नोट- वर्तमान समय में यह स्वाध्याय पाठशाला पूर्ण हो चुकी है।

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स्वाध्याय को 6 अंतरंग तपों में से एक तप माना जाता है। इसको करने से हमारा ज्ञान बढ़ता है, पुण्य अर्जित होता है, अशुभ कर्मों का क्षय होता है।
स्वाध्याय अनेक प्रकार से किया जाता है – जैसे स्वयं शास्त्र पढ़ना, गुरुजन के प्रवचन सुनना, प्रवचन के audio, video देखना – सुनना, सामूहिक रूप से बैठकर स्वाध्याय करना या प्रश्नों के उत्तर देकर स्वाध्याय करना आदि। Online स्वाध्याय classes या पाठशाला, स्वाध्याय करने का modern system है।
अभीक्ष्ण ज्ञानोपयोगी, प्राकृत मर्मज्ञ परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से 8 नवम्बर 2020 से वर्धमान स्तोत्र की online स्वाध्याय पाठशाला Telegram एवं whatsapp groups पर शुरू की गई।
वर्धमान स्तोत्र परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा वर्धमान महावीर की भक्ति में रचित, आधुनिक समय का एक प्रसिद्ध और जनप्रिय स्तोत्र है। इसको पढ़ने मात्र से हृदय में भक्ति के स्रोत फूट पड़ते हैं। ये स्वाध्याय कक्षाएं वर्धमान स्तोत्र के काव्यों पर पूज्य मुनि श्री के मंगलकारी प्रवचनों पर आधारित रही। किसी स्तोत्र के रचयिता के श्री मुख से ही उस स्तोत्र के काव्यों को सुनना, सौभाग्य से प्राप्त होता है और उससे भी बड़ा सौभाग्य होता है, उनके ही श्री मुख से स्तोत्र में रचित काव्य को समझना और उनका ज्ञान प्राप्त करना। यह दोनों सौभाग्य इन स्वाध्याय कक्षाओं में स्वाध्याय प्रेमियों को प्राप्त हुए। ये स्वाध्याय कक्षायें श्रावकों के लिये परम सौभाग्य जैसी रही क्योंकि इनके द्वारा वर्धमान स्तोत्र के काव्यों के ज्ञान के साथ साथ, उनका मनन, चिंतन करने का अभ्यास भी किया गया। भक्ति और ज्ञान दोनों का सुन्दर संगम इन स्वाध्याय कक्षाओं में देखने को मिला।
इन पाठशाला में नई नई technique प्रयोग करके video, written document, pdf, assignment, self tet, feedback, motivation, revision और discipline के साथ वर्धमान स्तोत्र का अध्ययन कराया गया। सबसे पहले परम पूज्य मुनि श्री के प्रवचन का एक वीडियो Audio और साथ में written text का Pdf share किया जाता। दिन में 2:30 pm पर एक question paper share किया जाता जिसको online solve करके उसी समय अपने marks जाने जा सकते थे।
इसके साथ ही पांच प्रश्न पूछे जाते जिनके उत्तर अपनी कॉपी पर लिखने होते थे। रात को 7:30 pm पर इनके उत्तर share कर दिए जाते । सभी विद्यार्थी अपने उत्तर इन से मिलाकर अपना self analysis कर लेते कि उनके उत्तर कितने सही और कितने गलत हैं। इसी समय अपनी शंका और सवाल भी group पर पूछे जाते थे। Saturday और Sunday को पाठशाला का अवकाश रहता। पाठशाला में समय- समय पर revision Test होते और Motivation के लिये अनेक तरह के Prize भी प्रदान किये जाते।
इन online classes में स्वाध्याय करने के अनेक methods का एक साथ प्रयोग किया गया और सभी स्वाध्याय प्रेमियों ने बड़े उत्साह एवं रुचि के साथ अपने ज्ञान में वृद्धि की।
नेहा जैन ‘प्राकृत’ – रेवाड़ी, ऋषभ जैन – दिल्ली, स्मिता जैन – पुणे और प्राकृत टीम के सभी परिश्रमी और समर्पित सदस्य इन पाठशालाओं का कुशलता पूर्वक संचालन किया।
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