श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय कक्षा

अध्याय -3

परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की मंगल वाणी में तत्त्वार्थ सूत्र का
नए रूप में (Animations और Visualizations के साथ) स्वाध्याय

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स्वाध्याय ( Class ) –36
अर्हं ध्यान के माध्यम से मध्य लोक के अकृत्रिम जिनालयों की वंदना

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स्वाध्याय ( Class ) –35
त्रेसठ शलाका पुरुष, मनुष्य-तिर्यंच गति में आयु
एवं तीसरे अध्याय का फल

( सूत्र: 37-38)

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स्वाध्याय ( Class ) –34
ढाई द्वीप में भोगभूमि-कर्मभूमि
एवं किस भूमि में कर्मों का संचय होता हैं?

( सूत्र: -37)

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स्वाध्याय ( Class ) –33
अंतरद्वीपज म्लेच्छ मनुष्यों के रहने के स्थान, शरीर की आकृति
एवं उत्पत्ति के कारण

( सूत्र: -36)

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स्वाध्याय ( Class ) –32
मनुष्यों के प्रकार एवं 7 ऋद्धियाँ

( सूत्र: -36)

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स्वाध्याय ( Class ) –31
किस समय मनुष्य की आत्मा के प्रदेश ढाई द्वीप के बाहर भी होते हैं?

( सूत्र: 35-36)

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स्वाध्याय ( Class ) –30
असंख्यात द्वीप समुद्रों में कर्म व भोगभूमि की व्यवस्था एवं ढाई द्वीप का वर्णन

( सूत्र: 34-35)

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स्वाध्याय ( Class ) –29
धातकीखंड एवं पुष्करार्ध द्वीप की रचना

( सूत्र: 33-34)

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स्वाध्याय ( Class ) –28
जम्बूद्वीप और धातकीखंड के किस क्षेत्र में कौन सा काल रहता है?

( सूत्र: 31-33)

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स्वाध्याय ( Class ) –27
अवसर्पिणी-उत्सर्पिणी काल परिवर्तन एवं उसका प्रभाव

( सूत्र: -30)

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स्वाध्याय ( Class ) –26
दस प्रकार के कल्पवृक्ष एवं उनसे प्राप्त होने वाली भोग सामग्री

( सूत्र: -30)

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स्वाध्याय ( Class ) –25
जम्बूद्वीप के क्षेत्रों में काल परिवर्तन एवं मनुष्य की आयु

( सूत्र: 28-30)

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स्वाध्याय ( Class ) –24
भोगभूमि का जीवन कैसा होता है?

( सूत्र: -27)

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स्वाध्याय ( Class ) –23
आर्य खंड में काल परिवर्तन

( सूत्र: -27)

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स्वाध्याय ( Class ) –22
जम्बूद्वीप के क्षेत्रों का विस्तार

( सूत्र: 24-27)

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स्वाध्याय ( Class ) –21
चौदह महानदियों का रोचक वर्णन

( सूत्र: 20-23)

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स्वाध्याय ( Class ) –20
सरोवरों के मध्य से निकलने वाली 14 नदियाँ

( सूत्र: 19-20)

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स्वाध्याय ( Class ) –19
अकृत्रिम सरोवरों में देवियों के निवास स्थान

( सूत्र: -19)

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स्वाध्याय ( Class ) –18
अकृत्रिम कमल वनस्पतिकायिक हैं या पृथ्वीकायिक?

( सूत्र: -18)

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स्वाध्याय ( Class ) –17
अकृत्रिम सरोवरों और कमलों की अद्भुत सुन्दरता

( सूत्र: 15-18)

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स्वाध्याय ( Class ) –16
जम्बूद्वीप के सरोवर और उनकी विशेषता

( सूत्र: 14-15)

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स्वाध्याय ( Class ) –15
कहाँ है सोने चाँदी के पर्वत ?

( सूत्र: 12-13)

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स्वाध्याय ( Class ) –14
जम्बूद्वीप की संरचना

( सूत्र: -11)

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स्वाध्याय ( Class ) –13
जम्बूद्वीप की संरचना

( सूत्र: 10-11)

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स्वाध्याय ( Class ) –12
भरत क्षेत्र के छह खण्ड और मध्य लोक के 458 अकृत्रिम चैत्यालय

( सूत्र: 10-11)

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स्वाध्याय ( Class ) –11
पृथ्वी की वास्तविक आकृति कैसी है ?

