Site icon मुनि श्री 108 प्रणम्य सागर जी

कर्मबंध विज्ञान

अपने अदृश्य शत्रु को जानना, पहचानना, समझना और उस पर विजय प्राप्त करने की कला सिखाती है यह महत्वपूर्ण कृति– कर्मबंध विज्ञान।

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    हमारे जीवन में अनेक जीव, प्राणी ऐसे आते हैं या होते हैं, जिनके कारण हमें अनेक तरह की पीड़ा, दुख या हानि पहुंचती है। हम उन्हें अपने शत्रु के रूप में देखते हैं, परंतु कुछ दुश्मन, ऐसे भी होते हैं जो अदृश्य होते हैं। उनके कारण हम बहुत दुख उठाते हैं, कष्टों में रहते हैं और अनेक बाधाओं का सामना करते हैं पर इन दुश्मनों को पहचान नहीं पाते, पहचानना तो बहुत दूर की बात, हम जीवन भर अज्ञानता में उनकी गुलामी करते रहते हैं, अपना भला करने की जगह, अपने लिए भारी क्षति कर लेते हैं और हमें इसका पता ही नहीं चलता। 

      हमें अपने अनुसार चलाने वाले ये अदृश्य शक्तिशाली शत्रु कौन हैं, उसकी सेना, दल, बल, परिवार, शक्तियों की जानकारी, इस कृति से प्राप्त हो जाती है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कृति? 

     (1) शत्रु पर तो हर कोई विजय प्राप्त करना चाहता है लेकिन शत्रु को तभी पराजित किया जा सकता है जब हमें उसके बारे में सम्पूर्ण जानकारी हो। जैसे किसी राजा को उसके गुप्तचर, शत्रु के बारे में जानकारी देते हैं, वैसे ही यह कृति हमारे सबसे बड़े अदृश्य शत्रु के बारे में विस्तृत रूप से बताती  है–इस शत्रु की क्या शक्तियां हैं और जीवन में कैसे और किस तरह यह शत्रु हमें पीड़ित करता है? कितने प्रकार से किस विधि से यह हमें क्षति पहुंचाता है? कुल मिलाकर इस शत्रु का पूरा लेखा-जोखा यह कृति हमारे सामने रख देती है।

     (2) इसके अतिरिक्त, इस शत्रु को कैसे दूर भगाया जा सकता है उसकी विधि भी इस कृति को पढ़कर समझ आ जाती है। 

     (3) इतना ही नहीं, यह कृति हमें यह भी बता देती है कि इस अदृश्य शत्रु की सेना दलबल, परिवार में कुछ ऐसे तत्व भी हैं, जो हमें कोई हानि नहीं पहुंचाते अपितु अनेक तरह से हमारा भला करते हैं। इनकी सहायता से हम कैसे इस अदृश्य शत्रु को पराजित कर  भविष्य में अपने को सुखी बना सकते हैं? यह भी इस कृति को पढ़कर हमें पता चलता है।

     (4) किसी प्राणी को बहुत अधिक नींद आती है तो कोई नींद में चलता भी है, ऐसा क्यों होता है? कोई व्यक्ति मोटा- पतला, कोई छोटा- लम्बा या गोरा-काला, तो कोई सुन्दर रंग- रूप का और कोई इसके विपरीत क्यों होता है? इन प्रश्नों का उत्तर भी इस कृति में मिलता है।

     (5) किसी व्यक्ति में गुण ना होने पर भी उसकी खूब प्रशंसा होती है, नाम होता है। किसी में सद्गुण भरे होते हैं पर उसका कोई नाम, प्रशंसा नहीं होती। अनेक व्यक्तियों को शिकायत होती है कि हमारी बात कोई ध्यान से नहीं सुनता, न ही समझता है। इन सभी का कारण भी यह कृति समझा देती है।

     (6) इस कृति में अनेक चार्ट, ग्राफिक्स और चित्रों का उपयोग किया गया है और साथ ही अनेक शंकाओं का समाधान भी दिया गया है, जिससे विषय को समझने में बहुत सहायता मिलती है।

      निष्कर्ष रूप में, यह कृति, हमारे ऐसे सच्चे मित्र की तरह है जो हमारे मन में आने वाले असंतुष्टि के भावों को शान्त करती है और शक्तिशाली अदृश्य शत्रु पर विजय प्राप्त करने में हमारी सहायता करती है।

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