वाचना(प्रवचन) -50 (17-Nov-2023) अमृत व औषध रूप हैं-जिनवचन, दुख-कष्ट दूर करता है-जिनवचनों का स्मरण, कैसे ? (गाथा : 102-104)
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वाचना(प्रवचन) -49 (16-Nov-2023) दुर्लभ जिनधर्म है-कल्पवृक्ष समान, सबसे सच्चा बन्धु ये-है सबसे महान, क्यों? (गाथा : 100-101)
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वाचना(प्रवचन) -48 (14-Nov-2023) जाने और माने जो अपने आत्म को, वही जान सकता है वास्तव में अध्यात्म को, क्यों? (गाथा : -99)
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वाचना(प्रवचन) -47 (11-Nov-2023) दूर होगी शारीरिक, मानसिक अस्वस्थता, जब आएगी आत्मिक स्वस्थता, कैसे ? (गाथा : -98)
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वाचना(प्रवचन) -46 (10-Nov-2023) सम्यक ज्ञान की वृद्धि, जीवन में लाती है सुख और समृद्धि, कैसे? (गाथा : -97)
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वाचना(प्रवचन) -45 (8-Nov-2023) दुर्लभ संयोग से मिलता है जिनमत, मोक्ष मार्ग पर बढ़ने के लिए चाहिए हिम्मत, क्यों? (गाथा : -96)
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वाचना(प्रवचन) -44 (7-Nov-2023) दुर्गुणों के साथ गुण, और गुणों के साथ अवगुण, (गाथा : -95)
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वाचना(प्रवचन) -43 (5-Nov-2023) राग में होता है भय, वैराग्य बनाता है निर्भय, कैसे? (गाथा : -94)
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वाचना(प्रवचन) -42 (4-Nov-2023) सुख चला जाता है, आ जाता है दुख, कैसे मिलता है सच्चा, स्थाई और आत्मिक सुख? (गाथा : 91-92)
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वाचना(प्रवचन) -41 (2-Nov-2023) मोह में डूबा जीव, मोह को न पहचाने, आत्मा को जानता नहीं, पर को अपना माने, कब? (गाथा : -91)
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वाचना(प्रवचन) -40 (1-Nov-2023) चखे एक बार जो आत्म-रस को, लगे भोग-रस नीरस उसको, क्यों? (गाथा : -90)
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वाचना(प्रवचन) -39 (31-Oct-2023) सबसे बड़े अज्ञान को जानें? राग द्वेष की फिसलन को पहचानें, किस प्रकार? (गाथा : -89)
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वाचना(प्रवचन) -38 (29-Oct-2023) जीव आता है, जीव जाता है, ज्ञान जीव को दुख से बचाता है, कैसे? (गाथा : -87)
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वाचना(प्रवचन) -37 (28-Oct-2023) आचार्य भगवन की अद्भुत समता, याद करें, तो बढ़ेगी दुख सहने की क्षमता, कैसे? (मंत्र जाप के साथ गुणों का स्मरण) (गाथा : -86)
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वाचना(प्रवचन) -36 (26-Oct-2023) दुखों को करें कम, सहन शक्ति बढ़ाएं, नरक के दुखों को स्मरण में लाएं, कब? (गाथा : 84-85)
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वाचना(प्रवचन) -35 (25-Oct-2023) स्थावर जीवों के दुखों का चिन्तन, दूर करे कर्मों का बन्धन, कैसे? (गाथा : 82-83)
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वाचना(प्रवचन) -34 (24-Oct-2023) तिर्यंच गति के दुखों का ध्यान, बचाएगा भविष्य में इन दुखों से प्राण, किस प्रकार ? (गाथा : 80-81)
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वाचना(प्रवचन) -33 (23-Oct-2023) पर्याप्त नहीं केवल जानकारी, आवश्यक है समझदारी, बुद्धि चले कर्म अनुसार (गाथा : -79)
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वाचना(प्रवचन) -32 (21-Oct-2023) स्नेह की बेड़ी, रस का बन्धन जीवन में दुखों को देतें हैं आमंत्रण, क्यों? (गाथा : 77-78)
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वाचना(प्रवचन) -31 (20-Oct-2023) पर मरण देखकर भी ढीठ बना मनुष्य पाप से डरता नहीं-आत्म हित करता नहीं, क्यों? (गाथा : 73-75)
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वाचना(प्रवचन) -30 (19-Oct-2023) आत्मा की याद-दूर करे प्रमाद, प्रमाद को कैसे समझें? (गाथा : 72-74)
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वाचना(प्रवचन) -29 (18-Oct-2023) मनुष्य जन्म संसार-सागर का किनारा, क्यों डूब जाती है कश्ती हर बार यहाँ? (गाथा : 69-71)
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वाचना(प्रवचन) -28 (17-Oct-2023) पुद्गल को खाया-पुद्गल को खिलाया, अनन्त जन्मों में तृष्णा को बढ़ाया, इस तृष्णा को कैसे जीतें? (गाथा : 66-68)
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वाचना(प्रवचन) -27 (16-Oct-2023) डरना भी अच्छा है, कब? पूर्व जन्मों का चिन्तन, कैसे करता दुख को कम (गाथा : 63-65)
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वाचना(प्रवचन) -26 (14-Oct-2023) मन-वचन-काय की कुटिलता का फल, कर्म बन्ध से डरें और कर्म फल का करें चिन्तन (गाथा : 60-62)
