लोक: 63-64)

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DAY -55
(19-Sep-2022)
भगवान के केवलज्ञान के देवकृतअतिशय
(श्लोक: 62)

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DAY -54
(17-Sep-2022)
भगवान के केवलज्ञान के अतिशय एवं इंद्र द्वारा मनोहारी स्तुति
(श्लोक: 62)

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DAY -53
(16-Sep-2022)
समवशरण की महिमा
(श्लोक: 60-61)

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DAY -52
(15-Sep-2022)
समवशरण में सात प्रकार के मुनिराज
(श्लोक: -59)

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DAY -51
(14-Sep-2022)
अष्ट प्रातिहार्य वर्णन
(श्लोक: -58)

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DAY -50
(13-Sep-2022)
स्वर्ग -नरक का अस्तित्व
(श्लोक: -58)

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DAY -49
(12-Sep-2022)
समवशरण का अनुपम वर्णन
(श्लोक: 55-57)

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DAY -48
(11-Sep-2022)
समवशरण का अनुपम वर्णन
(श्लोक: 53-54)

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DAY -47
(30-Aug-2022)
चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज स्तुति

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DAY -46
(29-Aug-2022)
चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज स्तुति (समाधि दिवस विशेष)

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DAY -45
(28-Aug-2022)
ज्ञान कल्याणक (समवशरण की रचना)
(श्लोक:52)

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DAY -44
(27-Aug-2022)
शान्तिनाथ मुनिराज की आत्मध्यान में लीनता एवं केवल ज्ञान की प्राप्ति
(श्लोक:52)

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DAY -43
(26-Aug-2022)
शान्तिनाथ मुनिराज की आहारचर्या एवं पंचाश्चर्य
(श्लोक:51)

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DAY -42
(25-Aug-2022)
मुनिराज को ऋद्धियों की प्राप्ति
(श्लोक: 49-50)

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DAY -41
(24-Aug-2022)
तप कल्याणक ( शान्तिनाथ प्रभु द्वारा वस्त्र आभूषण त्याग, केशलोच एवं दिगम्बर दीक्षा ग्रहण करना )
(श्लोक: 48-49)

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DAY -40
(23-Aug-2022)
तप कल्याणक ( शान्तिनाथ प्रभु का दीक्षाभिषेक, राज्य त्याग एवं वनगमन )
(श्लोक: 45-48)

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DAY -39
(22-Aug-2022)
बारह भावना का नया चिन्तन
(श्लोक: 44-45)

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DAY -38
(21-Aug-2022)
चक्रवर्ती शान्तिनाथ वैराग्य की ओर
(श्लोक: 40-43)

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DAY -37
(20-Aug-2022)
चक्रवर्ती का वैभव एवं सम्पदा
(श्लोक: 37-39)

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DAY -36
(19-Aug-2022)
चक्रवर्ती का वैभव ( 9 निधियाँ)
(श्लोक: 36)

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DAY -35
(18-Aug-2022)
चक्रवर्ती की दिग्विजय यात्रा एवं 14 रत्न
(श्लोक: 33-35)

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DAY -34
(17-Aug-2022)
राजा शान्ति कुमार को चक्रवर्ती पद की प्राप्ति
(श्लोक: 32-33)

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DAY -33
(16-Aug-2022)
राज्य व्यवस्था एवं राज्याभिषेक
(श्लोक: 31)

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DAY -32
(15-Aug-2022)
युवराज शान्ति कुमार महामंडलिक राजा के पद पर सुशोभित
(श्लोक: 30-31)

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DAY -31
(14-Aug-2022)
24 तीर्थंकर परिचय (आयु एवं ऊंचाई )
(श्लोक: 30)

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DAY -30
(13-Aug-2022)
बालक शान्ति कुमार का बाल्यकाल एवं कुमारावस्था
(श्लोक: 28-30)

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DAY -29
(12-Aug-2022)
जन्म के 10 अतिशय एवं 108 कामदेवों का विवरण
(श्लोक: 26-27)

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DAY -28
(11-Aug-2022)
बालक शान्ति कुमार का रूप सौन्दर्य एवं पूज्य मुनि श्री का रक्षाबन्धन पर्व पर विशेष आशीर्वाद
(श्लोक: 24-25)

