क्षमा प्रार्थना

नहीं रखो अपराध का बोध हीनता भाव,
क्षमा करो आगे बढ़ो भाओ सत्य स्वभाव।

निज मन को तन से लगा, निज चेतन से नेह,
क्षमा करो आगे बढ़ो, मुक्ति मुक्त करेह।

खुद से ही तू प्रेम कर, निज में नित तू झाँक,
क्षमा करो आगे बढ़ो मत निज को कम आँक।