4. ज्ञान भावना

(सोलहकारण भावना)

Audio

ज्ञान भावना

–o–

न सुगुण से भरा हुआ है, आतम पूरा चारों ओर
निज स्वभाव को यूँ विचारकर, अन्य विषय पर ना है गौर।
इष्ट-अनिष्ट विषय को जो नित, ज्ञेय मात्र ही जान रहा
वह विरक्त साधू ही जग में, ज्ञान भावनावान रहा॥2॥

–o–

–o–

सम्यक्चारित पालन करता, नित रक्षण में भी दे ध्यान
सम्यग्दृष्टि वह अवश्य ही, भाता रहता ज्ञान प्रमाण।
शुद्ध आत्म परमार्थ भावना, के वश जो भी करता है
वह अभीक्ष्ण ज्ञानी माना है, भवि जन मन को हरता है॥4॥

–o–

–o–

जो कुछ हमें दिखाई देता, वह पदार्थ मम रुप नहीं
मैं शरीर ना वचन रूप ना, कर्म रुप मन रूप नहीं।
मैं आतम हूँ ज्ञान मात्र हूँ, नित्य भावना में लवलीन
ज्ञान मात्र उपयोग मात्र रस, ज्ञानी पी पी होता पीन॥6॥

–o–

–o–

ऊँ ह्रीं अर्हं ज्ञान भावना ममाSस्तु।


YouTube player

Posted in Uncategorized.

Comments will appear after approval.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.