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DAY -27
(10-Aug-2022)
जन्म महोत्सव, इन्द्र का तांडव नृत्य एवं बालक के शरीर पर 108 शुभ चिन्ह
(श्लोक: 22-23)

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DAY -26
(09-Aug-2022)
तीर्थंकर बालक की महिमा, श्रंगार, स्तुति व नामकरण
(श्लोक: 20-21)

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DAY -25
(08-Aug-2022)
जन्म कल्याणक (जन्माभिषेक वर्णन एवं अनुपम दृश्य)

(श्लोक: 19-20)

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DAY -24
(07-Aug-2022)
जन्म कल्याणक

(श्लोक: 16-18)

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DAY -23
(06-Aug-2022)
गर्भ कल्याणक

(श्लोक: 14-15)

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DAY -22
(05-Aug-2022)
गर्भकल्याणक (माता के सोलह स्वप्न)

(श्लोक: 12-14)

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DAY -21
(04-Aug-2022)
बहुश्रुतभक्ति,प्रवचनभक्ति
आदि-सोलह कारण भावना चिन्तन
( श्लोक: 11)

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DAY -20
(03-Aug-2022)
अरिहन्तभक्ति एवं आचार्यभक्ति भावना चिन्तन

( श्लोक: 11)

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DAY -19
(02-Aug-2022)
साधु समाधि एवं वैयावृत्यकरणभावना चिन्तन

( श्लोक: 11)

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DAY -18
(01-Aug-2022)
शक्तित: त्याग एवं तप भावना चिन्तन

( श्लोक: 11)

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DAY -17
(30-July-2022)
सोलह कारण भावना चिन्तन

( श्लोक: 11)

विशेष सूचना—Day-1 से Day-16 तक की श्री शान्तिनाथ कथा के विडियो अभी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उपलब्ध होते ही upload कर दिये जाएंगे।

चातुर्मास कलश स्थापना समारोह (2022)

अतिशय तीर्थ क्षेत्र पनागर (जबलपुर)

     प्रायः ऐसा कहा जाता है कि जैन संत, जैन मुनि तो पावन नदी की उस धारा की तरह होते हैं, जिनको किसी भी स्थान पर रोका नहीं जा सकता, किंतु फिर भी हम देखते हैं कि प्रत्येक वर्ष में चार माह ऐसे भी आते हैं, जब इस पावन नदी की धारा को भी भक्तों का तीव्र पुण्योदय, परम सौभाग्य, उत्कृष्ट भक्ति भाव, श्रद्धा एवं समर्पण– चतुर्मास रूपी बांध को बना कर रोक ही लेते हैं। 

     परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं मुनि श्री चन्द्र सागर जी महाराज की विहार रूपी पावन नदी की धारा, दिल्ली से आगरा, आगरा से कुंडलपुर, उसके बाद अनेक स्थानों नोहटा, कटंगी, जबलपुर से प्रवाहित होते हुए, अतिशय तीर्थ क्षेत्र पनागर में आकर आखिर रुक ही गई। पनागर जबलपुर से 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा एक छोटा सा नगर है, किन्तु अतिशय और सौभाग्य की दृष्टि से, यह नगर बहुत बड़ा बन गया है। यहां पर स्थित देवाधिदेव श्री 1008 शांतिनाथ भगवान और पार्श्वनाथ भगवान का अतिशयकारी प्राचीन भव्य जिनालय सभी के हृदय कोअसीम शांति से भर देता है। 

    शहरों के प्रदूषण और कोलाहल से दूर, शांत वातावरण में बसा यह क्षेत्र आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महामुनिराज के चरण कमलों एवं सानिध्य से भी अनेक बार पावन हो चुका है। एक बार नहीं, अपितु 5 बार (1984,1988,1992, 2004, 2011) इस नगर को आचार्य श्री के शीतकालीन प्रवास का सौभाग्य प्राप्त हो चुका है। इस नगर की पावन धरा पर निश्चित ही, ऐसी शुभ वर्गणायें और अध्यात्मिक संस्कारों की धरोहर स्थित है कि एक नहीं, बल्कि चार चार मुनिराज इस नगर से जैन समाज को प्राप्त हुए और आज निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभव सागर जी महाराज, मुनि श्री निष्पक्ष सागर जी महाराज, मुनि श्री निस्पृह सागर जी महाराज एवं मुनि श्री निभ्रांत सागर जी महाराज के रूप में आचार्य श्री के संघ की शोभा बढ़ा रहे हैं।

