Site icon मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी

आध्यात्मिक भजन

सारी यात्रा एकाकी है               

       कोई नहीं किसी का साथी सारी यात्रा एकाकी है, भजन एक सुन्दर, आध्यात्मिक भजन है। यह भजन परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज द्वारा तो रचित नहीं है, पर इस भजन ने बचपन में ही उनको बहुत प्रभावित कर  दिया।

     एक धार्मिक आयोजन के अवसर पर, मंगलाचरण में, किसी ब्रह्मचारी भैया जी ने यह भजन प्रस्तुत किया तो पूज्य मुनि श्री का बाल मन इस भजन की विषय वस्तु से इतना प्रभावित हो गया कि वह इस भजन की लेखन कॉपी लेने के लिए, बहुत दूर तक उन भैया जी के पास अकेले पहुंच गए । एक  प्रवचन के मध्य में,जब  पूज्य मुनि श्री ने श्रावकों  के समक्ष, इस भजन के बारे में बताया और इस भजन को सुनाया तो श्रोताजन मंत्रमुग्ध हो उठे। एक बार मन नहीं भरा तो दोबारा सुनने के लिए, उन्होंने पूज्य मुनि श्री से निवेदन किया।

       पूज्य मुनि श्री की मधुर वाणी में, इस सुंदर, आध्यात्मिक भजन को सुनने का अनुभव ही निराला है। इस भजन को ऑडियो और वीडियो के साथ प्रस्तुत पेज पर संयोजित किया गया है—

https://pranamyasagar.guru/wp-content/uploads/2020/12/Adhyatmik-bhajan.mp3

जीवन का यह जन्म धरा पे,  एक बहुत गहरा सपना है,

जब तक नींद भरी आंखें हैं, तब तक दृश्य जगत अपना है,

कोई नहीं किसी का साथी ——  (1) 

जाने कितने जन्म जी लिए, द्वंदों का निसीम वृत है,

कभी पुण्य में कभी पाप मे, सुलझा उलझा अवश्य चित्त है,

कोई नहीं किसी का साथी —— (2) 

जैसे ज्योति दिये की जलती, वैसे ही नि:शब्द जलो तो,

तू ही पतित पात्र भी तू है, तू ही अमृत तू साकी है।

कोई नही किसी का साथी—— (3)

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