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वाचना(प्रवचन) -25 (13-Oct-2023) जीवन करें व्यतीत पर याद रखें पूर्व जन्मों का अतीत, चिन्ता से चिन्तन की ओर (गाथा : 57-59)
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वाचना(प्रवचन) -24 (12-Oct-2023) अन्तरंग प्रमाद क्या है? बेचारा और अप्प बैरी न बनें, इज्जत के साथ मरण को चुनें (गाथा : 54-56)
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वाचना(प्रवचन) -23 (11-Oct-2023) निगोद में जाना आसान है,लेकिन वहाँ से निकलना बहुत दुर्लभ है, क्यों? (गाथा : 51-53)
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वाचना(प्रवचन) -22 (10-Oct-2023) जीव का भव-भव में भ्रमण, कराता है असंख्यात माँ का रुदन, नरक से ज्यादा दुख निगोद में क्यों? (गाथा : 48-50)
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वाचना(प्रवचन) -21 (9-Oct-2023) मोह का दुख या तत्त्व चिन्तन का सुख आपने क्या चुना? (गाथा : 46-47)
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वाचना(प्रवचन) -20 (6-Oct-2023) सिंह-मुख में हिरण समान जीवन, भोगों को भोगा या भोगों ने भोग लिया (गाथा : 43-45)
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वाचना(प्रवचन) -19 (4-Oct-2023) अर्थ, व्यर्थ और अनर्थ से भरा जीवन, अपने कार्यों का परीक्षण कैसे करें? (गाथा : 40-42)
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वाचना(प्रवचन) -18 (3-Oct-2023) लक्ष्मी चंचल, सुख अस्थिर और संयोग हैं क्षणभंगुर, स्वयं को समझें और addiction को पहचानें (गाथा : 37-39)
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वाचना(प्रवचन) -17 (30-Sep-2023) धर्म करने के लिए बुढ़ापे की प्रतीक्षा न करें एवं चार प्रकार की शुद्धि का महत्व (गाथा : 35-36)
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वाचना(प्रवचन) -16 (18-Sep-2023) मेघ के समान क्षणभंगुर जीवन और जीवन का सार (गाथा : 32-34)
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वाचना(प्रवचन) -15 (16-Sep-2023) बड़े होकर भी बच्चे जैसे हैं आप, क्यों? कर्म बन्ध से बने सम्बन्ध (गाथा : 29-31)
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वाचना(प्रवचन) -13 (14-Sep-2023) प्रत्येक स्थान पर जीव कर चुका है जन्म-मरण, चिन्तन मन में लाये और दुख का करें शमन, कैसे? (गाथा : 23-25)
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वाचना(प्रवचन) -12 (13-Sep-2023) जाया और माया का खेल, संसार एक नाटक-सूत्रधार है कर्म आत्मा को सजा (सजाओं) -देकर शरीर को सजा (गाथा : -22)
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वाचना(प्रवचन) -11 (12-Sep-2023) पूर्व जन्मों के अनन्त माता-पिता-बंधुओं से भरा संसार, संसार में कौन शरण? संसार के बन्धन हैं परिवार आदि सम्बन्ध (गाथा : 19-21)
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वाचना(प्रवचन) -9 (9-Sep-2023) संसार-आठ कर्मों का जाल, कमल-पत्र पर जल-बूँद के समान सुख वैभव एवं बल, सौन्दर्य, यौवन हैं काल के ग्रास (गाथा : 13-15)
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वाचना(प्रवचन) -8 (8-Sep-2023) सूक्ष्म कर्मों के आधीन जीवात्मा, संसार में किसका कितना साथ? मृत्यु के बाद भी किसका वियोग नहीं होगा? (गाथा : 10-12)
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वाचना(प्रवचन) -7 (7-Sep-2023) काल रूपी सर्प और भ्रमर द्वारा काया का घात, श्री कृष्ण जन्म कथा एवं काल से बचने का उपाय (गाथा : 7-9)
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वाचना(प्रवचन) -6 (6-Sep-2023) कालचक्र में घटती आयु, राग द्वेष के खेल मे पिसने से बचें एवं राजा श्रेणिक को मुनिराज का सम्बोधन (गाथा : -6)
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वाचना(प्रवचन) -5 (16-Aug-2023) मैं कौन हूँ? (स्वयं को जानें) कौन से तीन राक्षस प्रत्येक व्यक्ति के पीछे लगे हैं? एवं राजा श्रेणिक का पश्चाताप (गाथा : -5)
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वाचना(प्रवचन) -4 (14-Aug-2023) दुख की फसल में सुख का बीज कैसे बोएं? राजा श्रेणिक द्वारा दिगम्बर मुनिराज पर उपसर्ग एवं पंथवाद को छोड़कर करें दिगम्बर साधु की आराधना (गाथा : -4)
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वाचना(प्रवचन) -3 (12-Aug-2023) आत्म साधना में विलम्ब करना घातक जाप, ध्यान, दान, संयम आदि कार्य तुरन्त करें एवं रानी चेलना द्वारा पुन: परीक्षा (गाथा : -3)
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वाचना(प्रवचन) -2 (11-Aug-2023) रागी और वैरागी की सोच में अन्तर जीवन की सबसे बड़ी गलती क्या है? एवं रानी चेलना द्वारा जिनधर्म प्रभावना और परीक्षा (गाथा : -2)
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वाचना(प्रवचन) -1 (10-Aug-2023) वैराग्य न होना भी आश्चर्य क्यों है? संस्कारों का महत्व एवं रानी चेलना का दुख (गाथा : -1)