परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा विरचित
विशिष्ट कृति “नई छ्हढाला” की द्वितीय ढाल पर
पूज्य मुनि श्री की ही अमृतमयी वाणी में
मंगल देशना
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प्रवचन (वाचना) -27
(काव्य: -18)
निश्चयनय से सम्यग्दर्शन के आठ अंग,
चार अनुयोगों से निश्चय सम्यग्ज्ञान का चिन्तन,
व्यवहार मोक्ष मार्ग से निश्चय मोक्ष मार्ग की ओर,
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प्रवचन (वाचना) -26
(काव्य: -17)
वीतराग विज्ञान और जैन विज्ञान में अन्तर,
वीतराग विज्ञान के नाम पर एकान्तवाद,
एकान्तवाद का अधूरा ज्ञान करता है भ्रमित,
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प्रवचन (वाचना) -25
(काव्य: -16)
निश्चय या वीतराग सम्यग्दर्शन क्या है?
कौन से गुणस्थान में होता है निश्चय सम्यग्दर्शन?
सराग सम्यग्दर्शन के बाद होता है वीतराग सम्यग्दर्शन
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प्रवचन (वाचना) -24
(काव्य: -16)
सम्यग्दर्शन के प्रकार,
सम्यग्दर्शन कैसे होता है?
व्यवहार या सराग सम्यग्दर्शन किसे कहते हैं?
.
प्रवचन (वाचना) -23
(काव्य: -15)
दृष्टिभ्रम कैसे होता है?
दर्शन मोहनीय कर्म के बन्धन,
उपशम सम्यग्दर्शन किसे कहते हैं?
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प्रवचन (वाचना) -22
(काव्य: -15)
दोषों से दूर रहकर होती है गुणों की रक्षा,
क्षायिक-क्षयोपशम सम्यग्दर्शन,
सम्यग्दृष्टि जीव में नहीं होता अहंकार
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प्रवचन (वाचना) -21
(काव्य: -14)
प्रभावना अंग-व्रजकुमार मुनि की कथा,
आत्मा की स्वतंत्रता क्या है?
रानी उर्विला द्वारा धर्म प्रभावना
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प्रवचन (वाचना) -20
(काव्य: -14)
प्रभावना अंग का कार्य,
व्रजकुमार मुनि की कथा,
भावलिंगी मुनि कौन होते हैं?
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प्रवचन (वाचना) -19
(काव्य: -14)
संकल्प से होती है कर्मों पर विजय,
विष्णु कुमार मुनि द्वारा 700 मुनियों की रक्षा,
साधर्मी की सहायता-सबसे बड़ा धर्म
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प्रवचन (वाचना) -18
(काव्य: -14)
तीन प्रकार के भाव,
कलह को रोकता है मौन,
वात्सल्य अंग कथा-अकम्पनाचार्य संघ पर उपसर्ग
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प्रवचन (वाचना) -17
(काव्य: -14)
स्थितिकरण अंग-वारिषेण मुनिराज की कथा,
चारित्र में स्थितिकरण करना कठिन कार्य,
सक्रिय सम्यग्दर्शन है साधर्मी की सहायता
.
प्रवचन (वाचना) -16
(काव्य: -14)
उपगूहन अंग-सेठ जिनेन्द्र भक्त की कहानी,
दुख दूर करता है कल्याण मन्दिर स्तोत्र का पाठ,
उपगूहन अंग का पालन कैसे करें?
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प्रवचन (वाचना) -15
(काव्य: -13)
रानी रेवती की कहानी,
सम्यग्दृष्टि का होता है आगम ज्ञान पर दृढ़ विश्वास,
चार प्रकार के विरले लोग कौन हैं?
.
प्रवचन (वाचना) -14
(काव्य: -13)
मूढ़ता से रहित होता है सम्यग्दृष्टि जीव,
दूर से मुनि महाराज का आशीर्वाद कब लेना चाहिए?
श्रावक कैसे करें अमूढ़ दृष्टि अंग का पालन?
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प्रवचन (वाचना) -12
(काव्य: -13)
निर्विचिकित्सा अंग किसे कहते हैं?
कषाय को मन्द कैसे करें?
दोषों पर दृष्टि रखना तीव्र कषाय का लक्षण
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अनन्तमति व्रत क्या है?
इसे कैसे ग्रहण किया जाता है?
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प्रवचन (वाचना) -11
(काव्य: -12)
संकल्पों और नियमों से होता है जीवन सुरक्षित,
अनन्तमति व्रत क्या है?
बेटियों को धारण कराएं अनन्तमति व्रत
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प्रवचन (वाचना) -10
(काव्य: -12)
नि:कांक्षित अंग को समझना क्यों है जरूरी,
पंचमकाल भी अच्छा है? क्यों
अनन्तमति की कथा
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प्रवचन (वाचना) -9
(काव्य: -12)
सम्यग्दृष्टि की भावना,
भय को बढ़ाता है सन्देह,
नि:शंकित भाव से करें धर्म की आराधना
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प्रवचन (वाचना) -8
(काव्य: -12)
सम्यग्दर्शन का नि:शंकित अंग,
अंजन चोर की कथा,
जिनदत्त सेठ की पंच परमेष्ठी में अटूट श्रद्धा,
तीर्थंकर भगवान की अवमानना कब हो जाती है?
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प्रवचन (वाचना) -7
(काव्य: 9-11)
पूर्व आचार्यों के उपकारों को करें नमन,
बच्चों को पूर्व आचार्यों के जीवन चरित्र का दे ज्ञान,
शास्त्रों को कैसे करें सुरक्षित?
सूर्य के समान उपकारी गुरु परम्परा
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प्रवचन (वाचना) -6
(काव्य: 6-8)
सर्वप्रथम सम्यग्दर्शन कैसे होता है?
श्रुतकेवली कौन होते हैं?
व्यवहार और निश्चय के विपरीत क्रम से बचें,
भावलिंगी मुनि किन्हें कहते हैं?
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प्रवचन (वाचना) -5
(काव्य: -5)
शास्त्र किसे कहते हैं?
जिनेन्द्र भगवान की वाणी की विशेषताएं,
राग की करें कमी, कैसे?
तीर्थंकर भगवान की वाणी सभी के लिए उपयोगी
.
प्रवचन (वाचना) -4
(काव्य: -4)
18 दोषों से रहित होते हैं भगवान,
निद्रा से रहित क्यों होते हैं अरिहन्त भगवान?
भगवान कैसे होना चाहिए?
ज्ञान से बढ़ती है श्रद्धा
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प्रवचन (वाचना) -3
(काव्य: -3)
आत्मा के रोगों का वैद्य कौन?
किन तीन तत्वों की सबसे पहले करें श्रद्धा?
नई छहढाला में समाहित नया ज्ञान,
अनुभव से नहीं श्रद्धान से होता है सम्यग्दर्शन
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प्रवचन (वाचना) -2
(काव्य: -2)
आत्मा के रोग,
रोग को रोग नहीं मानना ही बड़ी समस्या,
अपथ्य किसे कहते हैं?
अशुभ कर्म के बन्ध से बचें
.
प्रवचन (वाचना) -1
(काव्य: -1)
तत्काल प्रतिक्रमण से तात्पर्य,
मन के गलत विचारों को कैसे रोकें?
सबसे बड़ा मिथ्यात्व क्या?
मोह रूपी डाकू को कैसे पकड़ें?
प्रवचन स्थान-
- सेक्टर-50 नोएडा, उत्तर प्रदेश (Jun 2025),
- अतिशय क्षेत्र जैन लाल मन्दिर, दिल्ली (Jul-Aug 2025)


























