श्रावक के 6 कर्तव्यों में से एक प्रमुख कर्तव्य स्वाध्याय कहा गया है अर्थात प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए। स्वाध्याय के पांच प्रकार होते हैं – वाचना, पृच्छना, अनुप्रेक्षा, आम्नाय एवं धर्मोपदेश। किसी स्तोत्र, स्तुति या किसी ग्रंथ के श्लोको, सूत्रों और गाथाओं का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करना आम्नाय स्वाध्याय कहलाता है । इस स्वाध्याय से भी अन्य स्वाध्याय की तरह ही पुण्य अर्जित होता है।
प्रस्तुत पेज में पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के सानिध्य में हुए आम्नाय स्वाध्याय को संकलित किया गया है। पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज और मुनि श्री अनुनय सागर जी महाराज के मधुर स्वर में आम्नाय स्वाध्याय का लाभ यहां से प्राप्त किया जा सकता है–
बारह भावना पाठ (प्राकृत)
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नई छहढाला पाठ (ढाल 1-3)
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कल्याण मन्दिर स्तोत्र पाठ (संस्कृत-हिन्दी)
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समाधितन्त्र ग्रन्थ पाठ
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इष्टोपदेश ग्रन्थ पाठ
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एकीभाव स्तोत्र पाठ
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श्री जिन सहस्रनाम स्तोत्र पाठ (संस्कृत)
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श्री मुनिसुव्रतनाथ स्तोत्र पाठ (संस्कृत-हिन्दी)
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चतुर्विंशति स्तोत्र पाठ (हिन्दी)
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श्री वर्धमान स्तोत्र पाठ (हिन्दी)
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श्री शान्तिनाथ स्तोत्र पाठ (हिन्दी)
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चतुर्विंशति स्तोत्र पाठ (प्राकृत)
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श्री भक्तामर स्तोत्र पाठ (हिन्दी)
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