परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल वाणी में तत्त्वार्थ सूत्र का
नए रूप में (Animations और Visualizations के साथ) स्वाध्याय
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स्वाध्याय ( Class ) –53
जीव-विपाकी और पुद्गल-विपाकी कर्म प्रकृतियाँ,
विहायोगति कर्म प्रकृति-जीव विपाकी क्यों है?
( सूत्र: 25-26)
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स्वाध्याय ( Class ) –52
शुभ और अशुभ कर्म प्रकृतियाँ,
तिर्यंच आयु शुभ क्यों है?
( सूत्र: -25)
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स्वाध्याय ( Class ) –51
योगों और एकाग्रता का कर्म प्रदेश बन्ध पर प्रभाव
एवं कर्म का प्रदेश बन्ध कैसे होता है?
( सूत्र: -24)
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स्वाध्याय ( Class ) –50
सकाम-अकाम निर्जरा कैसे होती है?
एवं कर्मों का प्रदेश बन्ध
( सूत्र: -23)

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स्वाध्याय ( Class ) –49
नाम के अनुसार कर्म की अनुभूति
एवं कर्म विपाक के भेद
( सूत्र: -23)
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स्वाध्याय ( Class ) –48
कर्म फल की अनुभूति या विपाक (उदाहरण सहित)
स्वमुख-परमुख से कर्म फल कैसे मिलता है?
( सूत्र: -22)
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स्वाध्याय ( Class ) –47
विशुद्धि और संक्लेश का अनुभाग बन्ध पर प्रभाव
घातिया-अघातिया कर्मों के अनुभाग बन्ध के प्रकार
( सूत्र: -21)
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स्वाध्याय ( Class ) –46
कर्मों के अनुभाग बन्ध से तात्पर्य एवं अनुभव-अनुभाग,
द्रव्य-भाव बन्ध, संक्लेश और विशुद्धि में अन्तर
( सूत्र: -21)
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स्वाध्याय ( Class ) –45
आयु कर्म का उत्कृष्ट स्थिति बन्ध, तीर्थंकरों की
उत्कृष्ट आयु एवं कर्मों का जघन्य स्थिति बन्ध
( सूत्र: 16-20)
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स्वाध्याय ( Class ) –44
कर्मों के स्थिति बन्ध से तात्पर्य
एवं विभिन्न कर्मों का उत्कृष्ट स्थिति बन्ध
( सूत्र: 14-15)
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स्वाध्याय ( Class ) –43
अन्तराय कर्म के प्रकार
एवं अन्तराय कर्म का बन्ध कैसे होता है?
( सूत्र: -13)
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स्वाध्याय ( Class ) –42
गणधर पद की प्राप्ति का कारण,
गोत्रकर्म के भेद, गोत्र का परिवर्तन एवं तिर्यंचों का गोत्र
( सूत्र: -12)
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स्वाध्याय ( Class ) –41
यश: कीर्ति और अयश: कीर्ति का जीवन पर प्रभाव
एवं तीर्थंकर नामकर्म की महिमा
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –40
आदेय और अनादेय नामकर्म का प्रभाव,
यश और अपयश की प्राप्ति में नामकर्म की भूमिका
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –39
पर्याप्तियाँ जीव के लिए बहुमूल्य उपहार क्यों हैं?
स्थिर-अस्थिर नामकर्म का स्वास्थ्य पर प्रभाव?
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –38
पर्याप्ति के प्रकार एवं उनका महत्व,
अपर्याप्तक नामकर्म का जीव पर क्या प्रभाव पड़ता है?
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –37
सुभग-दुर्भग, सुस्वर-दुस्वर, शुभ-अशुभ, सूक्ष्म-बादर
एवं पर्याप्ति नामकर्म का कार्य
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –36
विहायोगति नामकर्म के प्रकार
एवं प्रत्येक-साधारण शरीर और त्रस-स्थावर नामकर्म
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –35
आतप-उद्योत नामकर्म का उदय किन जीवों में होता है?
