मेरा मन समर्थ हो

मेरी प्रभु से प्रार्थना, आत्म शक्ति अर्थ हो।
मेरा मन समर्थ हो, मेरा मन समर्थ हो ।।

मेरा जो बुरा करे, जो मुझे न चाहता,
मेरी बात को सदा जो द्वेष से नकारता,

मेरे मन में उसके लिए साम्यभाव हो सदा,
बैर अरु विरोध में, पल न मेरा व्यर्थ हो।
मेरा मन समर्थ हो, मेरा मन समर्थ हो ।।1।।

हम किसी के कार्य में कभी न विध्न डाल दें,
झूठ, छल, फरेब से न उलझनों का जाल दें,
दूसरों की उन्नति में मन की हो प्रसन्नता,
प्रेम भावना की धार, दृष्टि में तदर्थ हो।
मेरा मन समर्थ हो, मेरा मन समर्थ हो ।।2।।

भले न मेरी चाह कभी पूर्ण हो अपूर्ण हो,
मन मेरा उत्साह से उमंग से परिपूर्ण हो,

रोग में, वियोग में न आए कभी खिन्नता,

हम सदा ही खुश रहें ये भावना सशर्त हो।
मेरा मन समर्थ हो, मेरा मन समर्थ हो ।।3।।

देश के उत्थान में, धर्म के प्रचार में,
सत्य शान्ति मित्रता अहिंसा के प्रसार में,
परोपकार में रहे, सदा हमारी भावना,
मेरी उम्र में नहीं किसी भी क्षण अनर्थ हो।
मेरा मन समर्थ हो, मेरा मन समर्थ हो ।।4।।

Posted in Bhajan.

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