आचार्य श्री नेमिचन्द्रसिद्धान्ति देव विरचित
‘बृहद् द्रव्य संग्रह’ ग्रन्थ
(आचार्य ब्रह्मदेव सूरि रचित संस्कृत टीका) पर
परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज की
मंगल वाणी में स्वाध्याय वाचना
-o—–o—–o-
अधिकार – 2
स्वाध्याय (वाचना) -92
सम्यग्दृष्टि पुण्य क्यों करता है?
सम्यग्दृष्टि का पुण्य विशिष्ट क्यों होता है?
पुण्य और पाप कब हेय होते हैं?
(गाथा: -38)
.
स्वाध्याय (वाचना) -91
मोक्ष में आत्मा कैसा होता है? (उदाहरण सहित)
क्या सभी जीव मोक्ष चले जाएंगे?
पुण्य भावों में कैसे रहें?
(गाथा: 37-38)
.
स्वाध्याय (वाचना) -90
भावमोक्ष और द्रव्यमोक्ष से तात्पर्य,
तीन प्रकार का अतीन्द्रिय सुख,
कर्म शत्रु को कैसे पकड़ें?
(गाथा:-37)
.
स्वाध्याय (वाचना) -89
वीतराग सम्यग्दृष्टि की कर्म निर्जरा,
सम्यग्ज्ञानी और वीतराग सम्यग्ज्ञानी में अन्तर को समझें,
भेद विज्ञान कब सार्थक होता है?
(गाथा: 36-37)
.
स्वाध्याय (वाचना) -88
सविपाक और अविपाक निर्जरा कैसे होती है?
संवर पूर्वक सविपाक निर्जरा मोक्ष मार्ग में सहायक,
अज्ञानी और सम्यग्ज्ञानी की निर्जरा में अन्तर,
(गाथा: -36)
.
स्वाध्याय (वाचना) -87
सूक्ष्मसाम्पराय चारित्र की विशेषता,
यथाख्यात चारित्र किसे कहते हैं?
कौन सा चारित्र-किस गुणस्थान में होता है?
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -86
छेदोपस्थापना चारित्र किसे कहते हैं?
छेदोपस्थापना चारित्र के दो प्रकार,
परिहारविशुद्धि चारित्र कब और कैसे होता है?
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -85
परिषह सहना और परिषहजय में अन्तर,
समभाव कब आता है?
सामायिक चारित्र का पालन कैसे होता है?
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -84
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -83
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -82
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -81
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -80
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -79
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -78
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -77
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -76
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -75
मध्यलोक के द्वीप और समुद्र,
मध्यलोक को तिर्यग् लोक क्यों कहा जाता है?
व्यन्तर देवों के आवास, भवन और पुर में अन्तर
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -74
किस नरक में कितनी बार लगातार जा सकता है जीव?
नरक से निकलकर जीव क्या नही बनता?
नरक के दुख
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -73
नरक की पृथ्वी के पटल और बिल,
नारकियों की ऊँचाई एवं आयु,
कौन किस नरक तक जा सकता है?
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -72
—-
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -71
—-
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -70
—-
(गाथा: -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -69
निर्जरा अनुप्रेक्षा को कैसे समझें?
समभाव एक औषधि के समान,
कर्म निर्जरा से आत्मा होता है सुखी
(गाथा : -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -68
आस्रव एवं संवर अनुप्रेक्षा,
रोग के समान है कर्म का आस्रव,
नासाग्र दृष्टि का क्या महत्व है?
(गाथा : -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -67
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -66
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -65
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -64
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -63
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -62
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -61
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -60
ईर्यापथ शुद्धि कैसे होती है?
भिक्षाशुद्धि में क्या ध्यान रखा जाता है?
शयनासनशुद्धि का पालन कैसे होता है?
(गाथा : -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -59
संयम पालन के लिए आठ प्रकार की शुद्धियाँ,
कर्म के क्षयोपशम से होने वाली भाव शुद्धि,
क्षयोपशम कैसे बढ़ता है?
(गाथा : -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -58
भाव संवर के भेद,
निश्चय और व्यवहार से व्रत कैसे होते हैं?
निश्चय धर्म से पहले होता है-व्यवहार धर्म
(गाथा : -35)
.
स्वाध्याय (वाचना) -57
क्या केवलज्ञान की किरण होती है?
क्षयोपशम किसे कहते हैं?(उदाहरण सहित)
क्षायिक और क्षायोपशमिक ज्ञान में अन्तर
(गाथा : -34)
.
स्वाध्याय (वाचना) -56
शुभोपयोग और शुद्धोपयोग में अन्तर,
शुद्धोपयोग की विशेषताएं,
अशुद्ध पर्याय से शुद्ध पर्याय का क्रम (उदाहरण सहित)
(गाथा : -34)
.
स्वाध्याय (वाचना) -55
शुद्धोपयोग किस गुणस्थान से होता है?
गुणस्थान के अनुसार अशुभ, शुभ और शुद्ध उपयोग,
चतुर्थ और पंचम काल के श्रावक
(गाथा : -34)
.
स्वाध्याय (वाचना) -54
आस्रव और बन्ध के कारण एक समान क्यों होते हैं?
द्रव्य संवर और भाव संयम में अन्तर,
भाव संवर का महत्व
(गाथा : -33)
.
स्वाध्याय (वाचना) -53
—-
(गाथा : -)
.
स्वाध्याय (वाचना) -52
—-
(गाथा : -)
.
स्वाध्याय (वाचना) -51
—-
(गाथा : -)
.
स्वाध्याय (वाचना) -50
भावास्रव के कारण,
प्रमाद किसे कहते हैं?
नोकषाय से भावास्रव कैसे होता है?
(गाथा : -30)
.
स्वाध्याय (वाचना) -49
—-
(गाथा : )
.
स्वाध्याय (वाचना) -48
—-
(गाथा : -)
स्वाध्याय (वाचना) -47
—-
(गाथा : -)
.
स्वाध्याय (वाचना) -46
—-
(गाथा : -)
.
स्वाध्याय (वाचना) -45
—-
(गाथा : -28)
अधिकार -1
Note- बृहद् द्रव्य संग्रह स्वाध्याय Video (1 से 44) तक देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं-















