श्वासोच्छवास और विहायोगति नामकर्म का कार्य
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –34
अगुरुलघु नामकर्म का उपकार,
उपघात-परघात नामकर्म का शरीर की रचना पर प्रभाव
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –33
स्पर्श, रस, गन्ध और वर्ण के प्रकार, आनुपूर्वी नामकर्म,
गति और गत्यानुपूर्वी में अन्तर
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –32
संहनन नामकर्म के प्रकार, पंचमकाल में कौन से
संहनन होते हैं एवं संहनन का महत्व
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –31
संस्थान नाम कर्म और शरीर की आकृतियाँ,
समचतुरस्र संस्थान किसका होता है?
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –30
निर्माण, बन्धन और संघात नाम कर्म
एवं इनके कार्य (उदाहरण सहित)
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –29
गति, जाति, शरीर और अंगोपांग नामकर्म,
गति नाम कर्म और आयु कर्म में अन्तर
( सूत्र: -11)
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स्वाध्याय ( Class ) –28
आयु कर्म की चार प्रकृतियाँ,
अकाल मरण कैसे और कौन सी आयु में होता है?
( सूत्र: 10-11)
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स्वाध्याय ( Class ) –27
कषाय वेदनीय के भेद
एवं विपाक-विचय धर्म ध्यान कैसे करें?
( सूत्र: -9)
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स्वाध्याय ( Class ) –26
दर्शन और चारित्र मोहनीय कर्म के प्रकार
एवं अरति और जुगुप्सा भाव में अन्तर
( सूत्र: -9)
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स्वाध्याय ( Class ) –25
वेदनीय और मोहनीय कर्म के भेद
एवं वेदनीय कर्म से मिलने वाले सुख-दुख
( सूत्र: -8)
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स्वाध्याय ( Class ) –24
सबसे खतरनाक और अशुभ निद्रा कौन सी हैं?
ये किन जीवों में नहीं होती?
( सूत्र: -7)
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स्वाध्याय ( Class ) –23
पाँच प्रकार की निद्रा,
प्रचला एवं स्त्यानगृद्धि निद्रा कैसी होती है?
( सूत्र: -7)
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स्वाध्याय ( Class ) –22
दर्शनावरण कर्म के प्रकार, ज्ञान और दर्शन में
सम्बन्ध एवं अचक्षु दर्शन क्या है?
( सूत्र: -7)
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स्वाध्याय ( Class ) –21
पर्याय दृष्टि का महत्व,
पर्याय से बढ़ता है द्रव्य का मूल्य, कैसे?
( सूत्र: -6)
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स्वाध्याय ( Class ) –20
अवधि ज्ञानावरण और मनःपर्यय ज्ञानावरण कर्म,
क्या अभव्य में केवल ज्ञान होता है?
( सूत्र: -6)
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स्वाध्याय ( Class ) –19
ज्ञानावरण कर्म के प्रकार, कर्म का क्षयोपशम
एवं नित्य उद्घाटित ज्ञान क्या है?
( सूत्र: -6)
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स्वाध्याय ( Class ) –18
वेदनीय कर्म घातिया कर्म की तरह कब हो जाता है?
एवं मोहनीय कर्म का अन्य कर्मो पर प्रभाव
( सूत्र: -5)
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स्वाध्याय ( Class ) –17
आत्मा के अनुजीवी और प्रतिजीवी गुण क्या हैं?
एवं इनमें क्या अन्तर है?
( सूत्र: -5)
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स्वाध्याय ( Class ) –16
सर्वप्रथम ज्ञानावरण कर्म और अन्त में अन्तराय
कर्म को क्यों रखा गया है?
( सूत्र: -5)
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स्वाध्याय ( Class ) –15
कर्म की आठ प्रकृतियाँ एव उनका स्वभाव
(उदाहरण सहित)
( सूत्र: 3-4)
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स्वाध्याय ( Class ) –14
अनुभाग और प्रदेश बन्ध क्या है?
एवं कर्म बन्ध के विभिन्न प्रकार
( सूत्र: -3)
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स्वाध्याय ( Class ) –13
कर्म बन्ध के भेद,
प्रकृति एवं स्थिति बन्ध (उदाहरण सहित)
( सूत्र: -3)
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स्वाध्याय ( Class ) –12
द्रव्य कर्म और भाव कर्म में अन्तर
एवं जीव, कर्म वर्गणा को कैसे ग्रहण करता है?
( सूत्र: -2)
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स्वाध्याय ( Class ) –11
कषायों की तीव्रता का कर्म बन्ध पर प्रभाव
एवं कर्म वर्गणा किसे कहते हैं?
