Site icon मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी

द्रव्य संग्रह

श्रावकगण की मनोस्थिति को समझते हुए उनको किसी विषय का step by step, सरल एवं मनोवैज्ञानिक तरीके से ज्ञान कराना और उस विषय को interesting बना देना परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के प्रवचनों की विशेषता है। जैन आगम के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘द्रव्य संग्रह ‘ पर जब पूज्य मुनि श्री ने अपनी चिरपरिचित सरल भाषा और सुगम्य शैली में प्रवचन दिए तो श्रोताओं को यह ग्रंथ आसानी से समझ में आया और उनको इसमें interest भी आने लगा। इन प्रवचनों को सुनकर श्रोतागण व्यवहारनय -निश्चयनय, दर्शनोपयोग – ज्ञानोपयोग आदि का अंतर और सात तत्वों का द्रव्य और भाव रुप से अर्थ भी बहुत easily समझ गये जिसमें वह पहले बहुत मुश्किल महसूस करते थे।

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