यहाँ आया न मर्जी से

जिया मन खूब मर्जी से, बड़ा गमगीन अफसाना।
यहाँ आया न मर्जी से, न मर्जी से वहाँ जाना।।

घुटन सब ओर हर दिल के गरल के घूंट पीता है
बयां कर भी नहीं सकता सिसकता और जीता है
यहाँ बेवश हर इक इंसा हुआ है कैद पिंजड़े में
कि हैं पर फिर भी मुश्किल क्यों रहा पक्षी का उड़ पाना
यहाँ आया न……….

जवाँ हर आरजू दिल की, जवां दिल का तराना है
जवाँ होने से पहले ही जवां का कारनामा है
ये हैं दो चार दिन के खेल जीवन भर की बरबादी
बड़ा मुश्किल यहाँ होता बुझा दीपक जला पाना
यहाँ आया न……….

किसी के हार जाने से मना मत जश्न खुशियों का
ये सब तो वक्त की बातें नहीं रख बैर सदियों का
नहीं कोई सदा हारा नहीं कोई सदा जीता
किसी का दिल दुखा करके कहाँ तक हो खुशी पाना
यहाँ आया न……….

चमन हर वक्त चेतन का, यहाँ आबाद रहता है
महक उसकी जिसे आये वो बन्दा मस्त रहता है
बस इक विश्वास उसका कर, है धोखा जिस्म, दौलत में
बहुत कठिनाई का आलम यहाँ खुद को समझ पाना
यहाँ आया न……….

Posted in Bhajan.

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