     पनागर नगर के इन महान पुण्यों की सूची में, सौभाग्य का एक और नया अध्याय जुड़ा, जब 10 जुलाई 2022 को पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज एवं चन्द्र सागर जी महाराज का चार्तुमास के लिए, यहां भव्य मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश के साथ ही भक्तों के हृदय में उत्साह और उल्लास की तरंगें प्रवाहित होने लगीं। 

     इसी क्रम में 13 जुलाई 2022 को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंगल चार्तुमास कलश स्थापना का आयोजन किया गया। आयोजन में दूर-दूर से दिल्ली, मुजफ्फरनगर,आगरा आदि अनेक स्थानों से भी भक्तों के समूह मुनिद्वय के चरणों में भक्ति सुमन चढ़ाने पहुंचे। मंच पर मुनिद्वय के  विराजमान होते ही भक्तों का ह्रदय प्रफुल्लित हो उठा। ध्वजारोहण, दीप प्रज्जवलन, शास्त्र भेंट आदि मांगलिक क्रियाओं द्वारा कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। द्वय मुनिराज के पाद प्रक्षालन द्वारा दिल्ली, मुजफ्फरनगर, जबलपुर के भक्तों ने अपने को धन्य किया।

     मंच की colourful theme, द्वय मुनिराज का सानिध्य, उनके आभामण्डल का तेज और रंग बिरंगी पोशाकों में उपस्थित भक्तों के समूह से, पूरे पंडाल की शोभा ही निराली हो गई थी। ऐसी अनुभूति हो रही थी जैसे किसी देवलोक में ही यह दिव्य, भव्य, अलौकिक कार्यक्रम हो रहा है।

   मंच पर मुनिराज के समक्ष सुशोभित सुन्दर कमलों को देखकर, ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे सूर्य के उदय के साथ ही कमल खिल जाते हैं वैसे ही सूर्य के समान आभामंडल वाले मुनिराज के दर्शन से, यहां एक नहीं, अपितु पाँच पाँच मनोरम कमल खिल गए हों। मंच पर प्रयोग हुए सुनहरे पीले केसरिया रंगों की theme से ऐसा लग रहा था, सूर्योदय के समय जिस प्रकार आकाश में सुनहरी लालिमा छा जाती है वैसे ही मुनिराज के सूर्य के समान तेज आभामंडल के प्रभाव से ही, यह आकर्षक रंग यहां प्रकट हो गए हों। मंच की पृष्ठभूमि पर निर्मित दो हाथियों की आकृति को देखकर, यह लग रहा था कि ये भी प्रसन्न होकर मुनिराज के दर्शन पूजन करने यहां आ गए हैं। मंच से थोड़ा सा नीचे श्वेत, स्वर्ण आभा वाले कलशों की पंक्तियां, ऐसे आभासित हो रही थीं जैसे देवताओं द्वारा कलशों के रूप में दिव्य उपहार  मुनिराज के चरणों में समर्पित किए गए हों। यह संपूर्ण नजारा नेत्रों को आकर्षित ही नहीं कर रहा था बल्कि मन को भी सुख की अनुभूति करवा  रहा था। 

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कार्यक्रम में निकलंक शरणालय  के बच्चों ने, ॐ अर्हं बोल,– भजन के द्वारा अपनी प्रस्तुति दी। उसके बाद महिला मंडल द्वारा णमोकार मंत्र प्यारा– आदि भजनों पर सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात आचार्य श्री के पूजन का आयोजन हुआ। बालिका मंडल ने आचार्य श्री के गुणों की स्तुति, गौरव गाथा और पूजन को, नृत्य एवं नृत्य नाटिका के माध्यम से आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया। यह प्रस्तुति बहुत ही मनमोहक और सराहनीय रही। तत्पश्चात सभी भक्तों ने पूज्य मुनिद्वय की पूजा के लिए अर्ध्य समर्पित किए। अमित जी और राजेश कटंगहा (पंपी) जी द्वारा कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। कार्यक्रम में चार प्रकार के कलश स्थापित करने का भक्तों को पुण्य लाभ मिला। प्रथम कलश स्थापित करने का सौभाग्य पनागर नगर के ही समाज प्रमुख राजेश कंटगहा जी परिवार ने प्राप्त किया। सभी अन्य पुण्यशाली भक्तों ने भी बड़े उत्साह से, अपने कलशों को स्थापित करके, अपने को इस चातुर्मास में सहभागी बनाया। 