( सूत्र: 10-11)

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स्वाध्याय ( Class ) –10
जम्बूद्वीप और असंख्यात द्वीप समुद्र की आकृति

( सूत्र: -9)

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स्वाध्याय ( Class ) –9
शाश्वत,असंख्यात,अनंत को जाने

( सूत्र: 8-9)

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स्वाध्याय ( Class ) –8
दुनिया का वास्तविक भूगोल

( सूत्र: -8)

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स्वाध्याय ( Class ) –7
सूर्य, चाँद, तारे कहाँ होते हैं?

( सूत्र: 7-8)

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स्वाध्याय ( Class ) –6
नरकों में कौन जन्म लेता है?

( सूत्र: -6)

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स्वाध्याय ( Class ) –5
नारकी भाव क्या है इससे कैसे बचें?

( सूत्र: 4-5)

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स्वाध्याय ( Class ) –4
नारकियों के वैक्रियक शरीर की विशेषता

( सूत्र: 3-4)

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स्वाध्याय ( Class ) –3
नारकी जीवों के दुःखों को जानना क्यों है ज़रूरी ? 

( सूत्र: -2)

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स्वाध्याय ( Class ) –2
क्या नरकों में देव भी रहते हैं? 

( सूत्र: 1-2)

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स्वाध्याय ( Class ) –1
लोक में नरक कहाँ होते हैं?

( सूत्र: -1)

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Note– प्रतिदिन की स्वाध्याय कक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न, अभ्यास पेपर, लिखित नोट्स, summary आदि अध्ययन सामग्री एवं विजेताओं के नाम फोटो को, अभ्यास सामग्री के लिंक पर click करके देखा जा सकता है —

अभ्यास सामग्री Click here

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय Revision [ अध्याय -3]

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श्री तत्त्वार्थ सूत्र Online स्वाध्याय क्यों है अनूठा स्वाध्याय ?

क्या है इसमें विशेष ?

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       स्वाध्याय वह माध्यम है जिसके द्वारा कोई व्यक्ति अपने बारे में भी जानता है और अपने चारों तरफ की दुनिया की वास्तविकता के बारे में भी जानना सीखता है। श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथराज जैन आगम का सर्व प्रचलित, सर्व प्रसिद्ध और सर्वमान्य ग्रंथ है। सम्पूर्ण जैन आगम इस ग्रंथ में सार रूप में समाया हुआ है। श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ को जिसने एक बार अच्छे से समझ लिया, उसको जैन आगम के बारे में basic और महत्वपूर्ण ज्ञान हो जाता है। प्रत्येक जैन व्यक्ति एवं परिवार को कम से कम, श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ का ज्ञान तो होना ही चाहिए, तभी उनका, इतने पुण्योदय से मिले जैन कुल में, जन्म लेना सफल होगा। आधुनिक समय में यदि हमने विज्ञान, टेक्नोलॉजी आदि अनेक तरह का खूब ज्ञान प्राप्त किया और उसके सहारे जिंदगी में आगे बढ़े, लेकिन हमने उस महत्वपूर्ण ज्ञान को नहीं जाना, जिससे आत्मिक रूप से यह जन्म ही नहीं,बल्कि आगे के जन्म भी सफल हो जाते तो दुर्भाग्य जैसा ही होगा। 

        श्री तत्वार्थ सूत्र ग्रंथ को सभी बाल, युवा, वृद्ध सरलता से समझ सकें, उसका चिंतन कर सकें, इसी बात को ध्यान में रखकर, अर्हं गुरुकुलं श्री तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय को एक नए और अनोखे रूप में सबके सामने लेकर आया है। स्वाध्याय के क्षेत्र में इसे एक नया innovation, खोज या नया idea कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।

        सभी क्षेत्रों में नए नए प्रयोग, ideas, रिर्सच से, जैसे न केवल तेजी से विकास होता है बल्कि एक नयापन भी बना रहता है, वैसे ही स्वाध्याय के क्षेत्र में, इस नए प्रयोग से तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय बहुत रुचिकर एवं आकर्षक बन गया है। 

 इस तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय में अनेक ऐसी सुन्दर विशेषताएं हैं जो इसे अनूठा स्वाध्याय बना देती हैं जैसे कि—

       (1) यह स्वाध्याय कक्षा, श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रन्थराज पर, परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा की गई वाचना पर आधारित है। पूज्य मुनि श्री के प्रवचन तो उनकी अद्भुत, सरल शैली के लिए जाने ही जाते हैं, जिससे कठिन से कठिन, गूढ़ विषय भी अति सरल रूप से समझ में आ जाता है। अर्हं गुरुकुलं ने इन सरल प्रवचनों को नई टेक्नोलॉजी के साथ एवं अनेक माध्यमों से और ज्यादा सरल बना दिया है।

