Site icon मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी

आम्नाय स्वाध्याय

श्रावक के 6 कर्तव्यों में से एक प्रमुख कर्तव्य स्वाध्याय कहा गया है अर्थात प्रत्येक श्रावक को प्रतिदिन स्वाध्याय अवश्य करना चाहिए। स्वाध्याय के पांच प्रकार होते हैं – वाचना, पृच्छना, अनुप्रेक्षा, आम्नाय एवं धर्मोपदेश। किसी स्तोत्र, स्तुति या किसी ग्रंथ के श्लोको, सूत्रों और गाथाओं का शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करना आम्नाय स्वाध्याय कहलाता है । इस स्वाध्याय से भी अन्य स्वाध्याय की तरह ही पुण्य अर्जित होता है।


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