   इसके पश्चात समय था, उस कार्यक्रम का जिसकी भक्तों को बेसब्री से प्रतीक्षा रहती है। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की अमृतमयी वाणी जैसे ही प्रारम्भ हुई, भक्तों के कानों में मधुर रस ही घुलने लगा। पूज्य मुनि श्री ने कहा आज के डिजिटल युग में भक्त मुनिराज पर पूरी नजर रखते हैं, कब कहां किस नगर में जा रहे हैं, किस ओर जा रहे हैं, चातुर्मास का अनुमान लगाते हैं, कहां पर हो सकता है, पर हम वहीं चातुर्मास करते हैं जहाँ हमारे गुरु महाराज संकेत देते हैं।

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आज के पंचम काल में दो तरह से चातुर्मास की स्थापना होती है- एक मुनिराज द्वारा और दूसरी श्रावकों द्वारा। आज की यह चातुर्मास कलश स्थापना, आप श्रावकों की तरफ से की जाने वाली स्थापना है। मुनिश्री ने आगे कहा- कि चातुर्मास के दिनों में श्रावकों को भी नगर से बाहर अपने गमनागमन पर थोड़ा नियंत्रण लगाना चाहिए। यह धर्म दया, संयम एवं अहिंसा का धर्म है। इनका पालन करना श्रावकों के लिए भी आवश्यक है। तप, संयम साधना, दया का पालन करने वाले मुनिराजों की सेवा में तो देव सदैव तत्पर रहते ही हैं, दया अहिंसा का पालन करने वाले श्रावकों को भी, देव प्रणाम और नमस्कार करते हैं, सहयोग करते हैं। इसका एक सुंदर उदाहरण भी मुनि श्री ने दिया। मुनि श्री ने बताया -बिना किसी के कहे हुए, अपने मन से दिया गया दान ही सर्वश्रेष्ठ दान होता है। पूज्य मुनि श्री ने आगे कहा- पनागर नगर से चार मुनिराज एवं अनेक ब्रह्मचारी भैय्या जी व बहनें आचार्यश्री के संघ के लिये समर्पित हुए हैं, उसी का आज ये gift,  पनागर नगरवासियों को मिला कि गुरु महाराज ने हमें यहां चातुर्मास करने का आदेश दिया। अंत में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर, पूज्य मुनि श्री ने ग्रीष्म की धूप में– भजन की पंक्तियां अपने गुरु महाराज और दादा गुरु महाराज के लिए समर्पित की। जिसे सुनकर भक्तजन भावविभोर हो उठे।

इस प्रकार चातुर्मास कलश स्थापना का यह कार्यक्रम बहुत ही हर्षोल्लास और आनंद के साथ संपन्न हुआ।

भजन एवं ध्यान

भजन (ध्यान )-1

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भजन (ध्यान )-2

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भजन (ध्यान )-3

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भजन (ध्यान )-4

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भजन (ध्यान )-5

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भजन (ध्यान )-6

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भजन (ध्यान )-7

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भजन (ध्यान )-8

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भजन (ध्यान )-9

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भजन (ध्यान )-10

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भजन (ध्यान )-11

पंच नमस्कार मुद्रा एवं एक्युप्रेशर विधि

(Daily practice)

स्वास्थ्य के लिए उपयोगी अर्हं ध्यान योग एवं एक्युप्रेशर

अर्हं ध्यान योग

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पंच नमस्कार मुद्रा

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हथेली मे स्वास्थ्य (एक्युप्रेशर विधि)

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अर्हं ध्यान योग एवं प्रार्थना

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जीवन के लिए उपयोगी कुछ Tips