( सूत्र: -2)
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स्वाध्याय ( Class ) –10
जीव, कर्म बन्ध और कषाय का
अनादिकालीन सम्बन्ध
( सूत्र: -2)
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स्वाध्याय ( Class ) –9
गुणस्थान के अनुसार कर्म बन्ध के कारण
एवं नोकर्म बन्ध क्या है?
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –8
प्रमाद किस प्रकार कार्य करता है?
एवं प्रमाद से बचने के उपाय
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –7
प्रमाद का व्रतों पर प्रभाव एवं प्रमाद
को कैसे पहचाने?
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –6
कर्म बन्ध के पाँच बड़े दरवाजे, प्रमाद के
प्रकार एवं महा प्रमाद से तात्पर्य
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –5
प्राणी संयम और इन्द्रिय संयम में क्या अन्तर है?
एवं राग-द्वेष पर आधारित असंयम भाव
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –4
अविरति के भेद एवं अविरति (असंयम) का भाव
किस कारण होता है?
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –3
वैनयिक मिथ्यात्व किसे कहते हैं?
एवं कुतर्कों पर आधारित अज्ञान मिथ्यात्व
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –2
विभिन्न प्रकार के मिथ्यात्व को कैसे पहचानें?
( सूत्र: -1)
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स्वाध्याय ( Class ) –1
कर्म बन्ध के कारण एवं मिथ्यात्व के प्रकार
( सूत्र: -1)
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श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय Revision [अध्याय 8]

Note– प्रतिदिन की स्वाध्याय कक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न, अभ्यास पेपर, लिखित नोट्स, summary आदि अध्ययन सामग्री एवं विजेताओं के नाम फोटो को, अभ्यास सामग्री के लिंक पर click करके देखा जा सकता है —
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श्री तत्त्वार्थ सूत्र Online स्वाध्याय क्यों है अनूठा स्वाध्याय ?
क्या है इसमें विशेष ?
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स्वाध्याय वह माध्यम है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने बारे में भी जानता है और अपने चारों तरफ की दुनिया की वास्तविकता के बारे में भी जानना सीखता है। श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथराज जैन आगम का सर्व प्रचलित, सर्व प्रसिद्ध और सर्वमान्य ग्रंथ है। सम्पूर्ण जैन आगम इस ग्रंथ में सार रूप में समाया हुआ है। श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ को जिसने एक बार अच्छे से समझ लिया, उसको जैन आगम के बारे में basic और महत्वपूर्ण ज्ञान हो जाता है। प्रत्येक जैन व्यक्ति एवं परिवार को कम से कम, श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का ज्ञान तो होना ही चाहिए, तभी उनका, इतने पुण्योदय से मिले जैन कुल में, जन्म लेना सफल होगा। आधुनिक समय में यदि हमने विज्ञान, टेक्नोलॉजी आदि अनेक तरह का खूब ज्ञान प्राप्त किया और उसके सहारे जिंदगी में आगे बढ़े, लेकिन हमने उस महत्वपूर्ण ज्ञान को नहीं जाना, जिससे आत्मिक रूप से यह जन्म ही नहीं,बल्कि आगे के जन्म भी सफल हो जाते तो दुर्भाग्य जैसा ही होगा।
श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ को सभी बाल, युवा, वृद्ध सरलता से समझ सकें, उसका चिंतन कर सकें, इसी बात को ध्यान में रखकर, अर्हं गुरुकुलं श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय को एक नए और अनोखे रूप में सबके सामने लेकर आया है। स्वाध्याय के क्षेत्र में इसे एक नया innovation, खोज या नया idea कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।
सभी क्षेत्रों में नए नए प्रयोग, ideas, रिर्सच से, जैसे न केवल तेजी से विकास होता है बल्कि एक नयापन भी बना रहता है, वैसे ही स्वाध्याय के क्षेत्र में, इस नए प्रयोग से तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय बहुत रुचिकर एवं आकर्षक बन गया है।
इस तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय में अनेक ऐसी सुन्दर विशेषताएं हैं जो इसे अनूठा स्वाध्याय बना देती हैं जैसे कि—