       (2) पूज्य मुनिश्री की तत्त्वार्थ सूत्र वाचना को, इस स्वाध्याय में, एक कक्षा का रूप दे दिया गया है। ऐसा नहीं लगता कि हम स्वाध्याय कर रहे हैं, बल्कि ऐसा अनुभव होता है, जैसे कि हम किसी कक्षा में बैठकर ही कुछ सीख रहे हैं, जिसमें टीचर भी है और साथ में लिखने के लिए Digital बोर्ड भी है वर्तमान समय में जैसे बच्चे Online Class के माध्यम से पढ़ाई कर रहे हैं, वैसे ही यहां पर विद्यार्थी online class के माध्यम से श्री तत्त्वार्थ सूत्र ग्रंथ का अध्ययन कर रहे हैं। 

       (3) वाचना को आधुनिक Online class के रूप में प्रस्तुत करने का यह अद्भुत नया प्रयोग है। अनेक तरह के ग्राफिक, एनीमेशन, वीडियो visualization के साथ यह स्वाध्याय कक्षा अनोखी बन गई है।

        (4) स्वाध्याय कक्षा की screen पर एक तरफ पूज्य मुनि श्री का वीडियो दिखता है, जिसमें वह तत्त्वार्थ सूत्र को समझा रहे हैं। उसी screen पर साथ में डिजिटल बोर्ड पर महत्वपूर्ण Heading व नोट्स आते रहते हैं, जिससे विषय में एकाग्रता बनी रहती है। डिजिटल बोर्ड पर केवल Black colour  से ही नहीं, बल्कि अनेक colours में लेखन दिखता है, जो सुन्दर लगता है।

        (5) इसके साथ ही, जहाँ विषय को अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता होती है, वहाँ वीडियो और ग्राफिक एनिमेशन दिखाई देते हैं। इससे विषय बहुत ही सरल और रुचिकर बन जाता है और मन इतना एकाग्र हो जाता कि उसका कहीं और जाने का मन नहीं करता। 

        (6) वाचना के साथ चलने वाला visualization ह्रदय को प्रभावित कर जाता है। सभी विषय सरलता से छोटे बच्चों को भी समझ में आ जाते हैं। visualization की स्मृति मस्तिष्क में गहराई से बैठती है तो उसके साथ विषय भी स्मृति में बना रहता है।

       (7) visualization को अनेक तरह से आकर्षक बना दिया गया है। कभी स्क्रीन का कलर change होता है, तो कभी उस पर राइटिंग का कलर change हो जाता है। कभी सुन्दर एनिमेशन आ जाते हैं तो कहीं अनेक प्रकार के वीडियो। कुल मिलाकर colourful और variety से भरपूर visualization के साथ ये कक्षाएं सभी को आकर्षित करती हैं। इस कार्य के लिए तत्त्वार्थ सूत्र स्वाध्याय टीम का कठिन परिश्रम बहुत सराहनीय है।

       (8) कक्षा के अंत में उस दिन की कक्षा का एक छोटा सा revision होता है और कक्षा के प्रारंभ में भी पूर्व दिन की कक्षा का revision होता है। जिससे  की विषय का पूर्ण content स्मृति में रखने में सहायता मिलती हैं। एनिमेशन के साथ, यह quick revision भी सरल बन जाता है। 

(9) कक्षा के अंत में पूज्य मुनि श्री के मधुर स्वर में जिनवाणी स्तुति सुनने और पढ़ने का सौभाग्य भी विद्यार्थियों को मिलता है।

 (10)  कक्षा में, 1 सवाल भी अंत में पूछा जाता है, जिसका जवाब देने वाले विद्यार्थियों में से, तीन भाग्यशाली विजेताओं को पुरस्कार भी प्रदान किए जाते हैं।

(11)  विद्यार्थियों को इसके साथ ही प्रत्येक दिन की, कक्षा की लिखित सामग्री, लिखित summary और अपना मूल्यांकन करने के लिए एक अभ्यास पत्र भी दिया जाता है। 

(12) प्रत्येक अध्याय के समाप्त होने के बाद एक परीक्षा का भी आयोजन किया जाता है।  Revision classes एवं अनेक माध्यमों से विद्यार्थियों को इसकी तैयारी भी करा दी जाती है। 

       इस अनूठी Online स्वाध्याय  कक्षा में, अनूठे ढंग से अध्ययन करते हुए विद्यार्थियों को श्री तत्वार्थ सूत्र जी ग्रन्थ का स्वाध्याय करने का एक नया अभूतपूर्व और अनूठा अनुभव हो रहा है।

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