इस पर्यूषण पर्व पर श्रावकों को नहीं होना पड़ा निराश, virtual साधना शिविर से भक्तों में छा रहा है उत्साह और उल्लास

                  भाद्रपद मास में आने वाला पर्यूषण पर्व, दशलक्षण पर्व प्रमुख जैन पर्व माना जाता है। जैन श्रावक इन दिनों में अपना समय व्रत, उपवास, नियम, संयम आदि द्वारा साधना करने में लगाते हैं। इसके साथ ही वे देव पूजा, वंदना, भक्ति द्वारा अपने लिए पुण्य अर्जन करते हैं। पर्यूषण पर्व के दिनों में जैन श्रावक संसारिक यात्रा से आध्यात्मिक यात्रा की तरफ आते हैं। इन 10 दिनों में वे अपने को refresh करते हैं, अपने जीवन की नई ढंग से Formatting करते हैं या कह सकते हैं, 10 दिनों में वे आध्यात्मिक ट्रेनिंग लेते हैं कि वर्ष में आगे आने वाले दिनों में किस तरह अपने जीवन को जीना है।

                   सभी जैन श्रावकों  के लिए ये दिन बहुत पावन और शुभ माने जाते हैं। यही कारण है, इन दिनों में सभी श्रावक कुछ ना कुछ समय देव पूजा, भक्ति, स्वाध्याय आदि के लिए अवश्य निकालते हैं। जो लोग प्राय: मंदिर नहीं जाते थे, वे भी इन दिनों में मंदिर आकर देव पूजन, भक्ति, आरती करते हैं।

                 अनेक स्थानों पर और चतुर्मास स्थलों पर गुरुजनों के सानिध्य में दशलक्षण पर्व के दिनों में साधना शिविर लगाए जाते हैं। इन शिविरों में श्रावक उत्साह से भाग लेते हैं। सुबह से शाम तक एक निश्चित दिनचर्या का पालन करते हैं और तप साधना करते हैं। शिविर के माध्यम से श्रावकजन 10 दिनों में घर परिवार से थोड़ा मोह हटा कर, अपने आत्म तत्व को पहचानने का अभ्यास करते हैं। एक नई तरह की आध्यात्मिक जीवन जीने की कला सीख कर, अपनी आत्मा को विशुद्ध बनाने का प्रयास करते हैं एवं अपनी आत्म शक्ति को बढ़ाते हैं।

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विपरीत परिस्थिति में मिली नई राह —

                    वर्तमान समय में फैले कोरोना संकट ने पूरे विश्व को अपनी चपेट में ले रखा है। सभी धार्मिक, आध्यात्मिक, सांसारिक गतिविधियों पर इस संकट का प्रभाव पड़ा है। इसी कारण भाद्रपद मास प्रारम्भ होते ही जैन श्रावकों  के मन में चिंता होने लगी कि इस बार हम अपना पर्यूषण पर्व कैसे मनायेंगे? किस तरह हम इस बार साधना शिविर में भाग ले पाएंगे?

                    गुरुजन, मुनि जन हमेशा श्रावकों की चिन्ता, समस्याओं को समझते हैं और उनके लिए नया रास्ता सुझाते हैं। नई सोच नए चिन्तन के साथ मानव समुदाय का अनेक तरह से उपकार करने वाले जन जन के परम उपकारी  पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज ने श्रावकों की इस समस्या, चिन्ता का समाधान करते हुए दशलक्षण पर्व पर इस बार online virtual  साधना शिविर के आयोजन के लिए अपनी सहमति दे दी है। परम पूज्य मुनि श्री प्रणम्य सागर जी महाराज के मार्गदर्शन में लगने वाले शिविर का नाम है — अर्हं स्वधर्म शिविर 2020। यह शिविर 23 अगस्त 2020 से 1 सितंबर 2020 तक चलेगा। अर्हं टीम के सदस्य बहुत लगन व मेहनत से शिविर का सफल आयोजन कर रहे हैं। इस शिविर के माध्यम से श्रावक जन दूर बैठकर भी पूज्य मुनि श्री के सानिध्य में स्वयं को अनुभव कर रहें हैं। इस शिविर की इस तरह की योजना व कार्यप्रणाली बनायी गई है।। प्रत्यक्ष शिविरों में भाग लेने वाले श्रावकों की संख्या सीमित होते थी, पर इस virtual शिविर में बड़ी संख्या में लोग भाग ले पा रहे हैं । इसके अतिरिक्त virtual, online होने के कारण इस बार साधना शिविर की पहुंच पूरे विश्व तक हो गई है । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म,whatsapp, you tube, website, facebook के माध्यम से इस शिविर का आयोजन किया जा रहा है । सभी आयु वर्ग के श्रावक शिविर का लाभ लेकर अपने को धन्य मान रहे हैं।

          Virtual शिविर की न्यूज के साथ ही श्रावकों का मन प्रसन्नता से भर गया। उनकी निराशा दूर हुई और अब बहुत आनंद और उत्साह के साथ श्रावक जन बड़ी संख्या में इस प्रथम virtual और ग्लोबल शिविर में भाग लेकर दशलक्षण पर्व को मना रहे हैं और अपने को धन्य मान रहे है।

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