(1) यह स्वाध्याय कक्षा, श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा की गई वाचना पर आधारित है। पूज्य मुनि श्री के प्रवचन तो उनकी अद्भुत, सरल शैली के लिए जाने ही जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन, गूढ़ विषय भी अति सरल रूप से समझ में आ जाता है। अर्हं गुरुकुलं ने इन सरल प्रवचनों को नई टेक्नोलॉजी के साथ एवं अनेक माध्यमों से और ज्यादा सरल बना दिया है।
(2) पूज्य मुनिश्री की तत्त्वार्थ सूत्र वाचना को, इस स्वाध्याय में, एक कक्षा का रूप दे दिया गया है। ऐसा नहीं लगता कि हम स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे कि हम किसी कक्षा में बैठकर ही कुछ सीख रहे हैं, जिसमें टीचर भी है और साथ में लिखने के लिए Digital बोर्ड भी है। वर्तमान समय में जैसे बच्चे Online Class के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही यहां पर विद्यार्थी online class के माध्यम से श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं।
(3) वाचना को आधुनिक Online class के रूप में प्रस्तुत करने का यह अद्भुत नया प्रयोग है। अनेक तरह के ग्राफिक, एनीमेशन, वीडियो visualization के साथ यह स्वाध्याय कक्षा अनोखी बन गई है।
(4) स्वाध्याय कक्षा की screen पर एक तरफ पूज्य मुनि श्री का वीडियो दिखता है, जिसमें वह तत्त्वार्थ सूत्र को समझा रहे हैं। उसी screen पर साथ में डिजिटल बोर्ड पर महत्वपूर्ण Heading व नोट्स आते रहते हैं, जिससे विषय में एकाग्रता बनी रहती है। डिजिटल बोर्ड पर केवल Black colour से ही नहीं, बल्कि अनेक colours में लेखन दिखता है, जो सुन्दर लगता है।
(5) इसके साथ ही, जहाँ विषय को अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है, वहाँ वीडियो और ग्राफिक एनिमेशन दिखाई देते हैं। इससे विषय बहुत ही सरल और रुचिकर बन जाता है और मन इतना एकाग्र हो जाता कि उसका कहीं और जाने का मन नहीं करता।
(6) वाचना के साथ चलने वाला visualization ह्रदय को प्रभावित कर जाता है। सभी विषय सरलता से छोटे बच्चों को भी समझ में आ जाते हैं। visualization की स्मृति मस्तिष्क में गहराई से बैठती है तो उसके साथ विषय भी स्मृति में बना रहता है।
(7) visualization को अनेक तरह से आकर्षक बना दिया गया है। कभी स्क्रीन का कलर change होता है, तो कभी उस पर राइटिंग का कलर change हो जाता है। कभी सुन्दर एनिमेशन आ जाते हैं तो कहीं अनेक प्रकार के वीडियो। कुल मिलाकर colourful और variety से भरपूर visualization के साथ ये कक्षाएं सभी को आकर्षित करती हैं। इस कार्य के लिए तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय टीम का कठिन परिश्रम बहुत सराहनीय है।
(8) कक्षा के अंत में उस दिन की कक्षा का एक छोटा सा revision होता है और कक्षा के प्रारंभ में भी पूर्व दिन की कक्षा का revision होता है। जिससे की विषय का पूर्ण content स्मृति में रखने में सहायता मिलती हैं। एनिमेशन के साथ, यह quick revision भी सरल बन जाता है।
(9) कक्षा के अंत में पूज्य मुनि श्री के मधुर स्वर में जिनवाणी स्तुति सुनने और पढ़ने का सौभाग्य भी विद्यार्थियों को मिलता है।
(10) कक्षा में, 1 सवाल भी अंत में पूछा जाता है, जिसका जवाब देने वाले विद्यार्थियों में से, तीन भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।
(11) विद्यार्थियों को इसके साथ ही प्रत्येक दिन की, कक्षा की लिखित सामग्री, लिखित summary और अपना मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास पत्र भी दिया जाता है।
(12) प्रत्येक अध्याय के समाप्त होने के बाद एक परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है। Revision classes एवं अनेक माध्यमों से विद्यार्थियों को इसकी तैयारी भी करा दी जाती है।
इस अनूठी Online स्वाध्याय कक्षा में, अनूठे ढंग से अध्ययन करते हुए विद्यार्थियों को श्री तत्वार्थ सूत्र जी ग्रन्थ का स्वाध्याय करने का एक नया अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव हो रहा है।
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